प्रताप चन्द्र षड़ंगी

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प्रताप चन्द्र षड़ंगी
Pratap Chandra Sarangi.jpg

सांसद,केन्द्रीय राज्य मंत्री
पदस्थ
कार्यालय ग्रहण 
23 मई 2019
पूर्वा धिकारी रवीन्द्र कुमार जेना
चुनाव-क्षेत्र बालासोर

पद बहाल
2004–2014
पूर्वा धिकारी प्रदीप पाण्डा
उत्तरा धिकारी सुकान्त कुमार नायक

जन्म 4 जनवरी 1955 (1955-01-04) (आयु 64)
गोपीनाथपुर, बालासोर, उड़ीसा
राष्ट्रीयता भारतीय
राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी
शैक्षिक सम्बद्धता उत्कल विश्वविद्यालय

प्रताप चन्द्र षड़ंगी[नोट 1] (जन्म ४ जनवरी, १९५५) भारत के एक सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजनेता हैं जो अपने सरल स्वभाव के लिए प्रसिद्ध हैं।[1][2] १७वीं लोकसभा में वे बालासोर से सांसद चुने गए हैं तथा मोदी मन्त्रिमण्डल में राज्यमन्त्री हैं। वे भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं। उड़ीसा विधान सभा में वे दो बार विधायक रहे हैं -२००४ से २००९ तक तथा २००९ से २०१४ तक। इन्हें 'ओड़ीसा का मोदी' कहा जाता है।

जीवन परिचय[संपादित करें]

प्रताप चन्द्र षड़ंगी का जन्म सन १९५५ में बालेश्वर जिले के गोपीनाथपुर ग्रामके एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम गोविन्द चन्द्र षड़ंगी था। उन्होने १९७५ ई में उत्कल विश्वविद्यालय के अधीन बालेश्वर के फकीर मोहन महाविद्यालय से कला में स्नातक उपाधि प्राप्त की।

वे एक अत्यन्त सरल जीवन जीते हैं। वे आने-जाने के लिए एक सायकिल का प्रयोग करते हैं और चुनाव प्रचार के लिए आटो रिक्सा का। वह अविवाहित हैं। उनकी विधवा मां का २०१८ में निधन हो गया। सम्प्रति वह अकेले ही रहते हैं और पूरे समाज को अपना परिवार मानते हैं। प्रताप के घर के सामने हैंडपम्प हैं, जहां पर खुद चलाकर पानी भरते हैं। नहा लेते हैं। पूजा-अर्चना के बाद वह समाज सेवा कार्य में जुटे जाते हैं। समाज सेवा उनका धर्म है। वह मानते हैं कि इसके लिए उपयुक्त प्लेटफार्म राजनीति ही है।

सफेद दाढ़ी, सिर पर सफेद कम बाल, साइकिल, बैग उनकी पहचान है। संपत्ति के नाम पर छोटा सा घर है। किसी गरीब का कोई काम होता है तो वह सीधे प्रताप षड़ंगी की झोपड़ी में जा पहुंचता है।

दुबला-पतला शरीर साधुवेश (श्वेतवस्त्रधारी) में जीवन बिताने वाले षड़ंगी आरम्भ से ही धार्मिक प्रवृत्ति के हैं। नीलगिरि फकीर मोहन कालेज से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वह साधु बनने के लिए रामकृष्ण मठ चले गए। मठ के लोगों को जब पता चला कि उनकी मां विधवा है तो उनको अपनी मां की सेवा करने को कहा गया। इसके बाद उन्होंने विवाह नहीं किया। पूरा जीवन मां व समाज की सेवा में लगा दिया। बच्चों को पढ़ाते भी हैं। समाज सेवा की प्रेरणा को वह मां का आशीर्वाद मानते हैं। उनके परिवार में और कोई नहीं है। वह छोटे से घर में रहते हैं और साइकिल पर चलते हैं। [3]

षड़ंगी ने 'गण शिक्षा मंदिर योजना' के तहत सैकड़ों आदिवासी गावों में स्कूल खोले। इन स्कूलों को 'समकरा केंद्र' कहा जाता है। षड़ंगी स्वय भी पढ़ाई के शौकीन रहे हैं। दर्शन से लेकर विज्ञान से जुड़ी किताबें पढ़ते हैं। उड़िया, हिन्दी, संस्कृत और अंग्रेज़ी बोल लेते हैं। धुरन्धर वक्ता हैं। दुनिया का कोई विषय हो, षड़ंगी उसपर बात कर लेंगे। उन्होने शराब के खिलाफ भी कई आन्दोलन किए हैं।

षड़ंगी ओडिशा के बजरंग दल के अध्यक्ष रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद ओडिशा के संयुक्त सचिव भी। लम्बे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुयायी रहे। 2004 और 2009 में नीलगिरि से विधान सभा के सदस्य के लिए निर्दलीय चुनाव लड़े और जीते। 2014 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर बालासोर लोकसभा से पर्चा भरा था लेकिन बीजू जनता दल के रवीन्द्रर कुमार जेना से हार गए। उद्योगपति जेना 'न्यूज़ वर्ल्ड ओडिशा' नाम से समाचार चैनल चलाते हैं तथा 'बालासोर अलॉयज़' नाम की कम्पनी के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर भी रह चुके हैं।

षड़ंगी भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं। किसी तस्वीर में पौधा रोपते नज़र आते हैं तो किसी में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के कार्यक्रम में बोलते हुए। किसी में वो भीड़ से घिरे नज़र आते हैं, लोग उनके साथ सेल्फी लेना चाहते हैं।

षड़ंगी को 2019 में बालासोर लोकसभा सीट से फिर भाजपा टिकट देकर उतारा गया। बीजू जनता दल के रवीन्द्र कुमार जैना तो सामने थे ही, कांग्रेस प्रत्याशी नवज्योति पटनायक भी कम नहीं थे। नवज्योति के पिता निरञ्जन पटनायक ओडिशा कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। पटनायक परिवार खनन समेत कई औद्योगिक उपक्रम चलाता है।

२०१९ के चुनाव में षड़ंगी ने जब अपनी संपत्ति की घोषणा की, तो कुल धन 10 लाख बताया। इस हिसाब से वे मोदी मंत्रिमंडल के सबसे गरीब मंत्री हैं। जिन प्रत्याशियों को उन्होने हराया उनमें रवीन्द्र जेना की सम्पत्ति 72 करोड़ से ऊपर बतायी गयी है, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार नवज्योति पटनायक ने स्वयं की संपत्ति 104 करोड़ रुपये बतायी थी।[4]


नोट[संपादित करें]

  1. प्रचलित हिंदी वर्तनी में इनके नाम को "सरंगी", "सारंगी" अथवा "षड़ंगी" के रूप में भी लिखा जाता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]