दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

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दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
DelhiCollegeofEngineeringLogo.jpg

आदर्श वाक्य:विज्ञानवान् प्रज्ञावान् भवतु
(विज्ञानवान और प्रज्ञावान बनो)
स्थापित1940
प्रकार:सार्वजनिक
निदेशक:डॉ॰ पी.बी. शर्मा
शिक्षक:110 (अनुमानित)
स्नातक:2000 (पूर्ण-कालिक) 200 (अंश-कालिक)
स्नातकोत्तर:450 (पूर्ण-कालिक) 55 (अंश-कालिक)
अवस्थिति:दिल्ली, दिल्ली, भारत
परिसर:दिल्ली (उपनगरीय; 163.9 एकड़)
सम्बन्धन:दिल्ली विश्वविद्यालय
जालपृष्ठ:http://dce.ac.in coordinates = 28°44′59.81″N 77°7′1.30″E / 28.7499472°N 77.1170278°E / 28.7499472; 77.1170278निर्देशांक: 28°44′59.81″N 77°7′1.30″E / 28.7499472°N 77.1170278°E / 28.7499472; 77.1170278

दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय , (पुराना नाम : दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज या पूर्व दिल्ली पॉलीटेक्निक ; अंग्रेजी:Delhi Technological University या DTU पूर्व में DCE) भारत का एक इंजीनियरिंग (अभियांत्रिकी) विश्वविद्यालय है। मूल रूप से इसे सन 1940 में दिल्ली पालीटेक्निक (बहुतकनीकी संस्थान) के रूप में स्थापित किया गया था और उस समय यह भारत सरकार के सीधे नियंत्रण में था। यह दिल्ली का पहला इंजीनियरिंग कॉलेज है और भारत के उन कुछ इंजीनियरिंग कॉलेजों में से है जो स्वतंत्रता से पहले स्थापित किए गए थे।

1963 के बाद से यह दिल्ली की राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार के नियंत्रण में है और १९५२ से २००९ तक यह कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध रहा। २००९ में कॉलेज को राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया तथा इसका नाम बदलकर 'दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय' कर दिया गया।

यह बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बी.टेक), मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी (एम.टेक), डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) और मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) की उपाधियों के लिए पाठ्यक्रम प्रदान करता है। इस विश्वविद्यालय में चौदह शैक्षणिक विभाग शामिल हैं जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसन्धान के क्षेत्र में मजबूत शिक्षा प्रदान करते हैं। सन २०१७ से यहाँ बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन एवं अर्थशास्त्र में बी.ए. जैसे पाठ्यक्रम भी प्रदान किए जा रहे हैं।

इतिहास[संपादित करें]

सन 1940 में दिल्ली पालीटेक्निक के रूप में स्थापित यह तकनीकी स्कूल, भारतीय उद्योगों की मांगों को पूरा करने के लिए बनाया गया था। उस समय दिल्ली पॉलिटेक्निक कला, वास्तुकला, वाणिज्य, इंजीनियरिंग, अनुप्रयुक्त विज्ञान और वस्त्र उद्योग संबंधी पाठ्यक्रम उपलब्ध कराता था। दिल्ली पालीटेक्निक द्वारा प्रदत्त राष्ट्रीय डिप्लोमा को उस समय संघ लोक सेवा आयोग द्वारा डिग्री के समकक्ष माना था। 1962 में दिल्ली पालीटेक्निक का प्रशासन, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से हटकर दिल्ली राज्य के आधीन आ गया तब, इसके विभिन्न विभाग जो विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रम चलाते थे, को अलग करके विशिष्ट क्षेत्रों से संबंधित संस्थानों की सर्जना की गयी, जो छात्रो को विशिष्ट क्षेत्रों से संबंधित पाठ्यक्रम उपलब्ध कराते थे। कला विभाग को कॉलेज ऑफ आर्ट्स और वाणिज्य और व्यवसाय प्रशासन विभाग को पुन: विभाजित करके कई वाणिज्य और सचिवीय आचरण के संस्थान बनाये गये। 1965 में, दिल्ली पॉलिटेक्निक का नाम बदलकर दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज कर दिया गया। इसके बाद, सिविल (लोक), इलेक्ट्रिकल (विद्युत), इलेक्ट्रानिक्स (इलेक्ट्रोनिकी) एवं मैकेनिकल (यांत्रिक) इंजीनियरिंग में इंजीनियरिंग स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए गए। पिछले दो दशकों की कुछ बड़ी घटनायें हैं, संयुक्त प्रवेश परीक्षा की शुरुआत, महाविद्यालय परिसर का उत्तरी दिल्ली के बवाना रोड के निकट स्थित एक 164 एकड़ के विशाल परिसर में स्थानानांतरण और अनुसंधान और विकास की दिशा में, छात्रों और शिक्षकों की शिफ्ट ऑफ फोकस।

परिसर[संपादित करें]

संगणक केन्द्र, प्लेसमेंट ब्लॉक और विज्ञान ब्लॉक
परिसर का मुख्य प्रवेश द्वार

परिसर का कश्मीरी गेट से बवाना रोड मे स्थानानान्तरण 1995 में शुरु हुआ और नए परिसर मे 1999 से औपचारिक रूप से पूर्ण कालिक चार वर्षीय पाठ्यक्रमों का अध्ययन शुरू किया गया। नया परिसर अच्छी तरह से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। यह एक अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त परिसर है- जिनमे एक केंद्रीकृत कम्प्यूटर केन्द्र, एक आधुनिक पुस्तकालय प्रणाली, एक खेल परिसर, आठ लड़कों के छात्रावास, तीन लड़कियों के छात्रावास और एक शादीशुदा जोड़ों का छात्रावास शामिल हैं। परिसर मे संकाय और स्टाफ के लिए भी आवासीय सुविधाओं उपलब्ध हैं।

प्रवेश[संपादित करें]

दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज और नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी संस्थान में एक पूर्ण कालिक इंजीनियरिंग स्नातक की उपाधि के लिये दिल्ली विश्वविद्यालय, संयुक्त प्रवेश परीक्षा (CEE) और केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अखिल भारतीय इंजिनीयरिंग प्रवेश परीक्षा का संचालन करता है। संस्थान की कुल 570 सीटों में से 85% राष्ट्रीय राजधानी राज्य क्षेत्र दिल्ली या दिल्ली क्षेत्र के उच्च विद्यालयों से उत्तीर्ण छात्रों के लिए आरक्षित हैं, जबकि शेष 15% सीटें दिल्ली क्षेत्र के बाहर के उम्मीदवारों के लिए हैं जिनकी भर्ती अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की मेरिट के आधार पर होती है।

दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज में एक स्नातकोत्तर उपाधि पाठ्यक्रम मे प्रवेश GATE की अर्हक परीक्षा में प्रदर्शन के तथा उसके बाद होने वाले साक्षात्कार के आधार पर होता है।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]