श्रंगवेरपुर

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कहते है कि तीन नदियों के मेल को संगम कहते है परंतु इतिहास कुछ और ही है साथियों। संगम राज निषाद,, निषाद देश के राजा थे उनके तीन पुत्र थे 1-तीर्थराज निषाद जिनके नाम से तीरथ धाम पड़ा 2 प्रयागराज निषाद जिनके नाम पर प्रयाग धाम व प्रयागराज जिला नाम पड़ा। 3 श्रृंगी ऋषि निषाद जिनके नाम से श्रृंगवेरपुर धाम पड़ा और तीर्थराज निषाद के पुत्र थे महराज श्री गुह्यराज निषाद जो रामचन्द के बाल-सखा थे

श्रंगवेरपुर[संपादित करें]

रामायण वर्णित निषादराज गुह की गंगा तीरस्थ राजधानी को श्रंगवेरपुर कहा जाता है, यह भारतवर्ष के उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद जिला के पास प्रयाग नामक स्थान से ४५ किलोमीटर पश्चिम में स्थित है, भगवान श्री राम ने वनवास के समय निशादराज के कहने से यहां रात्रि विश्राम किया था, यहां श्रंगी (ऋष्यश्रृंग) ऋषि तथा उनकी पत्नी राजा दसरथ सुता शान्ता देवी का मन्दिर है, गंगाजी में ऋष्यश्रंग के पिता के नाम पर विभाण्डकुण्ड है, रामचौरा ग्राम में गंगा के किनारे एक मन्दिर में राम्चन्द्र जी के चरण चिन्ह हैं, पास मे रामनगर स्थान है, जहां प्रत्येक पूर्णिमा को मेला लगता है, रामचन्द्रजी ने यहीं से गंगा पार की थी और प्रयाग गये थे।