क़ुतुब मीनार

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[संपादित करें] प्रस्तावना

कुतुब समूह के अन्य उल्लेखनीय स्थलों एवं निर्माणों हेतु देखें मुख्य लेख

निर्देशांक: 28.524355° N 77.185248° E

७२.५ मीटर (२३७.८६ फीट)  मीटर चौडी़ कुतुब मीनार, विश्व की सर्वोच्च ईंट निर्मित अट्टालिका (मीनार) है.
७२.५ मीटर (२३७.८६ फीट) मीटर चौडी़ कुतुब मीनार, विश्व की सर्वोच्च ईंट निर्मित अट्टालिका (मीनार) है.
कुतुब मीनार अपने साथी इमारत समूह समेत युनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित है.
कुतुब मीनार अपने साथी इमारत समूह समेत युनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित है.


कुतुब मीनार (उर्दु: قطب منار) विश्व की सर्वोच्च ईंट निर्मित इमारत है, और भारतीय इस्लामी स्थापत्यकला का अनूठा और विशेष नमूना है. यह अट्टालिका भारत के दक्षिण दिल्ली शहर के महरौली भाग में स्थित है. कुतुब मीनार अपने साथी इमारत समूह समेत युनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित है.

कुतुब मीनार ७२.५ मीटर (२३७.८६ फीट) ऊँची है, और इसमें ऊपर जाने के लिये 379 सीढियां हैं. इसके आधार पर व्यास 14.3 मी चौडा़ है, जो ऊपर जाकर शिखर पर २.७५ मीटर (९.०२ फीट) मीटर हो जाता है. इसको घेरे हुए, अहाते में भारतीय कला के कई उत्कृष्ट उदाहरण मिलेंगे, जो इसके निर्माण काल सन 1193 या पूर्व के भी हैं. एक दूसरी मीनार निर्माण की भी योजना थी, जो कि इस मीनार से दुगुनी ऊंची बननी निश्चित की गयी थी, परंतु इसका निर्माण 12 मीटर पर ही आकस्मिक कारणों से रुक गया.

अनुक्रम


[संपादित करें] इतिहास

उतुब मीनार के पास प्राचीन भारतीय हिन्दू शिल्पकारी के अवशेष
उतुब मीनार के पास प्राचीन भारतीय हिन्दू शिल्पकारी के अवशेष

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अनुसार, इसके निर्माण पूर्व यहां सुन्दर 20 जैन मन्दिर बने थे. उन्हें ध्वस्त करके उसकी सामग्री पाषाण इत्यादि से वर्तमान इमारतें बनीं.

मीनार पर की गयी महीन नक्काशी कुरान की आयतें एवं फूल बेल से अलंकृत है।
मीनार पर की गयी महीन नक्काशी कुरान की आयतें एवं फूल बेल से अलंकृत है।

अफ़गानिस्तान में स्थित, जाम की मीनार से प्रेरित एवं उससे आगे निकलने की इच्छा से, कुतुबुद्दीन ऐबक, दिल्ली के प्रथम मुस्लिम शासक ने कुतुब मीनार का निर्माण सन 1193 में आरम्भ करवाया, परन्तु केवल इसका आधार ही बनवा पाया. उसके उत्तराधिकारी इल्तुतमिश ने इसमें तीन मंजिलों को बढ़ाया, और सन 1368 में फीरोजशाह तुगलक ने पाँचवीं और अन्तिम मंजिल बनवायी.ऐबक से तुगलक तक स्थापत्य एवं वास्तु शैली में बदलाव, यहां भली भांति प्रतिबिम्बित होता है. अफ़गानिस्तान में गज़नवी एवं घुरिदों द्वरा निर्मित अन्य मीनारों की भांति ही, कुतुब मीनार में भी कई उभरे हुए चौकोर एवं गोल किनारे वाले दण्ड बाहरी दीवार पर बने हैं, जो की नीचे से लम्बवत ऊपरी मंजिलों पर जाते हुए, मुकर्नों और टोडा युक्त छज्जों से अलग होतीं हैं. मीनार को लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है, जिस पर कुरान की आयतों की एवं फ़ूल बेलों की महीन नक्काशी की गई है. कुतुब मीनार पुरातन दिल्ली शहर, धिल्लिका के प्राचीन किले लालकोट के अवशेषों पर बनी है. धिल्लिका तोमर और चौहान, अन्तिम हिन्दू राजाओं की राजधानी रही थी.

[संपादित करें] निर्माण का उद्देश्य

इस मीनार के निर्माण उद्देश्य के बारे में कई अटकलें लगाई जा चुकी हैं.

    • शायद यह निरीक्षण एवं सुरक्षा हेतु बनी
    • शायद यह कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद से अजा़न देने हेतु बनाई गई।
    • शायद यह इस्लाम की दिल्ली पर विजय के प्रतीक रूप में बनी

इसके नाम के बारे में भी विवाद हैं। कई पुरातत्व शास्त्रियों का मत है कि इसका नाम प्रथम तुर्की सुल्तान कुतुबुद्दीन एबक के नाम पर पडा़, वहीं कई यह भी मानते हैं, कि बगदाद के प्रसिद्ध सन्त कुतुबुद्दीन बख्तियार काकीके नाम पर है, जो कि भारत में वास करने आये थे, औरिल्तुतमिश उनका बहुत आदर्करता था, इसलिये उसने यह नाम दिया.

इसकी सतह पर शिलालेख के अनुसार, इसकी मरम्मत प्रथम तो फ़िरोज शाह तुगलक (AD 1351–88) ने, फ़िर सिकंदर लोधी ने (AD 1489–1517) करवाई. मेजर आर.स्मिथ ने भी इसका पुनरुत्थान सन 1829 मेम करवाया था.

[संपादित करें] निकटस्थ लौह स्तंभ

निकटवर्ती लौह स्तंभ विश्व की सर्वाधिक चर्चित एवं प्रशंसित खनिजशास्त्रीय जिज्ञासा का केन्द्र है. एक प्राचीन धारणा अनुसार, जो कोई भी, अपनी भुजाओं से इस स्तंभ को घेर लेगा, जब उसकी पीठ भाग स्तंभ की ओर हो, तो उसकी इच्छाएं पूर्ण हो जायेंगी. स्वेद की क्षयकर गुणों के कारण अब लोगों को इसके पास नहीं आने दिया जाता.

[संपादित करें] चित्रदीर्घा

[संपादित करें] सन्दर्भ


[संपादित करें] बाहरी कडि़यां

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