श्री कृष्ण जोशी

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श्री कृष्ण जोशी (६ जून १९३५ -- १५ मई २०२०) भारत के एक वैज्ञानिक, अनुसन्धानकर्ता तथा अनुसन्धान-मार्गदर्शक थे। सन २००३ में भारत सरकार ने विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था।

उनका जन्म, 6 जून 1935 को उत्तराखण्ड में कुमाऊँ क्षेत्र के एक छोटे से गाँव अनार्पा में हुआ था। स्कूल गाँव से कई किलोमीटर दूर स्थित था। फिर भी ऊबड़-खाबड़, उतार-चढ़ाव और घुमाव भरे रास्तों पर पैदल चल कर स्कूल शिक्षा पूर्ण की। उच्च शिक्षा के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। यहीं से उन्होंने बी.एससी. और एम.एससी. (भौतिकी) की परीक्षाएँ प्रथम श्रेणी में प्राप्त की। एम.एससी. में स्वर्णपदक प्राप्त हुआ था इसलिए उन्हें विश्वविद्यालय में भौतिकी प्रवक्ता नियुक्त किया गया, साथ ही उन्होंने प्रोफेसर के. बनर्जी के मार्गदर्शन में कार्बनिक क्रिस्टलों से विकीर्णित एक्स-किरण प्रकीर्णन मापनों के विषय में अनुसंधान कार्य भी शुरू किया और 1962 में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। 1965 में उन्हें कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, रिवर साइड, यूएसए में विजिटिंग प्रवक्ता के रूप में नियुक्ति मिली तो वे वहां चले गए। किन्तु 2 वर्ष बाद ही रूड़की विश्वविद्यालय (आज के आइ.आइ.टी. रूड़की) में भौतिकी के प्रोफेसर के रूप में वापस लौट आए। उस समय उनकी उम्र मात्र 32 साल थी। 1967 से 1986 के बीच वे रूड़की विश्वविद्यालय में रहे। 1986 में उन्हें राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला, दिल्ली का निदेशक नियुक्त किया गया। जहाँ से 1991 में उन्हें वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के महानिदेशक का कार्यभार संभालने के लिए आमंत्रित किया गया। यहाँ से वे 1995 में सेवानिवृत्त हुए।