यौम-ए-आशूरा


आशूरा या यौम-ए-आशूरा: इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम की दसवीं तारिख को होता है।[1] इस्लाम में स्मरणोत्सव का दिन है। आशूरा के दिन हज़रत मुहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके परिवार को करबला के मैदान में शहीद कर दिया गया था।[2] शिया मुसलमानों के लिए आशूरा शोक का दिन है, सुन्नी इस्लाम में आशूरा को सौम (उपवास, रोज़ा )और अन्य स्वीकार्य उत्सवों के माध्यम से मनाया जाता है।
उपवास हदीस में
[संपादित करें]सुन्नी इस्लाम में, मुहर्रम की नौवीं और दसवीं तिथि स्वैच्छिक उपवास के दिन हैं, जिन्हें सुन्नी न्यायविदों द्वारा दृढ़ता से प्रोत्साहित किया जाता है। आशूरा पर उपवास करना एक यहूदी प्रथा थी जिसे इस्लामी पैगंबर मुहम्मद ने 622 ईस्वी में मदीना शहर में आने के बाद अपनाया था और हदीस साहित्य स्पष्ट रूप से इस त्योहार को योम किप्पुर ( शाब्दिक रूप से ' प्रायश्चित का दिन ' ) से व्युत्पन्न करता है। [3]
जब पैगंबर (ﷺ) मदीना पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि यहूदी लोग मुहर्रम की दस तारीख को सम्मानपूर्वक रोज़ा रखते थे। तब पैगंबर (ﷺ) ने कहा, "हमें इस दिन रोज़ा रखने का अधिक अधिकार है," और आदेश दिया कि इस दिन रोज़ा रखा जाए। — सहीह अल-बुखारी 3942
- रमज़ान के बाद सबसे श्रेष्ठ रोज़े अल्लाह के महीने मुहर्रम के रोज़े हैं।[4]
- अब्दुल्लाह बिन अब्बास से रिवायत है कि अल्लाह के नबी ने फरमायाः यदि अगले साल तक जीवित रहा, तो मुहर्रम महीने की नौवीं तारीख़ का रोज़ा रखूँगा।[5]
- अब्दुल्लाह बिन अब्बास ( का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने आशूरा के दिन (मुहर्रम की दसवीं तारीख़ को) रोज़ा रखा और उस दिन रोज़ा रखने का आदेश भी दिया।
गैलरी
[संपादित करें]इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "SHIITE HISTORY BELIEFS AND DIFFERENCES BETWEEN SUNNIS AND SHIITES: MUSLIM SECTS AND SUNNIS". मूल से से 2 फ़रवरी 2015 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: January 26, 2015.
- ↑ "Muharram". 2010-12-08. मूल से से 30 दिसंबर 2012 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2010-12-08.
- ↑ Chelkowski, Peter (1985). "Shia Muslim Processional Performances". The Drama Review: TDR. 29 (3): 18–30. डीओआई:10.2307/1145650. आईएसएसएन 0012-5962.
- ↑ "हदीस: रमज़ान के बाद सबसे श्रेष्ठ रोज़े अल्लाह के महीने मुहर्रम के रोज़े हैं तथा फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद सबसे उत्तम नमाज़ रात की नमाज़ है।". अनूदित हदीस-ए-नबवी विश्वकोश. अभिगमन तिथि: 2026-06-17.
- ↑ "हदीस: यदि अगले साल तक जीवित रहा, तो मुहर्रम महीने की नौवीं तारीख़ को रोज़ा रखूँगा". अनूदित हदीस-ए-नबवी विश्वकोश. अभिगमन तिथि: 2026-06-17.