शाहरुख़ ख़ान
| शाहरुख़ ख़ान | |
|---|---|
शाहरुख़ ख़ान टिएजी ह्युअर प्रेस सम्मलेन में |
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| जन्म | 2 नवंबर 1965 नई दिल्ली, भारत |
| रहवास | मुंबई, महाराष्ट्र, भारत[1] |
| व्यवसाय | अभिनेता, निर्माता, टेलिविज़न मेज़बान |
| सक्रिय वर्ष | 1988—अबतक |
| जीवनसंगी | गौरी खान (1991—अबतक) |
| संतान | 2 |
शाहरुख़ ख़ान (जन्म २ नवंबर १९६५) या आम तौर पर शाह रुख खान, एक भारतीय फ़िल्म अभिनेता, निर्माता व टेलिविज़न मेज़बान है। इन्हें अक्सर "बॉलिवुड का बादशाह" संबोधित किया जाता है। इन्होने ७० से भी अधिक हिन्दी फ़िल्मों में कार्य किया है।[2][3][4] खान को तिस नामांकनो में से चौदह फ़िल्मफ़ेयर प्राप्त हुए है और दिलीप कुमार के साथ यह ८ सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जितने वाले अभिनेता होने का रेकॉर्ड रखते है। २००५ में भारतीय सरकार ने भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए इन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया है।
अर्थशास्त्र में उपाधी ग्रहण करने के बाद इन्होने अपने करियर की शुरुआत १९८० में रंगमंचों व कई टेलिविज़न धारावाहिकों से की और १९९२ में व्यापारिक दृष्टी से सफल फ़िल्म दीवाना से फ़िल्म क्षेत्र में कदम रखा। इस फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर प्रथम अभिनय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके पश्च्यात उन्होंने कई फ़िल्मों में नकारात्मक भूमिकाएं अदा की जिनमे डर (१९९३), बाज़ीगर (१९९३) और अंजाम (१९९४) शामिल है। वे कई प्रकार की भूमिकाओं में दिखे व भिन्न-भिन्न प्रकार की फ़िल्मों में कार्य किया जिनमे रोमांस फ़िल्में, हास्य फ़िल्में, खेल फ़िल्में व ऐतिहासिक ड्रामा शामिल है।
उनके द्वारा अभिनीत ग्यारह फ़िल्मों ने विश्वभर में
१ बिलियन का व्यवसाय किया है। खान की कुछ फ़िल्में जैसे दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (१९९५), कुछ कुछ होता है (१९९८), देवदास (२००२), चक दे! इंडिया (२००७), ओम शांति ओम (२००७), रब ने बना दी जोड़ी (२००८) और रा.वन (२०११) अबतक की सबसे बड़ी हीट फ़िल्मों में रही है और कभी खुशी कभी ग़म (२००१), कल हो ना हो (२००३), वीर ज़ारा (२००६)।
अनुक्रम |
[संपादित करें] जीवनी
[संपादित करें] प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा
ख़ान के माता पिता पठान मूल के थे|[5][6][7] उनके पिता ताज मोहम्मद ख़ान एक स्वतंत्रता सेनानी थे और उनकी माँ लतीफ़ा फ़ातिमा मेजर जनरल शाहनवाज़ ख़ान की पुत्री थी|[8]
ख़ान के पिता हिंदुस्तान के विभाजन से पहले पेशावर के किस्सा कहानी बाज़ार से दिल्ली आए थे,[9] हालांकि उनकी माँ रावलपिंडी से आयीं थी|[10] ख़ान की एक बहन भी हैं जिनका नाम है शहनाज़ और जिन्हें प्यार से लालारुख बुलाते हैं|[11][12] ख़ान ने अपनी स्कूली पढ़ाई दिल्ली के सेंट कोलम्बा स्कूल से की जहाँ वह क्रीड़ा क्षेत्र ,शैक्षिक जीवन और नाट्य कला में निपुण थे| स्कूल की तरफ़ से उन्हें "स्वोर्ड ऑफ़ ऑनर" से नवाज़ा गया जो प्रत्येक वर्ष सबसे काबिल और होनहार विद्यार्थी एवं खिलाड़ी को दिया जाता था| इसके उपरांत उन्होंने हंसराज कॉलेज से अर्थशास्त्र की डिग्री एवं जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की मास्टर्स डिग्री हासिल की|[13]
अपने माता पिता के देहांत के उपरांत ख़ान १९९१ में दिल्ली से मुम्बई आ गए| १९९१ में उनका विवाह गौरी ख़ान के साथ हिंदू रीति रिवाज़ों से हुआ|[14] उनकी दो संतान हैं - एक पुत्र आर्यन (जन्म १९९७) और एक पुत्री सुहाना (जन्म २०००)|
[संपादित करें] अभिनय
