केवट (रामायण)

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केवट रामायण का एक पात्र है जिसने वनगमन के समय राम, सीता और लक्ष्मण को अपनी नाव में बैठाकर गंगा पार करवाया था। इस कथा का वर्णन रामायण के अयोध्याकाण्ड में किया गया है। केवट हरीवंश कीर समाज का था। केवट श्री रामचन्द्र का अनन्य भक्त था। कहा जाता है कि सृष्टि के आरम्भ में जब सम्पूर्ण जगत जलमग्न था केवट का जन्म कछुवे की योनि में हुआ। उस योनि में भी उसका भगवान के प्रति अत्यधिक प्रेम था। अपने मोक्ष के लिये उसने शेष शैया पर शयन करते हुये भगवान विष्णु के अँगूठे का स्पर्श करने का असफल प्रयास किया था , क्योंकि उस समय वो शेष-नाग के फुंकार के कारण उनके चरण स्पर्श नहीं कर पाया था तब विष्णु भगवान ने उनको कहा था कि त्रेतायुग में उनको यह अवसर देंगे उसके बाद एक युग से भी अधिक काल तक अनेक जन्म लेकर उसने भगवान की तपस्या की और अन्त में त्रेता युग में केवट के रूप में जन्म लेकर भगवान विष्णु, जो कि राम के रूप में अवतरित हुये थे उनकी केवट ने चरण धो कर उनकी सेवा की थी [1]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त थे केवट". webdunia. मूल से 26 दिसंबर 2019 को पुरालेखित.