सनत्कुमार संहिता

मुक्त ज्ञानकोष विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

श्री हंस भगवान के चार शिष्य हुए। वे चार शिष्य ब्रह्मा के चार पुत्र सनक, सनंदन, सनातन और सनत थे। इन चारों ने भगवान हंस की शिक्षाओं को लिपिबद्ध करते हुए ‘अष्टयम लीला’ और ‘गोपी भाव उपासना’, पुस्तकों की रचना की। इन पुस्तकों को सनतकुमार संहिता भी कहा जाता है।[1]


संदर्भ[संपादित करें]

  1. भगवान हंस का सम्प्रदाय।भारतीय पक्ष।भारत कुमार।