ख़ान ने अभिनय की शिक्षा प्रसिद्द रंगमंच निर्देशक बैरी जॉन से दिल्ली के थियेटर एक्शन ग्रुप में ली| वर्ष २००७ में जॉन ने अपने पुराने शिष्य के बारे में कहा,
" The credit for the phenomenally successful development and management of Shah Rukh's career goes to the superstar himself."( अनुवाद - शाह रूख़ के कैरियर की असाधारण सफलता का सारा श्रेय उस ही को जाता है|) [15]
ख़ान ने अपना कैरियर १९८८ में दूरदर्शन के धारावाहिक "फ़ौजी" से प्रारम्भ किया जिसमे उन्होंने कोमान्डो अभिमन्यु राय का किरदार अदा किया| [16] उसके उपरांत उन्होंने और कई धारावाहिकों में अभिनय किया जिनमे प्रमुख था १९८९ का "सर्कस" [17], जिसमे सर्कस में काम करने वाले व्यक्तियों के जीवन का वर्णन किया गया था और जो अज़ीज़ मिर्ज़ा द्वारा निर्देशित था| उस ही वर्ष उन्होंने अरुंधती रोय द्वारा लिखित अंग्रेज़ी फ़िल्म "इन विच एनी गिव्स इट दोज़ वंस" में एक छोटा किरदार निभाया| यह फ़िल्म दिल्ली विश्वविद्यालय में विद्यार्थी जीवन पर आधारित थी|
अपने माता पिता की मृत्यु के उपरांत १९९१ में ख़ान नई दिल्ली से मुम्बई आ गये| बॉलीवुड में उनका प्रथम अभिनय "दीवाना" फ़िल्म में हुआ जो बॉक्स ऑफिस पर सफल घोषित हुई| [18] इस फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर की तरफ़ से सर्वश्रेष्ठ प्रथम अभिनय का अवार्ड मिला| उनकी अगली फ़िल्म थी "माया मेमसाब" जो नही चली| १९९३ की हिट फ़िल्म "बाज़ीगर" में एक हत्यारे का किरदार निभाने के लिए उन्हें अपना पहला फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला| उस ही वर्ष में फ़िल्म "डर" में इश्क़ के जूनून में पागल आशिक़ का किरदार अदा करने के लिए उन्हें सरहाया गया| इस वर्ष में फ़िल्म "कभी हाँ कभी ना" के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर समीक्षक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरूस्कार से भी सम्मानित किया गया| १९९४ में ख़ान ने फ़िल्म "अंजाम" में एक बार फिर जुनूनी एवं मनोरोगी आशिक़ की भूमिका निभाई और इसके लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक का पुरूस्कार भी प्राप्त हुआ|
१९९५ में उन्होंने आदित्य चोपड़ा की पहली फ़िल्म "दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे" में मुख्य भूमिका निभाई| यह फ़िल्म बॉलीवुड के इतिहास की सबसे सफल और बड़ी फिल्मों में से एक मानी जाती है| मुम्बई के कुछ सिनेमा घरों में यह १२ सालों से चल रही है| [19] [20] इस फ़िल्म के लिए उन्हें एक बार फिर फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार हासिल हुआ|
१९९६ उनके लिए एक निराशाजनक साल रहा क्यूंकि उसमे उनकी सारी फिल्में असफल रहीं| [21] १९९७ में उन्होंने यश चोपड़ा की दिल तो पागल है, सुभाष घाई की परदेश, और अज़ीज़ मिर्ज़ा की येस बॉस जैसी फिल्मों के साथ सफलता के क्षेत्र में फिर कदम रखा|[22]
ख़ान का वर्ष १९९८ ने भी इस ही तरह स्वागत किया जब करण जोहर की बतौर निर्देशक पहली फ़िल्म कुछ कुछ होता है उस साल की सबसे बड़ी हिट घोषित हुई और ख़ान को चौथी बार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार हासिल हुआ| इस ही साल उन्हें मणि रत्नम की फ़िल्म दिल से में अपने अभिनय के लिए फ़िल्म समीक्षकों से काफ़ी तारीफ़ मिली और यह फ़िल्म भारत के बाहर काफ़ी सफल रही| [23]
