धृति

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हिन्दू दर्शन
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ॐ
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धृति अर्थात धीरज, धैर्य। योगाभ्यास नियमित रूप से, दीर्घकाल तक व धैर्य के साथ करते रहने से ही हमें इसमें सफलता मिलती हैं। अतः मन, वचन व कर्म से धैर्य रखने के लिये श्रीमद्भगवद्गीता में कहा गया है। [1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Holy Gita Ready Reference. Chinmaya Mission. पृ॰ 417.