राजपुताना

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राजपुताना

राजपुताना जिसे रजवाड़ा भी कहा जाता है।[1] इस प्रदेश का आधुनिक नाम राजस्थान है, जो उत्तर भारत के पश्चिमी भाग में अरावली की पहाड़ियों के दोनों ओर फैला हुआ है। राजस्थान पहले गुर्जरदेश व गुर्जरत्रा के रूप में जाना जाता था। जिसके कुछ जिलो को 1909 के ब्रिटिशकालीन नक्शे मे राजपुताना दर्शाया गया।इसका अधिकांश भाग मरुस्थल है। यहाँ वर्षा अत्यल्प और वह भी विभिन्न क्षेत्रों में असमान रूप से होती है। यह मुख्यत: वर्तमान राजस्थान राज्य की भूतपूर्व रियासतों का समूह है, जो भारत का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।

भौगोलिक स्थिति[संपादित करें]

अरावली पर्वत श्रृंखला का पश्चिमोत्तर क्षेत्र-जो अनुपजाऊ व ज़्यादातर रेतीला है। इसमें थार मरुस्थल का एक हिस्सा शामिल है और पर्वत श्रृंखला का दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र-जो सामान्यत: ऊँचा तथा अधिक उपजाऊ है। राजपुताना मे एक जागीर और मेवाड़ का ब्रिटिश ज़िला शामिल थे।राजपूतो ने तेरहवीं शताब्दी में इस क्षेत्र में प्रवेश करना आरम्भ किया।

इतिहास[संपादित करें]

राजपूत जातियों में फूट और परस्पर युद्धों के फलस्वरूप वे शक्तहीन हो गए। 1526 ई. में खानवा के युद्ध में राणा की पराजय हुई और मुग़लों ने दिल्ली के सुल्तानों का राजपूताने पर प्रभुत्व स्थापित कर लिया। अकबर की राजनीतिक सूझ-बूझ और दूरदर्शिता का प्रभाव इन पर अवश्य पड़ा और मेवाड़ के अतिरिक्त अन्य सभी राजपूत शासक मुग़लों के समर्थक और भक्त बन गए। अन्त में जहाँगीर के शासनकाल में मेवाड़ ने भी मुग़लों की अधीनता स्वीकार कर ली। औरंगज़ेब के सिंहासनारूढ़ होने तक राजपूताने के शासक मुग़लों के स्वामिभक्त बने रहे और एक समझौते के फलस्वरूप उनके अनुरूप चलना पडा और 18वीं शताब्दी के अन्तिम दशकों में अपनी सुरक्षा हेतु अंग्रेज़ों की शरण ली।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

टीका टिप्पणी और संदर्भ[संपादित करें]

  1. John Keay (2001). India: a history. Grove Press. pp. 231–232
  • (पुस्तक 'भारत ज्ञानकोश') पृष्ठ संख्या-59
  • (पुस्तक 'भारतीय इतिहास कोश') पृष्ठ संख्या-400

संबंधित लेख[संपादित करें]