अगला वर्ष उनके लिए कुछ ख़ास लाभकारी नही रहा क्यूंकि उनकी एक मात्र फ़िल्म, बादशाह, का प्रदर्शन स्मरणीय नही रहा और वह औसत व्यापार ही कर पायी| [24] सन २००० में आदित्य चोपड़ा की मोहब्बतें में उनके किरदार को समीक्षकों से बहुत प्रशंसा मिली और इस फ़िल्म के लिए उन्हें अपना दूसरा फ़िल्मफ़ेयर समीक्षक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला| उस ही साल आई उनकी फ़िल्म जोश भी हिट हुई| उस ही वर्ष में ख़ान ने जूही चावला और अज़ीज़ मिर्ज़ा के साथ मिल कर अपनी ख़ुद की फ़िल्म निर्माण कम्प्नी, 'ड्रीम्ज़ अन्लिमिटिड', की स्थापना की| इस कम्प्नी की पहली फ़िल्म फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी, जिसमे ख़ान और चावला दोनों ने अभिनय किया, बॉक्स ऑफिस पे जादू बिखेरने में असमर्थ रही| कमल हसन की विवादग्रस्त फ़िल्म हे राम में भी ख़ान ने एक सहयोगी भूमिका निभाई जिसके लीये उन्हें समीक्षकों ने सर्हाया हाला की यह फ़िल्म भी असफल श्रेणी में रही| ये मेरा फेवरिट ऐक्ट्र हे। [21]
सन २००१ में, ख़ान ने करण जोहर के साथ अपनी दूसरी फ़िल्म कभी खुशी कभी ग़म की, जो एक पारिवारिक कहानी थी और जिसमें अन्य भी कई सितारे थे| यह फ़िल्म उस वर्ष की सबसे बड़ी हिट फिल्मों की सूची में शामिल थी| उन्हें अपनी फ़िल्म अशोका, जो की ऐतिहासिक सम्राट अशोक के जीवन पर आधारित थी, के लीये भी प्रशंसा मिली लेकिन यह फ़िल्म भी नाकामियाब रही|
सन २००२ में ख़ान ने संजय लीला भंसाली की दुखांत प्रेम कथा देवदास में मुख्य भूमिका अदा की जिसके लिए उन्हें एक बार फिर फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार दिया गया| यह शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास देवदास पर आधारित तीसरी हिन्दी फ़िल्म थी|
अगले साल ख़ान की दो फ़िल्में रिलीज़ हुईं, चलते चलते और कल हो ना हो| चलते चलते एक औसत हिट साबित हुई [25] लेकिन कल हो ना हो, जो की करण जोहर की तीसरी फ़िल्म थी, राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही बाज़ारों में काफ़ी कामियाब रही| इस फ़िल्म में ख़ान ने एक दिल के मरीज़ का किरदार निभाया जो मरने से पहले अपने चारों ओर खुशियाँ फैलाना चाहता है, और इस अदाकारी के लिये उन्हें सरहाया भी गया| [26]
२००४ ख़ान के लिये एक और महत्वपूर्ण वर्ष रहा| इस साल की उनकी पहली फ़िल्म थी फ़राह खान निर्देशित मैं हूँ ना, जो ख़ान द्वारा सह-निर्मित भी थी| यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी हिट सिद्ध हुई| उनकी अगली फ़िल्म थी यश चोपड़ा की वीर ज़ारा जो साल की सबसे कामियाब फ़िल्म थी और जिसमे खान को अपने अभिनय के लिये कई अवार्ड और बहुत प्रशंसा मिली| उनकी तीसरी फ़िल्म थी आशुतोष गोवारिकर निर्देशित स्वदेश, जो दर्शकों को सिनेमा-घरों में लाने में तोह सफल ना हो सकी लेकिन उसमें ख़ान के भारत लौटे एक अप्रवासी भारतीय की भूमिका को सरहाया गया और खान ने अपना छटा फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार जीता| [27]
सन २००५ में उनकी एकमात्र फ़िल्म पहेली (जो की अमोल पालेकर द्वारा निर्देशित थी) बॉक्स ऑफिस पर असफल रही हाला की उसमे ख़ान के अभिनय को सरहाया गया| [28]
२००६ में ख़ान एक बार फिर करण जोहर की फ़िल्म कभी अलविदा ना कहना में देखे गये जो एक अतिनाटकीय फ़िल्म थी| इस फ़िल्म ने भारत में तोह सफलता प्राप्त की ही, साथ ही साथ यह विदेश में सबसे सफल हिन्दी फ़िल्म भी बन गई| [29] उस ही वर्ष खान ने १९७८ की हिट फ़िल्म डॉन की रीमेक डॉन में भी अभिनय किया जो एक बड़ी हिट सिद्ध हुई| [30]
