"काव्य" के अवतरणों में अंतर

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== काव्य परिभाषा ==
{{main|कविता की परिभाषा}}
'''कविता या काव्य क्या है''' इस विषय में भारतीय साहित्य में आलोचकों की बड़ी समृद्ध परंपरा है— [[आचार्य विश्वनाथ]], [[पंडितराज जगन्नाथ]], [[पंडित अंबिकादत्त व्यास]], [[आचार्य श्रीपति]], [[भामह]] आदि संस्कृत के विद्वानों से लेकर आधुनिक [[आचार्य रामचंद्र शुक्ल]] तथा [[जयशंकर प्रसादiप्रसाद]] जैसे प्रबुद्ध कवियों और आधुनिक युग की मीरा [[महादेवी वर्मा]] ने कविता का स्वरूप स्पष्ट करते हुए अपने अपने मत व्यक्त किए हैं। विद्वानों का विचार है कि मानव हृदय अनन्त रूपतामक जगत के नाना रूपों, व्यापारों में भटकता रहता है, लेकिन जब मानव अहं की भावना का परित्याग करके विशुद्ध अनुभूति मात्र रह जाता है, तब वह मुक्त हृदय हो जाता है। हृदय की इस मुक्ति की साधना के लिए मनुष्य की वाणी जो शब्द विधान करती आई है उसे कविता कहते हैं। कविता मनुष्य को स्वार्थ सम्बन्धों के संकुचित घेरे से ऊपर उठाती है और शेष सृष्टि से रागात्मक सम्बंध जोड़ने में सहायक होती है। काव्य की अनेक परिभाषाएँ दी गई हैं। ये परिभाषाएं आधुनिक हिंदी काव्य के लिए भी सही सिद्ध होती हैं। काव्य सिद्ध चित्त को अलौकिक आनंदानुभूति कराता है तो हृदय के तार झंकृत हो उठते हैं। काव्य में [[सत्यं शिवं सुंदरम्]] की भावना भी निहित होती है। जिस काव्य में यह सब कुछ पाया जाता है वह उत्तम काव्य माना जाता है।
 
== काव्य के भेद ==
57,555

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