समाज-विज्ञान विश्वकोश

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समाज-विज्ञान विश्वकोश हिन्दी भाषा में समाज-विज्ञान एवं मानविकी से सम्बद्ध विषयों पर केन्द्रित एक बहुआयामी विश्वकोश है। इसमें इन विषयों से सम्बद्ध प्रविष्टियों में विश्लेषणात्मक रूप से विविध विचारों, मुद्दों विचारक-लेखक-व्यक्तित्व-कृतित्व एवं आंदोलनों का परिमार्जित अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। इसका सम्पादन अभय कुमार दुबे ने किया है।

परियोजना एवं क्रियान्वयन[संपादित करें]

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा की परियोजना के रूप में इस कोश निर्माण की स्वीकृति विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति विभूति नारायण राय ने 2009 में दी थी। पुनः निर्माण-प्रक्रिया के लम्बे दौर में उन्होंने वित्तपोषण के अतिरिक्त संपादक का लगातार उत्साहवर्धन भी किया और हर बैठक में उपयोगी चर्चा करते रहे जिससे कोश की रचना-प्रक्रिया को सकारात्मक गति मिल सकी। इसलिए स्वयं संपादक ने इस कोश को श्री विभूति नारायण राय का मानस पुत्र कहा है और लिखा है कि "उनकी दिलचस्पी और मार्गदर्शन के बिना इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।"[1] इस विश्वकोश की परियोजना महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा की थी, पर इसकी बौद्धिक और रचनागत तैयारी विकासशील समाज अध्ययन पीठ (सीएसडीएस), दिल्ली में हुई[1] और इसका प्रकाशन राजकमल प्रकाशन प्रा॰ लि॰, नयी दिल्ली से सन 2013 ई॰ में हुआ।

इस विश्वकोश को सम्पादक सहित पचास से अधिक लेखकों ने मिलकर लिखा है। प्रत्येक प्रविष्टि को एक बार सम्पादित करके कम से कम दो सलाहकार-विद्वानों के पास पूर्व-समीक्षा के लिए भेजा गया।[2] इस प्रक्रिया में कई प्रविष्टियाँ ख़ारिज हो गयीं। बड़े पैमाने पर संशोधन तजवीज़ किये गये। ऐसा भी हुआ कि कुछ प्रविष्टियों को आंशिक संशोधन और कुछ को सम्पूर्ण पुनर्लेखन के दौर से गुज़रना पड़ा। छह खण्डों में विश्वकोश की डिज़ायन को अंतिम रूप देने तक लगातार प्रविष्टियों के पाठन और सुधार की प्रक्रिया चलती रही। तीन हज़ार से अधिक पृष्ठों में फैले इस कोश में देशी-विदेशी नामों और अन्य शब्दों की वर्तनी में यथासम्भव समरूपता लाने की कोशिश भी की गयी है।[2] कोश में प्रविष्टियों का क्रम अकारादि क्रम से है। कोश को पाठकों के लिए सहज उपयोगी बनाने के लिए हर खण्ड के आरम्भ और अन्त में विस्तार से अनुक्रमणिकाएँ दी गयी हैं। आरम्भ की अनुक्रमणिकाएँ तीन हैं। सबसे पहले प्रविष्टि-क्रम और फिर उसी प्रविष्टि-क्रम को अंग्रेजी में दिया गया है। तीसरी अनुक्रमणिका विषयानुसार है।

समायोजित विषय[संपादित करें]

इस बहुआयामी विश्वकोश में निम्नांकित विषयों से सम्बद्ध प्रविष्टियों को समायोजित किया गया है[3] :-

  1. अर्थशास्त्र
  2. इतिहास
  3. अंतर्राष्ट्रीय संबंध
  4. गाँधी-विचार
  5. दर्शन
  6. भारत संबंधी प्रविष्टियाँ
  7. मनोविज्ञान
  8. मार्क्सवादी विमर्श
  9. मीडिया-अध्ययन, फ़िल्म-अध्ययन, टीवी-अध्ययन
  10. राजनीतिशास्त्र
  11. व्यक्तित्व-कृतित्व
  12. समाजशास्त्र, मानवशास्त्र
  13. स्त्री-अध्ययन, सेक्शुअलिटी-अध्ययन
  14. साहित्य-अध्ययन, भाषाशास्त्र

सामग्री-संयोजन[संपादित करें]

