आरती मुखर्जी

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आरती मुखर्जी
अन्य नाम आरती मुखोपाध्याय
जन्म पश्चिम बंगाल, भारत
शैली फिल्मी संगीत, शास्त्रीय संगीत
व्यवसाय पार्श्व गायिका
वाद्य यन्त्र स्वर
सक्रिय वर्ष 1955 - वर्तमान

आरती मुखर्जी (जिन्हें आरती मुखोपाध्याय के नाम से भी जाना जाता है) एक बंगाली पार्श्व गायिका हैं, जिन्होंने गीत गाता चल (1975), तपस्या (1976), मनोकामना और मासूम (1983) जैसी हिन्दी फिल्मों में भी गाया है।

करियर[संपादित करें]

वर्ष 1957 में, स्कूल में रहते हुए ही उन्होंने मुम्बई में आयोजित संगीत प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार जीता, जिसमें उस समय के प्रमुख संगीत निर्देशकों जैसे अनिल बिस्वास, नौशाद अली, वसंत देसाई, सी. रामचंद्र और मदन मोहन ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका चुना था।[1][2]

आरती ने बंगाली फिल्म सुबरन रेखा और हिन्दी फिल्म अंगुलिमाल के साथ फिल्मों में अपनी संगीत यात्रा शुरू की और तब से, बंगाली, उड़िया, मणिपुरी, असमिया, हिन्दी, गुजराती, मराठी और अन्य भाषाओं में हजारों गाने गाए हैं। उन्हें पहली बार 1965 में सर्वश्रेष्ठ महिला गायिका के लिए प्रतिष्ठित बंगाल फिल्म पत्रकार संगठन पुरस्कार से सम्मानित किया गया और बाद के वर्षों में इसे उन्होंने कई बार प्राप्त किया। अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कारों और खिताबों के बीच, उन्हें गुजराती फिल्मी गीतों के लिए लगातार तीन वर्षों तक गुजरात राज्य सरकार पुरस्कार मिला। उन्हें फिल्म मासूम में उनके गीत "दो नैना और एक कहानी" के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला है।

उन्होंने अस्सी के दशक के उत्तरार्ध तक बंगाली फिल्मों की प्रमुख अभिनेत्रियों जैसे माधबी मुखर्जी, शर्मिला टैगोर, अपर्णा सेन, देबाश्री रॉय, तनुजा आदि के लिए अपनी आवाज़ दी। वह आशा भोंसले के साथ 1970 के दशक में प्रमुख स्थान पर रहीं और दोनों ने धीरे-धीरे संध्या की जगह ले ली। फिल्मों के अलावा, आरती ने कई रिकॉर्ड, डिस्क, एल्बम, रबीन्द्र संगीत और नज़रुल गीती के मंच पर लाइव प्रदर्शनों के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया है। एक कलाकार के रूप में उनकी प्रतिभा संगीत की विविध शैलियों जैसे ठुमरी, भजन, टप्पा, तराना और ग़ज़ल में देखी जा सकती है। उन्होंने भारत और दुनिया भर में व्यापक रूप से मंच पर प्रदर्शन किया है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "जन्मदिन विशेष महेंद्र कपूर: देशभक्ति के गानों में रच-बस गई जिस कलाकार की आवाज". फर्स्टपोस्ट. 9 जनवरी 2019. अभिगमन तिथि 16 फरवरी 2019.
  2. भारद्वाज, अनुराग (14 जुलाई 2018). "मदन मोहन : जिनकी दो ग़ज़लों पर नौशाद अपना पूरा काम क़ुर्बान करने को तैयार थे". सत्याग्रह. अभिगमन तिथि 16 फरवरी 2019.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]