जहाँगीर

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नूरुद्दीन सलीम जहाँगीर
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शासन १५ अक्टूबर १६०५ - ८ नवम्बर १६२७
(&0000000696340800.00000022 वर्ष, 24 दिन)
राज तिलक 24 अक्टूबर 1605, आगरा
समाधी जहाँगीर का मकबरा
पूर्वाधिकारी अकबर
उत्तराधिकारी शाहजहाँ
Consort to

नूर जहाँ
शाह बेगम
जगत गोसाई
साहिब जमाल
मलिका जहाँ
नूरुन्निसा बेगम
ख़ास महल
कर्मसी

सालिहा बानो बेगम (पादशाह बेगम)
संतान निसार बेगम
खुसरौ मिर्ज़ा
परवेज़
बहार बनू बगुम
शाह जहाँ
शहरयार
जहाँदार
राजवंश Fictional flag of the Mughal Empire.svg मुग़ल
पिता अकबर
माता मरियम उज़-ज़मानी
धर्म इस्लाम

जहाँगीर अकबर के पुत्र थे। सलीम, मुराद और दानियाल (मुग़ल परिवार)। मुराद और दानियाल पिता के जीवन में शराब पीने की वजह से मर चुके थे। सलीम अकबर की मृत्यु पर नुरुद्दीन मोहम्मद जहांगीर के उपनाम से मुगल बादशाह बना। १६०५ ई. में कई उपयोगी सुधार लागू किए। कान और नाक और हाथ आदि काटने की सजा रद्द कीं। शराब और अन्य नशा हमलावर वस्तुओं का हकमा बंद। कई अवैध महसूलात हटा दिए। प्रमुख दिनों में जानवरों का ज़बीहह बंद. फ़्रीआदीं की दाद रस्सी के लिए अपने महल की दीवार से जंजीर लटका दी। जिसे जंजीर संतुलन कहा जाता था।[1] 1605 ई. में उसके सबसे बड़े बेटे ख़ुसरो ने विद्रोह कर दिया। और आगरे से निकलकर पंजाब तक जा पहुंचा। जहांगीर ने उसे हराया. सिखों के 5वें गुरु अर्जुन देव जो ख़ुसरो की मदद कर रहे थे, को फांसी दे दी गयी। १६१४ ई. में राजकुमार खुर्रम शाहजहां ने मेवाड़ के राणा अमर सिंह को हराया। १६२० ई. में कानगड़ह स्वयं जहांगीर ने जीत लिया। १६२२ ई. में कंधार क्षेत्र हाथ से निकल गया। जहांगीर ही समय में अंग्रेज सर 'टामस रो' राजदूत द्वारा, पहली बार भारतीय व्यापारिक अधिकार करने के इरादे से आया। १६२३ ई. में खुर्रम ने विद्रोह कर दिया। क्योंकि नूरजहाँ अपने दामाद शहरयार को वली अहद बनाने की कोशिश कर रही थी। अंत 1625 ई. में बाप और बेटे में सुलह हो गई।[2]

सम्राट जहांगीर अपनी आत्मकथा 'तुजुक-ए-जहाँगीरी'में लिखते हैं कि गुलाब से इत्र निकलने की विधि नूरजहां बेगम की मां (अस्मत बेगम) ने आविष्कार किया था। जहांगीर चित्रकारी और कला का बहुत शौकीन था। उसने अपने हालात एक किताब तज्जुके जहांगीर में लिखे हैं। उसे शिकार से भी प्रेरित थी। शराब पीने के कारण अंतिम दिनों में बीमार रहता था। 28 अक्टूबर 1627 ई. में कश्मीर से वापस आते समय रास्ते में ही भीमवार नामक स्थान पर निधन हो गया। लाहौर के पास शहादरा में रावी नदी के किनारे दफनाया गया। जहांगीर के समय को चित्रकला का स्वर्णकाल कहा जाता है।

मुग़ल सम्राटों का कालक्रम[संपादित करें]

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सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]