समाज-विज्ञान और मानविकी के बहुआयामी विषयों से अध्येता-दृष्टि से विशेष उपयोगी प्रविष्टियों से संवलित यह विश्वकोश राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति के 27 विद्वानों के मार्गदर्शन में 59 समाज-वैज्ञानिकों/लेखकों द्वारा[4][5] अनुवाद का सहारा लिये बिना मूल हिन्दी में तैयार किया गया है। कोश की 1015 प्रविष्टियों में विश्व के 229 समाज-वैज्ञानिकों, सिद्धान्तकारों, दार्शनिकों, समाज-चिन्तकों, साहित्य-निर्माताओं और विमर्शकारों के कृतित्व की जानकारी के साथ-साथ सभी महत्त्पूर्ण अवधारणाओं, दर्शनों, बहसों, क्रान्तियों और आन्दोलनों का विश्लेष्णात्मक परिचय मिलता है। इसमें अर्थशास्त्र की 104, इतिहास की 107, अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध की 52, दर्शन की 135, राजनीतिशास्त्र की 448, मीडिया, फ़िल्म और टीवी-अध्ययनों की 50, स्त्री और सेक्शुअलिटी-अध्ययन की 69, समाजशास्त्र और मानवशास्त्र की 140 प्रविष्टियों के अतिरिक्त इस कोश में गाँधी-विचार से सम्बन्धित 32 और मार्क्सवाद से सम्बन्धित 117 प्रविष्टियाँ भी सम्मिलित हैं।[6] इसमें सम्मिलित विविध विषयों से सम्बद्ध अध्येताओं, छात्रों, अध्यापकों, पत्रकारों, बुद्धजीवियों और गम्भीर पाठकों के लिए उपयोगी इस विश्वकोश की एक अतिरिक्त और बहुत बड़ी विशेषता यह है कि इसकी 432 प्रविष्टियाँ[7] भारतीय दर्शन, राजीनीति, समाज, संस्कृति, मीडिया, आधुनिकता और इतिहास पर विशेष रूप से प्रकाश डालती हैं। भारतीय लोकतंत्र, भारतीय राज्य, भारतीय सेकुलरवाद, दलित-विमर्श, हिन्दुत्ववादी विमर्श, भारत के राजीनीतिक दलों और राज्यों की राजनीति की जानकारी देनेवाली प्रविष्टियों के अतिरिक्त भारतीय धर्म-दर्शन से सम्बन्धित प्रविष्टियों में उन दार्शनिकों, विचारकों और सिद्धान्तकारों के बौद्धिक परिचय भी शामिल हैं जिन्हें अंग्रेजी और पश्चिम द्वारा थमाये गये सिद्धान्तों के प्रभाव में लगभग अदृश्य कर दिया गया है।[8] कई प्रविष्टियाँ आधुनिक भारत की संस्थागत संरचना में निर्णायक योगदान देने वाली हस्तियों पर भी हैं। विश्वकोश में हिन्दी के निर्माताओं, साहित्य और विचार-जगत पर भी काफी सामग्री है। ‘अतिक्रमण’ से ‘अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष’ तक पहले खण्ड की 152 प्रविष्टियों[9] में इतिहास-लेखन के 'अनाल स्कूल'[10] से लेकर अरनाॅल्ड जोसेफ़ टॉयनबी और ओसवाल्ड स्पेंगलर के कृतित्व; कौटिल्य के अर्थशास्त्र और आर्यभट्ट के योगदान; ऐडम स्मिथ, अल्फ़्रेड मार्शल और अमर्त्य कुमार सेन के आर्थिक चिंतन; एंतोनियो ग्राम्शी के विचारों; आधुनिकता की सैद्धान्तिक योजना; अमेरिका के एफ़र्मेटिव एक्शन और भारत में आरक्षण के विभिन्न पहलुओं; उपनिवेशवाद विरोधी आन्दोलन के सशस्त्र और शांतिपूर्ण आयामों, अल-ग़ज़ाली, इब्न ख़ाल्दून, अल-किंदी, अबू-अला मौदूदी और असग़र अली इंजीनियर के विमर्श; एडमंड बर्क, एडवर्ड हैलेट कार (ई.एच. कार), एडवर्ड विलियम सईद, एरिक फ़ाॅम और आशिस नंदी के विमर्श की झलकियाँ; आम्बेडकर-गाँधी विवाद से लेकर 'गोवर्धनराम त्रिपाठी और गुजराती अस्मिता' तक तथा 'अमेरिकी क्रांति' और 'आत्मसम्मान-आन्दोलन' से लेकर 'अंग्रेजी हटाओ' आन्दोलन[11] तक के विवरण सम्मिलित हैं। इसी प्रकार 'सखाराम गणेश देउस्कर' से लेकर 'ज्ञानमीमांसा' तक छठे खण्ड की 173 प्रविष्टियों में 'सगुण-निर्गुण' के अंतर्गत 'रामभक्ति और कृष्णभक्ति के प्रचलन' तथा "सर्वभारतीय परिप्रेक्ष्य और कबीर'; 'संरचनावाद और उत्तर संरचनावाद'; 'संविधान सभा में भाषा-विवाद' से लेकर 'संस्कृति : मार्क्सवादी परिप्रेक्ष्य' तक; 'सिनेमाई यथार्थवाद/ नियोरियलिज़म/ न्यू-वेव' से लेकर 'सूफ़ीयत और प्रेमाख्यान' तथा 'सेक्शुअलिटी-अध्ययन' तक एवं 'सेकुलरवाद' के भारतीय मॉडल से लेकर महाविवाद तक; तथा 'सोवियत समाजवाद : उत्थान और पतन' से लेकर हजारी प्रसाद द्विवेदी के कृतित्व एवं 'हथियारों की होड़' से लेकर 'हरित क्रांति, एक मूल्यांकन' एवं 'हिंदी सिनेमा का समाजशास्त्र' तक बहुआयामी विषयों का विवेचन सम्मिलित है। इसके बाद छठे खण्ड में पृष्ठ-2209 से लेकर 2279 तक 'आर्थिक जनसांख्यिकी' से लेकर 'सर्वहारा' तक पूर्व के खंडों में अनेक छूटी हुई प्रविष्टियाँ 'पूरक प्रविष्टियाँ ' के रूप में दी गयी हैं, जिनकी सूची अनुक्रमणिका में यथास्थान सम्मिलित हैं।