२००७ में ख़ान की दो फिल्में आई है - चक दे! इंडिया और ॐ शान्ति ॐ | चक दे! इंडिया में ख़ान भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच के किरदार में नज़र आते हैं जिनका लक्ष्य है भारत को विश्व कप दिलवाना| इस किरदार की लिये खान को समीक्षकों से तोह खासी प्रशंसा मिली ही है साथ ही साथ यह फ़िल्म एक विशाल हिट भी सिद्ध हुई है| [31] २००७ की दूसरी फ़िल्म ॐ शान्ति ॐ में भी नज़र आए ये फराह खान की शाहरुख़ खान के साथ दूसरी फ़िल्म है| इसमें खान ने दोहरी भूमिका निभाई | पहला किरदार ओम एक जूनियर कलाकार है और एक हादसे में मारा जाता है और दूसरा एक नामी अभिनेता ओम कपूर है | ये फ़िल्म भी २००७ की एक सफल फ़िल्म थी |
[संपादित करें] प्रमुख फिल्में
- For The Complete filmography See Sharukh khan's filmography at IMDb
| वर्ष | फ़िल्म | चरित्र | टिप्पणी | ||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1992 | दीवाना | राजा सहाई | |||||
| दीवाना | राजा सहाय | ||||||
| चमत्कार | सुंदर श्रीवास्तव | ||||||
| राजू बन गया जेंटलमैन | राजू ( राज माथुर) | ||||||
| दिल आशना है | करण | ||||||
| 1993 | माया मेमसाब | ललित | |||||
| किंग अन्कल | अनिल | ||||||
| बाज़ीगर | अजय शर्मा/विकी मल्होत्रा | ||||||
| डर | राहुल मेहरा | ||||||
| 1994 | कभी हाँ कभी ना | सुनील | |||||
| अंजाम | विजय अग्निहोत्री | ||||||
| 1995 | दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे | राज मलहोत्रा | |||||
| ओह डार्लिंग ! ये है इंडिया | हीरो | ||||||
| रामजाने | रामजाने | ||||||
| त्रिमूर्ति | रोमी सिंह | ||||||
| करण अर्जुन | अर्जुन | ||||||
| ज़माना दीवाना | राहुल मल्होत्रा | ||||||
| गुड्डू | गुड्डू बहादुर | ||||||
| 1997 | दिल तो पागल है | राहुल | |||||
| परदेश | अर्जुन सागर | ||||||
| 1998 | कुछ कुछ होता है | राहुल खन्ना | |||||
| दिल से | अमरकांत वर्मा | ||||||
| 2000 | मोहब्बतें | राज आर्यन | |||||
| 2001 | अशोका | अशोक | |||||
| कभी खुशी कभी ग़म | राहुल रायचंद | ||||||
| 2002 | देवदास | देवदास मुखर्जी | |||||
| 2003 | कल हो ना हो | अमन माथुर | |||||
| चलते चलते | राज माथुर | ||||||
| 2004 | स्वदेश | मोहन भार्गव | |||||
| वीर जारा | वीर प्रताप सिह | ||||||
| मैं हूँ ना | राम शर्मा | ||||||
| 2005 | पहेली | किशनलाल | |||||
| 2006 | कभी अलविदा ना कहना | देव सरन | |||||
| डॉन | विजय, डॉन | ||||||
| 2007 | चक दे इन्डिया | कबीर खान | |||||
| ओम शान्ति ओम | ओम प्रकाश माखीजा, ओम कपूर | ||||||
| 2008 | रब ने बना दी जोडी | सुरिन्दर साहनी, राज | |||||
| 2009 | बिल्लू | सुपरस्टार साहिर खान | |||||
| लक बाय चांस | |||||||
| 2010 | दुल्हा मिल गया | ||||||
| माई नेम इज़ ख़ान | |||||||
| कूची कूची होता है | 2011 | रा.वन | |||||
| 2011 | रा.वन | [[:श्रेणी:२०११ मे बनी हिन्दी फ़िल्म रा वन डान २ |
[संपादित करें] नामांकन और पुरस्कार
- 2011 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - माई नेम इज़ ख़ान
- 2007 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - चक दे! इंडिया
- 2005 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - स्वदेश
- 2003 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - देवदास
- 1999 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - कुछ कुछ होता है
- 1998 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - दिल तो पागल है
- 1996 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे
- 1994 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - बाज़ीगर
[संपादित करें] संदर्भ
- ↑ “Bandra Muslims to defend SRK, Mannat from Sena”, 4 February 2011। अभिगमन तिथि: 30 October 2011।
- ↑ "द ग्लोबल इलाईट – 41: शाहरुख खान". न्यूज़विक. 20 दिसंबरr 2008. http://www.newsweek.com/id/176325. अभिगमन तिथि: 24 दिसंबर 2008.
