शाह जहाँ

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
(शाहजहाँ से अनुप्रेषित)
Jump to navigation Jump to search
शाह जहाँ
Umbrella-china2-lg.jpg
Flag of the Mughal Empire (triangular).svg ५वें मुग़ल सम्राट
राज्यकाल १९ जनवरी १६२८ – ३१ जुलाई १६५८ (३० साल १९३ दिन)
राज्याभिषेक १४ फ़रवरी १६२८, आगरा
पूर्वाधिकारी जहाँगीर
उत्तराधिकारी औरंग़ज़ेब
पत्नी कन्दाहरी बेग़म
अकबराबादी महल
मुमताज महल
हसीना बेगम
मुति बेगम
कुदसियाँ बेगम
फतेहपुरी महल
सरहिंदी बेगम
श्रीमती मनभाविथी
पूरा नाम अल् आजाद अबुल मुजफ्फर शाहब उद-दीन मोहम्मद खुर्रम
जन्म खुर्रम
५ जनवरी १५९२
लाहौर,पाकिस्तान
मृत्यु २२ जनवरी १६६६ (आयु ६४)
आगरा किला, आगरा,भारत
कब्र ताज महल
सन्तान पुरहुनार बेगम
जहांआरा बेगम
दारा शिकोह
शाह शुजा
रोशनारा बेगम
औरंग़ज़ेब
मुराद बख्श
गौहरा बेगम
कुल तैमूर का कुल
पिता जहाँगीर


शाह जहाँ (उर्दू: شاہجہان)पांचवे मुग़ल शहंशाह थे शाह जहाँ अपनी न्यायप्रियता और वैभवविलास के कारण अपने काल में बड़े लोकप्रिय रहे। किन्तु इतिहास में उनका नाम केवल इस कारण नहीं लिया जाता। शाहजहाँ का नाम एक ऐसे आशिक के तौर पर लिया जाता है जिसने अपनी बेग़म मुमताज़ बेगम के लिये विश्व की सबसे ख़ूबसूरत इमारत ताज महल बनाने का यत्न किया।

सम्राट जहाँगीर के मौत के बाद, छोटी उम्र में ही उन्हें मुगल सिंहासन के उत्तराधिकारी के रूप में चुन लिया गया था। 1627 में अपने पिता की मृत्यु होने के बाद वह गद्दी पर बैठे। उनके शासनकाल को मुग़ल शासन का स्वर्ण युग और भारतीय सभ्यता का सबसे समृद्ध काल बुलाया गया है।

शाहजहां के जीवन के अंतिम दिन[संपादित करें]

1658 में औरंगज़ेब ने शाहजहाँ को ताजमहल में शाही ख़जाने को ख़र्च करने के ज़ुर्म में बंदी बना लिया था इसके बाद शाहजहॉ ने अपने जीवन के अंतिम आठ बर्ष आगरा के किलेे में एक बंदी के रूप में व्‍य‍तीत किये जहा उसे औरंगज़ेब पीने के लिए नपा-तुला पानी एक फूटी हुई मटकी में भेजता था । जब तक शाहजहां जीवित रहे, तब तक शाहजहां की बेटी 'जहां आरा' ने जेल में रहकर उनकी तीमारदारी की। शाहजहां को नज़रबंद कर औरंगज़ेब ने अपने को बादशाह घोषित करवाया। कहा जाता हैं कि मरने से पहले शाहजहां ने अपने पुत्र औरंगजेब को एक चिट्ठी लिखी थी । इस पत्र के आखिरी पंक्तियों में शाहजहां ने लिखा था कि “ऐ पिसर तू अजब मुसलमानी ब पिदरे जिंदा आब तरसानीआफरीन बाद हिंदवान सद बार मैं देहदं पिदरे मुर्दारावा दायम आब” । इसका अर्थ है कि पुत्र तू भी विचित्र मुसलमान है जो अपने जीवित पिता को जल के लिए तरसा रहा है । उन हिन्दुओं को शत शत नमन जो अपने मृत पूर्वजो को भी पानी देते हैं । इस पत्र के जवाब में औरंगजेब ने लिखा कि जिस स्याही से यह पत्र लिखा है उसी स्याही को पी लो और मर जाओ

मुग़ल सम्राटों का कालक्रम[संपादित करें]

बहादुर शाह द्वितीयअकबर शाह द्वितीयअली गौहरमुही-उल-मिल्लतअज़ीज़ुद्दीनअहमद शाह बहादुररोशन अख्तर बहादुररफी उद-दौलतरफी उल-दर्जतफर्रुख्शियारजहांदार शाहबहादुर शाह प्रथमऔरंगज़ेबजहांगीरअकबरहुमायूँइस्लाम शाह सूरीशेर शाह सूरीहुमायूँबाबर