इस विश्वकोश की प्रविष्टियों के अकारादि क्रम में पूरी तरह हिन्दी वर्णमाला के प्रचलित रूप का अनुसरण किया गया है अर्थात् अन्य हिन्दी कोशो की तरह 'अं' को 'अ' से पहले न रख कर 'औ' के बाद रखा गया है। इसी प्रकार स्वतंत्र रूप से प्रचलित संयुक्ताक्षर - जैसे 'त्र' को 'त' के साथ और 'ज्ञ' को 'ज' के साथ नहीं रख कर 'ह' के बाद रखा गया है।[12]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. समाज-विज्ञान विश्वकोश, खण्ड-1, संपादक- अभय कुमार दुबे, राजकमल प्रकाशन, प्रा॰ लि॰, नयी दिल्ली, द्वितीय पेपरबैक संस्करण-2016, पृष्ठ-xviii.
  2. समाज-विज्ञान विश्वकोश, खण्ड-1, संपादक- अभय कुमार दुबे, राजकमल प्रकाशन, प्रा॰ लि॰, नयी दिल्ली, द्वितीय पेपरबैक संस्करण-2016, पृष्ठ-xvii.
  3. समाज-विज्ञान विश्वकोश, खण्ड-1, संपादक- अभय कुमार दुबे, राजकमल प्रकाशन, प्रा॰ लि॰, नयी दिल्ली, द्वितीय पेपरबैक संस्करण-2016, पृष्ठ-xliii-lxvii (विषयानुसार प्रविष्टि-क्रम)।
  4. समाज-विज्ञान विश्वकोश, खण्ड-1, संपादक- अभय कुमार दुबे, राजकमल प्रकाशन, प्रा॰ लि॰, नयी दिल्ली, द्वितीय पेपरबैक संस्करण-2016, पृष्ठ-vi-x.
  5. समाज-विज्ञान विश्वकोश, खण्ड-6, संपादक- अभय कुमार दुबे, राजकमल प्रकाशन, प्रा॰ लि॰, नयी दिल्ली, द्वितीय पेपरबैक संस्करण-2016, पृष्ठ-vi-x.
  6. आलोचना, सहस्राब्दी अंक-51, अक्टूबर-दिसंबर 2013, संपादक- अरुण कमल, अंतिम आवरण पृष्ठ पर उल्लिखित।
  7. समाज-विज्ञान विश्वकोश, खण्ड-6, संपादक- अभय कुमार दुबे, राजकमल प्रकाशन, प्रा॰ लि॰, नयी दिल्ली, द्वितीय पेपरबैक संस्करण-2016, पृष्ठ-xl-xlv.
  8. आलोचना, सहस्राब्दी अंक-54, अप्रैल-जून 2015, संपादक- अपूर्वानंद, पृष्ठ-155.
  9. अनुक्रमणिका में सम्मिलित इस खण्ड के 154 प्रविष्टियों की गणना में से 2 प्रविष्टियाँ 'आर्थिक जनसांख्यिकी' एवं 'ओडीसा' छठे खण्ड के परिशिष्ट में 'पूरक प्रविष्टियाँ' के अन्तर्गत सम्मिलित हैं। अतः प्रथम खण्ड की कुल प्रविष्टियाँ 152 हैं।
  10. समाज-विज्ञान विश्वकोश, खण्ड-1, संपादक- अभय कुमार दुबे, राजकमल प्रकाशन, प्रा॰ लि॰, नयी दिल्ली, द्वितीय पेपरबैक संस्करण-2016, पृष्ठ-13-15.
  11. समाज-विज्ञान विश्वकोश, खण्ड-1, संपादक- अभय कुमार दुबे, राजकमल प्रकाशन, प्रा॰ लि॰, नयी दिल्ली, द्वितीय पेपरबैक संस्करण-2016, पृष्ठ-332-334.
  12. समाज-विज्ञान विश्वकोश, खण्ड-6, संपादक- अभय कुमार दुबे, राजकमल प्रकाशन, प्रा॰ लि॰, नयी दिल्ली, द्वितीय पेपरबैक संस्करण-2016, पृष्ठ-2199-2208.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

  • समाजविज्ञान विश्वकोश (अकारादिक्रम में डाउनलोड/पठन के लिए 'अ' से 'स' तक उपलब्ध; 'ह', 'त्र', 'ज्ञ' एवं 'पूरक प्रविष्टियाँ' केवल मुद्रित रूप में उपलब्ध है।)