- ↑ “profile_1_bollywood-indian-cinema-shah-rukh-khan?_s=PM: SHOWBIZ द किंग ऑफ़ बोलीवुड”, सीएनएन, 5 फ़रवरी 2008। अभिगमन तिथि: 25 जून 2011।
- ↑ सनेर, इमाइन। “world किंग ऑफ़ बोलीवुड”, 4 अगस्त 2006। अभिगमन तिथि: 25 जून 2011।
- ↑ Nachgaana: Three hours with Shah Rukh Khan
- ↑ ABPL Group: Shah Rukh, Dilip Kumar invited to Pakistan
- ↑ Afghanland: Afghans of Guyana
- ↑ "Badshah at durbar and dinner". telegraphindia.com. http://www.telegraphindia.com/1040531/asp/frontpage/story_3313328.asp. अभिगमन तिथि: 12 March 2007.
- ↑ "Rediff News Gallery: The Shahrukh Connection". http://specials.rediff.com/news/2004/may/31sl02.htm.
- ↑ A Hundred Horizons by Sugata Bose, 2006 USA, p136
- ↑ "Tehelka". http://www.tehelka.com/story_main27.asp?filename=Ne100307_I_m_doing_CS.asp&id=2.
- ↑ "Bollywoodgate". http://www.bollywoodgate.com/indian-actors/shah-rukh-khan.html.
- ↑ "Bollywood Blitz". http://www.bollywoodblitz.com/stars/SRK/index.shtml.
- ↑ "SRK - 'Badshah' of Bollywood". http://living.oneindia.in/celebrity/srk-badshah-of-bollywood.html.
- ↑ "Shahrukh's teacher gives him the credit". http://www.hindustantimes.com/StoryPage/StoryPage.aspx?id=f9c017a9-918d-45bf-9162-f147e9fec513&MatchID1=4502&TeamID1=2&TeamID2=6&MatchType1=1&SeriesID1=1122&PrimaryID=4502&Headline='Theatre+is+at+an+all-time+low+in+Delhi'.
- ↑ "The camera chose Shah Rukh Khan". http://www.mid-day.com/entertainment/television/2002/october/32887.htm.
- ↑ "bbc.co.uk". Shahrukh goes global. http://news.bbc.co.uk/2/hi/entertainment/2204900.stm. अभिगमन तिथि: 7 september 2007.
- ↑ "BoxOfficeIndia.Com". http://www.boxofficeindia.com/1992.htm.
- ↑ [1][मृत कड़ियां]
- ↑ "´DDLJ´ Enters The Twelfth Year At The Theaters!". planetbollywood.com. http://www.planetbollywood.com/displayArticle.php?id=011307064804. अभिगमन तिथि: 14 January 2007.
- ↑ 21.0 21.1 [2][मृत कड़ियां]
- ↑ [3][मृत कड़ियां]
- ↑ "boxofficeindia.com". Dil se performs better. http://www.boxofficeindia.com/overseas.htm. अभिगमन तिथि: July 21 2007.
- ↑ [4][मृत कड़ियां]
- ↑ [5][मृत कड़ियां]
- ↑ [6][मृत कड़ियां]
- ↑ [7][मृत कड़ियां]
- ↑ "boxofficeindia.com". http://www.boxofficeindia.com/2005.htm.
- ↑ "boxofficeindia.com". http://www.boxofficeindia.com/2006.htm.
- ↑ "BoxOfficeIndia.com". http://www.boxofficeindia.com/2006.htm.
- ↑ "Boxofficeindia.com". Boxofficeindia.com. http://www.boxofficeindia.com. अभिगमन तिथि: 2012-01-29.
[संपादित करें] बाह्य कड़ीयां
- शाहरुख़ खान जीवनी
- "स्टार प्लस पर शाहरूख का नया शो, इनाम 5 करोड"
- इंटरनेट मूवी डेटाबेस पर शाहरुख़ ख़ान