शोले (१९७५ फ़िल्म)

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शोले
शोले.jpg
शोले का पोस्टर
निर्देशक रमेश सिप्पी
निर्माता जी पी सिप्पी
लेखक जावेद अख़्तर, सलीम ख़ान
पटकथा जावेद अख़्तर,सलीम ख़ान
अभिनेता धर्मेन्द्र,
संजीव कुमार,
अमिताभ बच्चन,
अमज़द ख़ान,
हेमामालिनी,
जया बच्चन,
ए के हंगल,
असरानी,
जगदीप,
सचिन,
कैस्टो मुखर्जी
संगीतकार राहुल देव बर्मन
छायाकार द्वारका दिवेचा
संपादक एम् एस शिंदे
प्रदर्शन तिथि(याँ) 15 अगस्त 1976 (1976-08-15)
कार्यावधि 204 मिनट
देश Flag of India.svg भारत
भाषा हिन्दी
लागत भारतीय रुपया 2 करोड़
कुल कारोबार भारतीय रुपया 15 करोड़

शोले 1975 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। इसका नाम हिन्दुस्तान की सार्वकालिक बेहतरीन फ़िल्मों में शुमार है तथा इसने कई आगामी फिल्मों के लिए एक प्रेरणास्रोत का काम किया।

विषय[संपादित करें]

रामगड के ठाकुर बलदेव सिंह (संजीव कुमार) एक इंसपेक्टर है जिसने, एक डाकू सरगना गब्बर सिंह (अमज़द ख़ान) को पकड़कर जेल में डलवा दिया। पर गब्बर जेल से भाग निकलता है और ठाकुर के परिवार को बर्बाद कर देता है। इसका बदला लेने के लिए ठाकुर दो चोरों की मदद लेता है - जय (अमिताभ बच्चन) तथा वीरू (धर्मेन्द्र)।

गब्बर के तीन साथी रामगड के ग्रामीणों से अनाज लेने आते हैं, पर जय और वीरु की वजह से उन्हे खाली हाथ जाना पडता है। गब्बर उनके मात्र दो लोगो से हारने पर बहुत क्रोधित होता है और उन तीनो को मार डालता है। गब्बर होली के दिन गाँव पर हमला करता है और काफ़ी लडाई के बाद जय और वीरु को बंधक बना लेता है। ठाकुर उन्की मदद करने कि स्थीति मे होने पर भी उनकी मदद नही करता। किसी तरह जय और वीरु बच जाते है। तब ठाकुर उन्हे बताता है कि किस तरह कुछ समय पहले, उसने गब्बर को गिरफ्तार किया था पर वो जेल से भाग गया और ठाकुर के पूरे परिवार को मार डाला। बाद मे उसने ठाकुर को पकड कर उसके दोनो हाथ काट दिये।

रामगड मे रहते हुये जय को ठाकुर की विधवा बहू राधा (जया बच्चन) और वीरु को बसन्ती (हेमा मालिनी) से प्यार हो जाता है।

बसन्ती और वीरु को गब्बर के आदमी पकड कर ले जाते है और जय उनको बचाने जाता है। लडाई मे जय को गोली लग जाती है। वीरु गब्बर के पीछे जाता है और उसे पकदड लेता है।

मुख्य कलाकार[संपादित करें]

दल[संपादित करें]

संगीत[संपादित करें]

  • गीत "महबूबा मेहबूबा" राहुल देव बर्मन ने गाया, जिसे हेलेन और जलाल आगा पर फ़िल्माया गया था| यह गीत बिनाका गीत माला १९७५ वार्षिक सूची पर २४वीं पायदान पर तथा १९७६ वार्षिक सूची पर ५वीं पायदान पर रही|[1]
  • गीत "कोई हसीना जब रूठ जाती है" बिनाका गीत माला की १९७५ वार्षिक सूची पर ३०वीं पायदान पर और १९७६ वार्षिक सूची पर २०वीं पायदान पर रही|[2]
  • गीत "ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे" बिनाका गीत माला की १९७६ वार्षिक सूची पर ९वीं पायदान पर रही|

गीतकार आनन्द बक्शी, all संगीतकार राहुल देव बर्मन.

