हेनरी टामस कोलब्रुक

हेनरी टामस कोलब्रुक (१७६५-१८३७ ई.)। इंग्लैंड के प्रख्यात प्राच्य विद्याविशारद तथा गणितज्ञ थे। उन्हें 'यूरोप का प्रथम महान संस्कृत विद्वान' माना जाता है।
परिचय
[संपादित करें]हेनरी टामस कोलब्रुक का जन्म १५ जून,१७६५ ई. को लन्दन में हुआ था। उनके पिता सर जार्ज कोलब्रुक ईस्ट इंडिया कंपनी के संचालक-मंडल के अध्यक्ष थे। अत: १७८२-८३ ई. में वे भारत आए और तिरहुत के सहायक कलक्टर के पद पर नियुक्त हुए। १७९५ में उनकी नियुक्ति मिरजापुर (उत्तर प्रदेश) में हुई। वहाँ उनको प्राच्य भाषाओं के अध्ययन के लिये विशेष अवसर प्राप्त हुआ। १८०१ ई. में वे कलकत्ते के सदर दीवानी आदालत के जज नियुक्त किए गए और चार वर्ष के पश्चात् उस अदालत के वे अध्यक्ष बने। उसी समय में कलकत्ता के फोर्ट विलियम कालेज में संस्कृत तथा हिन्दू कानून के अवैतनिक अध्यापक नियुक्त हुए। वे अनेक वर्षों तक बोर्ड ऑव रेवेन्यु के सदस्य भी रहे।
कोलब्रुक बड़े मेधावी गणितज्ञ, उत्साही ज्योतिषी तथा संस्कृत भाषा के गंभीर विद्वान् थे। इन्होंने प्राच्य विद्या के विविध अंगों पर मौलिक लेख लिखे जिनके द्वारा इन विषयों का प्रथम प्रामाणिक परिचय पाश्चात्य विद्वानों को मिला। वेद, संस्कृत व्याकरण, कोश, जैनमत, हिंदू विधि, भारतीय दर्शन, भारतीय बीजगणित आदि विषयों पर इनके लेख आज भी ज्ञानवर्धक माने जाते हैं। इनके ये लेख कलकत्ता से प्रकाशित होने वाली ‘एशियांटिक रिसर्सेज़’ नामक प्रख्यात शोधपत्रिका में छपे। बाद में इनका संग्रह उनके पुत्र ने स्वतंत्र ग्रंथ के रूप में किया। वे १८०७-१४ तक बंगाल एशियाटिक सोसाइटी के सभापति रहे। लंदन लौटकर उन्होंने रॉयल एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना (१८२३) में विशेष योग दिया। वे उसके संचालक भी बने। यूरोप की अनेक सभाओं ने अपना सम्मानित सदस्य बनाकर इनके प्रति विशेष आदर प्रदर्शित किया। भारत में रहते हुए इन्होंने संस्कृत हस्तलेखों का एक विशाल तथा बहुमूल्य संग्रह किया था। इस संग्रह को उन्होंने १८१८ ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी के पुस्तकालय को दे दिया। इनके पुत्र सर टामस एडवर्ड कोलब्रुक (१८१३-९० ई.) इंग्लैंड के प्रख्यात राजनीतिज्ञ हुए।
कृतियाँ
[संपादित करें]भारतविद्या सम्बन्धी
[संपादित करें]- Remarks on the Husbandry and Internal Commerce of Bengal (Revised ed.). Calcutta. 1804 [1795]. ओसीएलसी 81391410.
- A Grammar of the Sanscrit Language. Calcutta: Honorable Company's Press. 1804. ओसीएलसी 1086520079.
- Cosha or Dictionary of the Sanscrit Language. Serampoor. 1808. ओसीएलसी 1040332244. (by Amara Singh; with an English interpretation and annotations by H.T. Colebrooke)
- Two Treatises on the Hindu Law of Inheritance. Calcutta: Hindoostanee Press. 1810. ओसीएलसी 246404698.
- Algebra, with Arithmetic and Mensuration, from the Sanscrit of Brahmegupta and Bháscara. London: John Murray. 1817. ओसीएलसी 54570166.
- Treatise on Obligations and Contracts. London: Black, Kingsbury, Parbury, and Allen. 1818. ओसीएलसी 900298882.
- Miscellaneous Essays. Vol. 1. London: Wm. H. Allen. 1837.
- Miscellaneous Essays. Vol. 2. London: Wm. H. Allen. 1837.
- The Sánkhya Káriká, or Memorial Verses on the Sánkhya Philosophy by Iswara Krishna (also, The Bhashya or Commentary of Gaurapada, translated... by Horace Hayman Wilson). Oxford: Oriental Translation Fund of Great Britain and Ireland. 1837. ओसीएलसी 222040333.