भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड

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भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड
प्रकार सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम
उद्मोग Energy
स्थापना चेन्नै, Tamil Nadu, India (22 October 2003)[1]
मुख्यालय

Chennai, Tamil Nadu, India[2]

Montieth Road, Egmore
प्रमुख व्यक्ति Chairman and managing director – Dr. Kallol Roy
उत्पाद Nuclear power and electricity generation and distribution
प्रचालन आय Green Arrow Up Darker.svgभारतीय रुपया1,117.0 मिलियन (US$16.31 मिलियन) (2016–2017)[3]
निवल आय Green Arrow Up Darker.svgभारतीय रुपया1,946.2 मिलियन (US$28.41 मिलियन) (2016–2017)
कुल संपत्ति Green Arrow Up Darker.svgभारतीय रुपया56.98 बिलियन (US$831.91 मिलियन) (2016–2017)
कुल इक्विटी Green Arrow Up Darker.svgभारतीय रुपया30.47 बिलियन (US$444.86 मिलियन) (2016–2017)
वेबसाइट bhavini.nic.in

भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनि), परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण मे आनेवाला, भारत सरकार का पूर्णत: स्वामित्वाधीन उद्यम है। कंपनी अधिनियम, 1956 के अंतर्गत दिनाकं 22 अक्टूबर 2003 को निगमित एक सार्वजनिक कंपनी है जिसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा अधिनियम, १९६२ के प्रावधान के अंर्तगत भारत सरकार के योजनाएं एवं कार्यक्रमों के अनुसरण मे तमिलनाडु स्थित कल्पाक्कम में पहला 500 मेगवाट द्रुत प्रजनन रिएक्टर (फास्ट ब्रीडर रिएक्टर) का निर्माण एवं प्रवर्तन करना एवं ऊर्जा उत्पादन हेतु उत्तरवर्ती द्रुत प्रजनन रिएक्टरों के निर्माण, प्रवर्तन, प्रचालन एवं अनुरक्षण मे लगे रहना है।[4]

प्रमुख कार्यकलाप[संपादित करें]

भाविनि आजकल चेन्नै से 70 कि॰मी॰ की दूरी पर स्थित कल्पाक्कम मे रू.3492 करोड की लागत से 500 मेगवाट द्रुत प्रजनन रिएक्टर के निर्माण लगा हुआ है। यह द्रुत प्रजनन रिएक्टर भाविनि द्रुत प्रजनन रिएक्टरों का अग्रदूत होगा एवं इससे अपेक्षा है कि देश को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करेगा। इस रिएक्टर का निर्माण कल्पाक्कम मे ही स्थित इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केन्द्र द्वारा विकसित अभिकल्पना एवं तकनीकी के आधार पर किया जा रहा है। कंपनी की वैबसाईट के अनुसार, जनवरी २०१४ के अंत तक, परियोजना की प्रगति 96.5% हो चुकी है तथा यह अपने अंतिम चरण पर पहुँच गया है। टरबाइन उपकरणों के स्थापना का कार्य का चरण पूरा होने को है। जेनेरेटर, रोटर, सजीव भाप पुन: तापक, भाप जल पृथक, निम्न एवं अपर ड्रम, उच्च एवं निम्न दाब टरबाइन मॉडयूल्स इत्यादि को स्थापित कर दिया गया। संघनित्र टयूब के भेदन एवं विस्तारण के कार्य को पूर्ण किया जा चुका है।[5]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]