युक्तिभद्र दीक्षित "पुतान"

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युक्तिभद्र दीक्षित "पुतान" (मृत्यु: 24 जुलाई) एक अवधी और भोजपुरी भाषा के कवि थे, वे कवि बलभद्र प्रसाद दीक्षित "पढ़ीस" के पुत्र हैं। इन्हें ‘मतई भइया’ के नाम से भी जाना जाता था।[1][2]

पुतान जी ने पचीसो रेडियो नाटक और नौटंकी अवधी और भोजपुरी मे लिखी तथा उनमें भूमिका निभाई।

चेतु रे माली फुलबगिया के
बड़ी जुगुति ते साफु कीन तुयि
झंखरझार कटीले।
दै दै रकतु प्रान रोपे रे
सुँदर बिरिछ छबीले।
रहि ना जायं गुलाब के धोखे
काँटा झरबेरिया के।।

युक्तिभद्र दीक्षित "पुतान" का एक काव्य अवधी में[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "कवि श्री युक्तिभद्र दीक्षित 'पुतान' की क्रांतिकारी प्रगतिशील चेतना को नमन". Awadhi.org (अवधी में). August 12, 2013.
  2. [www.amarujala.com/news/states/uttar-pradesh/allahabad/Allahabad-32027-8/ "नहीं रहे लोक संस्कृति के मर्मज्ञ 'मतई भइया'"] जाँचें |url= मान (मदद). अमर उजाला. 26 जुलाई 2013.
  3. "चेतु रे माली फुलबगिया के / युक्तिभद्र दीक्षित 'पुतान'". कविता कोश.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]