के एस कृष्णन

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कार्यमाणिवकम् श्रीनिवास कृष्णन् (Sir Kariamanickam Srinivasa Krishnan, FRS ; 4 दिसम्बर 1898 – 14 जून 1961) भारत के प्रख्यात भौतिक विज्ञानी थे। रमन प्रभाव की खोज में सी वी रमन के साथ वे भी सम्मिलित थे जिसके लिये सी वी रमन को १९३० में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। के एस कृष्णन को विज्ञान एवं अभियांत्रिकी क्षेत्र में पद्म भूषण से १९५४ में सम्मानित किया गया। ये तमिलनाडु राज्य से हैं।

परिचय[संपादित करें]

श्रीनिवास कृष्णन का जन्म ४ दिसम्बर १८९८ ई. को हुआ था। अमेरिकन कालेज, मदुरा, मद्रास क्रिश्चियन कालेज एवं युनिवर्सिटी कालेज ऑव सायंस, कलकत्ता में शिक्षा प्राप्त की। इंडियन एसोसियेशन फॉर कल्टिवेशन ऑव सांयस (कलकत्ता) के तत्वावधान में सन् १९२३ तक अनुसंधान कार्य किया। १९३३-४२ ई. तक महेंद्रलाल सरकार रिसर्च प्रोफेसर रहे। उसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफेसर थे। सन् १९४७ में राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला दिल्ली के प्रथम संचालक बने। १४ जून १९६१ ई. को मृत्यु हुई।

मद्रास विश्वविद्यालय ने आपको डी. एस. सी. की उपाधि प्रदान की। सन् १९४० में रॉयल सोसायटी के सदस्य चुने गए। सन् १९४६ में 'सर' की उपाधि से विभूषित किए गए। स्वतंत्र भारत की सरकार ने पद्मभूषण उपाधि प्रदानकर सम्मानित किया। सन् १९४५-४६ में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष चुने गए। सन् १९५० में भारतीय विज्ञान कांग्रेस के भौतिकी विभाग के अध्यक्ष और बाद में इस संस्था के अध्यक्ष चुने गए। आप भारतीय परमाणु आयोग एवं भारतीय वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के संचालक मंडल के भी सदस्य थे। आपने अनेक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व सफलतापूर्वक किया था।

भौतिकी की प्रत्येक दिशा में आपका महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रकाशिकी, चुंबकत्व, इलेक्ट्रानिकी, ठोस अवस्था भौतिकी, तथा विशेषकर धातु भौतिकी पर आपने अनेक खोज की। सर सी. वी. रमण के साथ रमण-प्रभाव की खोज में भी योग दिया। वैज्ञानिक संसार ने प्रकाशिकी एवं मणिभ (क्रिस्टल) पर चुंबककीय प्रभाव संबंधी आपके अन्वेषण कार्य को अत्यंत ही महत्वपूर्ण माना। आपके अनुसंधान संबंधी अनेक निबंध 'ट्रैंज़ैंक्शंस ऐंड प्रोसीडिंग्स ऑव रायल सोसाइटी' (Transactions and Proceedings of Royal Society) में प्रकाशित हुए हैं।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]