ज्योतिरादित्य सिंधिया

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ज्योतिरादित्य सिंधिया
Jyotiraditya Madhavrao Scindia delivering a talk on “Indian Energy Security in the context of the Power Sector”.(cropped).jpg

पदस्थ
कार्यालय ग्रहण 
20 जून 2020
पूर्वा धिकारी सत्यनारायण जटिया
चुनाव-क्षेत्र मध्य प्रदेश

जन्म 1 जनवरी 1971 (1971-01-01) (आयु 51)
मुंबई, महाराष्ट्र
राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी
अन्य राजनीतिक
संबद्धताऐं
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
जीवन संगी प्रियदर्शनी राजे सिंधिया
निवास जयविलास महल, ग्वालियर, मध्य प्रदेश, भारत
धर्म हिन्दू कुर्मी

ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया (जन्म १ जनवरी १९७१) भारत सरकार की पंद्रहवीं लोकसभा के मंत्रिमंडल में वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री रह चुके हैं। ये लोकसभा की मध्य प्रदेश स्थित गुना संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व करते थे।

ज्योतिरादित्य सिंधिया मनमोहन सिंह के सरकार में केन्द्रीय मंत्री रहे हैं यह गुना शहर से कांग्रेस के विजयी उम्मीदवार रहे हैं। इनके पिता स्व॰ श्री माधवराव सिन्धिया जी भी गुना से कांग्रेस के विजयी उम्मीदवार रहे थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया 2019 लोकसभा चुनाव में गुना सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा लेकिन इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 19-6-2020 को मप्र से राज्यसभा के सदस्य चुने गये हैं। वर्तमान में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हैं।

पारिवारिक जीवन[संपादित करें]

सिंधिया का जन्म 1 जनवरी 1971 को बॉम्बे वर्तमान में मुम्बई स्थित कुर्मी मराठा परिवार में हुआ था। वह कुर्मी जाति से संबंधित होने का दावा करता है।[1][2] उनके माता-पिता ग्वालियर के पूर्व शासक माधवराव सिंधिया और माधवी राजे सिंधिया थे, जो एक मराठा रियासत थी। उन्होंने शहर के कैंपियन स्कूल और दून स्कूल, देहरादून में पढ़ाई की। 1993 में उन्होंने हार्वर्ड कॉलेज, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के स्नातक, उदार कला कॉलेज से अर्थशास्त्र में बीए की डिग्री के साथ स्नातक किया। 2001 में, उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए प्राप्त किया।

ज्योतिरादित्य, ग्वालियर रियासत के अंतिम महाराजा, जीवाजीराव सिंधिया के पोते हैं, उन्होंने 1947 में भारत के गणराज्य में शामिल हो गये थे। हालाँकि उन्हें पूर्व खिताबों और विशेषाधिकारों की अनुमति प्राप्त थी, जिसमें एक वार्षिक पारिश्रमिक भी शामिल था, जिसे प्रिवी पर्स कहा जाता था। 1961 में उनकी मृत्यु के बाद, उनके बेटे माधवराव सिंधिया (ज्योतिरादित्य के पिता) ग्वालियर के अंतिम नाममात्र के महाराज बने, 1971 में भारत के संविधान में 26वें संशोधन के रूप में, भारत सरकार ने रियासतकालीन भारत के सभी आधिकारिक शीर्षकों, विशेषाधिकारों और प्रिवी पर्स सहित प्रतीकों को समाप्त कर दिया।

उनकी मां माधवी राजे सिंधिया (किरण राज्य लक्ष्मी देवी) नेपाल के प्रधान मंत्री और कास्की और लमकुंग के महाराजा और गोरखा के सरदार रामकृष्ण कुंवर के पैतृक वंशज जुड्ढा शमशेर जंग बहादुर राणा की पोती है। ज्योतिरादित्य का विवाह मराठा रियासत के ही बड़ौदा के गायकवाड़ परिवार की प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया से हुआ। उनकी दादी विजयराजे सिंधिया भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से थीं, उनकी बुआ वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे भी राजनीति में सक्रीय हैं।

राजनैतिक जीवन[संपादित करें]

30 सितम्बर 2001 को उनके पिता माधवराव सिंधिया की एक हवाई जहाज हादसे में मृत्यु हो गई। 18 दिसम्बर को ज्योतिरादित्य राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी से जुड गये और उन्होंने अपने पिता की सीट गुना से चुनाव लड़ने का फैसला किया। 24 फरवरी को वे 450,000 के मार्जिन वोट से जीत हासिल कर सांसद बने।

उन्हें मई 2004 में फिर से चुना गया, और 2007 में केंद्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री के रूप में केंद्रीय मंत्री परिषद में शामिल किया गया। उन्हें 2009 में लगातार तीसरी बार फिर से चुना गया और इस बार उन्हें वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री बनाया गया।

2014 में, सिंधिया गुना से फिर चुने गए थे लेकिन 2019 में कृष्ण पाल सिंह यादव से वह सीट हार गए।[3]

10 मार्च 2020 को उन्होंने अंतरिम पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा देकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से बाहर हो गये।[4] इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने एक बयान जारी कर दावा किया कि उन्हें "पार्टी विरोधी गतिविधियों" के लिए पार्टी से निकाल दिया गया है। वह 11 मार्च 2020 को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये।[5]

2021 के कैबिनेट विस्तार में उन्हें मोदी सरकार के कैबिनेट में जगह मिली | ज्योतिरादित्य सिंधिया को नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Civil Aviation Ministry) की जिम्मेदारी दी गई. दिलचस्प यह  है कि इसी मंत्रालय की जिम्मेदारी कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधव राव सिंधिया (Madhav Rao Scindia) के पास भी थी | [6] 2022 में इस्पात मंत्रालय (Steel Ministry) का प्रभार नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को मिला है | उन्हें ये आरसीपी सिंह के राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने पर ये मंत्रालय मिला है[7] |

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. M, Dilip; al (2019-03-12). "Congress has never been a party of OBCs, but something's changing now". ThePrint (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2020-07-10.
  2. "Diggy-Jyoti feud may have roots in history". The Sunday Guardian Live (अंग्रेज़ी में). 2020-03-14. अभिगमन तिथि 2020-07-10.
  3. "गुना से हारे कांग्रेस के दिग्गज नेता सिंधिया, कभी उनके ही सहयोगी रहे यादव ने किया पराजित". https://www.livehindustan.com (hindi में). अभिगमन तिथि 14 मार्च 2020. |work= में बाहरी कड़ी (मदद)सीएस1 रखरखाव: नामालूम भाषा (link)
  4. नवीन कुमार, पांडे (10 मार्च 2020). "ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा, सोनिया गांधी को लिखे पत्र में छलका दर्द". नवभारत टाइम्स. अभिगमन तिथि 14 मार्च 2020.
  5. "BJP में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया, कहा- कांग्रेस छोड़ते वक्त दुखी भी हूं, व्यथित भी". आजतक.इनटुडे.इन. अभिगमन तिथि 14 मार्च 2020.
  6. "सिंधिया को नागरिक उड्डयन मंत्रालय मिला, पिता माधव राव को भी मिला था ये विभाग". आज तक (hindi में). अभिगमन तिथि 2022-05-05.सीएस1 रखरखाव: नामालूम भाषा (link)
  7. "सिंधिया को मिला इस्पात मंत्रालय (Steel Ministry)". आज तक. 2022-07-06. अभिगमन तिथि 2022-07-08.