शारदा राजन आयंगर

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शारदा राजन आयंगर जिन्हें केवल शारदा नाम से श्रेय दिया गया, हिन्दी फिल्मों की पार्श्वगायिका रही हैं। 1960 और 70 के दशक में वो सक्रिय रही और 1969 से लेकर 1972 तक फिल्मफेयर पुरस्कारों में उन्हें चार नामांकन प्राप्त हुए, जिसमें से उन्हें जहाँ प्यार मिले के "बात ज़रा है आपस की" के लिये पुरस्कार प्राप्त भी हुआ। हालाँकि उन्हें सर्वाधिक रूप से सूरज (1966) के गीत "तितली उड़ी" के लिये पहचाना जाता है।

करियर[संपादित करें]

शारदा का परिवार तमिल है। लेकिन उन्हें बचपन से हिन्दी गीत गाने का शौक था। तेहरान में एक बड़े फिल्म वितरक श्रीचंद आहुजा ने राज कपूर के लिये पार्टी रखी थी जिसमें शारदा ने गायन किया। राज कपूर ने उन्हें मुम्बई आने पर शंकर-जयकिशन के शंकर से मिलवाया। थोड़े अभ्यास और रियाज़ के बाद उन्हें सूरज के "तितली उड़ी, उड़ जो चली" को गाने का मौका मिला। ये गीत 1966 का लोकप्रिय गीतों में से एक हुआ। उस समय ऐसा होता था कि प्रतिष्ठित फिल्मफेयर पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायन के लिये एक ही श्रेणी थी (या तो किसी पुरुष या किसी महिला को मिलता), लेकिन मोहम्मद रफी के "बहारों फूल बरसाओ" के साथ "तितली उड़ी" को समान वोट प्राप्त हुए। पुरस्कार तो मोहम्मद रफी को ही मिला लेकिन उन्हें इस कीर्तिमान के लिये एक विशेष पुरस्कार दिया गया।[1]

अगले वर्ष से महिला और पुरुष के लिये अलग-अलग श्रेणी बना दी गई। फिर उन्हें लगातार 4 वर्षों के लिये नामांकित किया गया जब दोनों बहनें लता मंगेशकर और आशा भोंसले का दबदबा था। परंतु बाद में शंकर-जयकिशन के समय का क्षण होने लगा और उनको रवि और उषा खन्ना के अलावा किसी ने काम नहीं दिया। 1987 में शंकर के निधन तक आते-आते उनको गाने के मौके खत्म हो गए थे।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "तितली उड़ी, उड़ जो चली ! मेरा दिल मचल गया, उन्हें देखा और बदल गया". अमर उजाला. 27 जनवरी 2018. अभिगमन तिथि 6 जनवरी 2019.