वंशीधर शुक्ल

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

वंशीधर शुक्ल Pt. Vanshidhar Shukla (जन्म: 1904; मृत्यु: 1980) एक हिंदी और अवधी भाषा के कवि और स्वतंत्रता सेनानीराजनेता थे।[1][2]

इनके पिता छेदीलाल शुक्ल भी एक कवि थे। वंशीधर शुक्ल जी महात्मा गाँधी के आन्दोलन से भी भाग लिए। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी विधान सभा से वें विधायक (१९५९-१९६२) भी रहे।

कदम-कदम बढायें जा खुशी के गीत गाये जा, ये जिंदगी है कौम की तू कौम पर लुटाए जा ” जैसी कालजयी रचना का सृजन करने वाले वंशीधर शुक्ल हैं।[3] ‘उठो सोने वालों सबेरा हुआ है’, ‘उठ जाग मुसाफिर भोर भई’ इनकी अवधी में लिखी हुई पुस्तके हैं। हुजूर केरी रचनावली भी उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ से प्रकाशित हो चुकी है। उन्होंने लखीमपुर खीरी शहर के मध्य में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के नाम पर 'गाँधी विद्यालय' की स्थापना की। वह उ.प्र. सरकार के वनमंत्री भी रहे।

जीवन परिचय[संपादित करें]

लोक संस्कृति, लोक विश्वास, ग्रामीण प्रकृति परिवेश व ग्राम जीवन को प्रतिबिंबित करने वाले माँ वाणी के इस कुशल आराधक का जन्म उत्तर प्रदेश में लखीमपुर जिले के मन्यौरा गाँव में सन १९०४ में हुआ था। माँ सरस्वती के जन्म दिवस बसंत पंचमी के दिन एक कृषक परिवार में जन्म लेने वाले वंशीधर नें माता सरस्वती की साधना को ही अपना लक्ष्य बना लिया। इनके पिता पं॰ छेदीलाल शुक्ल सीधे-सादे सरल ह्रदय के किसान थे जो अच्छे अल्हैत के रूप में विख्यात थे और आसपास के क्षेत्र में उन्हें आल्हा गायन के लिए बुलाया जाता था। वे नन्हें बंशीधर को भी अपने साथ ले जाया करते थे। पिता द्वारा ओजपूर्ण शैली में गाये जाने वाले आल्हा को बंशीधर मंत्रमुग्ध होकर सुना करते थे। सामाजिक सरोकारों से बंशीधर के लगाव के पीछे उनके बचपन के परिवेश का बहुत बड़ा हाथ था। सन १९१९ में पं॰ छेदीलाल चल बसेे। पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ अब वंशीधर के सर पर था। यह उनके लिए बड़े संघर्षों का समय थाे। इन्हीं संघर्षों से उनके व्यक्तित्व में जीवटता और अलमस्ती पैदा हुई। इसी समय की कठिनाईयों ने उनमें व्यवस्था के प्रति विद्रोही स्वर पैदा किया। सन १९२५ के करीब वे गणेश शंकर विद्यार्थी के संपर्क में आयेे। विद्यार्थी जी के सानिध्य में उन पर स्वतंत्रता-आंदोलन का रंग गहराने लगा और कविता की धार भी पैनी होती चली गयी। उन्होंने मातृभूमि की सेवा करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भाग लिया और अनेक बार जेल की यात्रा की।


सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "कविता : मंहगाई (कवि वंशीधर शुक्ल)". Awadhi.org (अवधी में). मूल से 12 अगस्त 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 7 अगस्त 2014.
  2. "When he recorded Nirala?s voice clandestinely". हिंदुस्तान टाइम्स (अंग्रेज़ी में). अक्टूबर 07, 2006. मूल से 8 अगस्त 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 7 अगस्त 2014. |date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  3. "दुर्भाग्य है की हम जनकवि वंशीधर शुक्ल को भुला बैठे". Isahitya. मूल से 9 अगस्त 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 7 अगस्त 2014.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]