जनरल मोहन सिंह

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ये हैं सरदार मोहन सिंह  जिन्होने द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मन के लिए लड़ाई लड़ी थी।

युद्ध के बाद हिटलर ने उन्हें इनाम देना चाहा तो सरदार जी ने कहा कि हमें अच्छे से अच्छे हथियार दीजिए, क्योंकि हमें सुभाष चंद्र बोस जी जैसे देशभक्त के साथ अपने देश को आजाद करवाना है .।।

हिटलर ने फिर उन्हें जो हथियार दिये , वही हथियार आजाद हिन्द फौज ने इस्तेमाल किए और सही मायने मे इस लड़ाई में र॔गून में 50 हजार से ज्यादा अंग्रेजी फौज के मारे जाने के बाद ही अंग्रेजो ने भारत छोड़ने का फैसला लिया था ।।

सरदार मोहन सिह जी एक ऐसे दलित वर्ग से थे, जिसे अछूत समझा जाता था। लेकिन भारत देश की आज़ादी में, इस अनमोल योगदान के बावजूद, सरदार मोहन सिंह जैसे महान योद्धा का नाम भारत के इतिहास से गायब कर दिया ।।

जय जवान. जय हिंद

अप्रैल १९४२ में कैप्टन मोहन सिंह का स्वागत करते हुए मेजर फ्यूजीवारा

मोहन सिंह (1909–1989) भारतीय सेना के अधिकारी एवं भारतीय स्वतंत्रता के महान सेनानी थे। वे द्वितीय विश्वयुद्ध के समय दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रथम भारतीय राष्ट्रीय सेना (Indian National Army) संघटित करने और इसका नेतृत्व करने के लिए प्रसिद्ध हैं। भारत के स्वतंत्र होने पर राज्य सभा के सदस्य रहे।

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