गाने
क्र. शीर्षक गायन अवधि
1. "कोई हसीना जब रूठ जाती है"   किशोर कुमार, हेमा मालिनी ४:००
2. "महबूबा महबूबा"   राहुल देव बर्मन ३:५४
3. "ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे"   किशोर कुमार, मन्ना डे ५:२१
4. "ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे" (दुखद) किशोर कुमार १:४९
5. "हाँ जब तक है जाँ"   लता मंगेशकर ५:२६
6. "होली के दिन दिल खिल जाते है"   किशोर कुमार, लता मंगेशकर, समूह ५:४२

रोचक तथ्य[संपादित करें]

  • इसी वर्ष (१९७५) धर्मेन्द्र तथा अमिताभ बच्चन द्वारा अभिनीत फिल्म चुपके चुपके भी रिलीज़ हुई थी जो आगे चलकर कई भावी फिल्मों के लिए मील का पत्थर साबित हुई।
  • इस फिल्म का एक और अन्त रखा गया था जिसमें गब्बर सिंह मर जाता है। इस सीन को फिल्म में नहीं दिखाया गया था। काफी सालों बाद इस सीन को कुछ एक टीवी चनलों पर दिखाया गया था।

परिणाम[संपादित करें]

बौक्स ऑफिस[संपादित करें]

शोले फ़िल्म १५ अगस्त १९७५ को रिलीज़ हुयी। शुरु के दो सप्ताह ये कुछ खास नही चली, पर तीसरे सप्ताह से ये रातो रात सन्सनी बन गयी। अंततः यह फ़िल्म १९७५ की सर्वाधिक कमाई करने वाली फ़िल्म बनी। इस फ़िल्म ने भारत मे लगातार मे लगातार ५० सप्ताह तक प्रदर्शन का कीर्तीमान भी बनाया। साथ ही यह फ़िल्म भारतीय फ़िल्मो के इतिहास मे ऐसी पहली फ़िल्म बनी, जिसने सौ से भी ज्यादा सिनेमा घरो मे रजत जयंती (२५ सप्ताह) मनाई। मुम्बई के मिनर्वा सिनेमाघर मे इसे लगातार ५ वर्षों तक प्रदर्शित किय गया।

अपने प्रथम के दौरान इसने १५ करोड रुपयों की कमाई की, जो कि इसकी २ करोड की लागत से कई गुना था। अनुमान के मुताबिक, मंहगाई दर के आधार पर समायोजित करने पर यह फ़िल्म, भारतीय सिनेमा जगत के इतिहास मे सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फ़िल्म है।

नामांकरण और पुरस्कार[संपादित करें]

वर्ष नामित कार्य पुरस्कार परिणाम
1975 एम एस शिंदे फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ संपादक पुरस्कार जीता
जी पी सिप्पी[3] फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार नामित
रमेश सिप्पी फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार नामित
संजीव कुमार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार नामित
अमज़द खान फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार नामित
असरानी फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता पुरस्कार नामित
जावेद अख्तर, सलीम ख़ान फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ कथा पुरस्कार नामित
राहुल देव बर्मन फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संगीतकार पुरस्कार नामित
आनंद बख्शी (गीत "महबूबा महबूबा" के लिए) फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ गीतकार पुरस्कार नामित
राहुल देव बर्मन ("महबूबा महबूबा" गाने के लिए) फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक पुरस्कार नामित
- अमज़द खान सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता - बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट असोसिएशन पुरस्कार (हिंदी विभाग) जीता
द्वारका दिवेचा सर्वश्रेष्ठ छायांकन (रंगीन) - बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट असोसिएशन पुरस्कार (हिंदी विभाग) जीता
राम येडेकर सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशक - बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट असोसिएशन पुरस्कार (हिंदी विभाग) जीता

उल्लेख[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]