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मल्ल महाजनपद

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प्राचीन भारत के महाजनपद मानचित्र पर।

मल्ल महाजनपद प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक था। इसका उल्लेख बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय में आया है। 'मल्ल' नाम 'मल्ल राजवंश' के नाम पर है जो इस महाजनपद की उस समय शासक थे। उल्लेखनीय है कि महावीर स्वामी और गौतम बुद्ध दोनों ही महापुरुषों का निर्वाण मल्ल महाजनपद के क्षेत्र में हुआ था।

मल्लों की दो शाखाएँ थीं। एक की राजधानी कुशीनारा थी जो वर्तमान कुशीनगर है तथा दूसरे की राजधानी पावा थी जो वर्तमान फाजिलनगर है।[1]

बुद्ध के कुशीनगर में निर्वाण प्राप्त करने के उपरान्त, उनके अस्थि-अवशेषों का एक भाग मल्लों को मिला था जिसके संस्मरणार्थ उन्होंने कुशीनगर में एक स्तूप या चैत्य का निर्माण किया था। इसके खंडहर कसिया में मिले हैं। इस स्थान से प्राप्त एक ताम्रपट्टलेख से यह तथ्य प्रमाणित भी होता है—‘(परिनि) वार्ण चैत्यताभ्रपट्ट इति’। मगध के राजनीतिक उत्कर्ष के समय मल्ल जनपद इसी साम्राज्य की विस्तरणशील सत्ता के सामने न टिक सका चौथी शती ई. पू. में चंद्रगुप्त मौर्य के महान् साम्राज्य में विलीन हो गया।

सन्दर्भ

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  1. ↑ नाहर, डॉ रतिभानु सिंह (1974). प्राचीन भारत का राजनैतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास. इलाहाबाद, भारत: किताबमहल. p. 112. {{cite book}}: |access-date= requires |url= (help); Text "editor:" ignored (help)

इन्हें भी देखें

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