लाओ-त्सू

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लाओ-त्सू को ताओ धर्म की कुछ शाखाओं में देवता की तरह पूजा जाता है

लाओ-त्सू (चीनी: 老子, पिनयिन अंग्रेज़ीकरण: Laozi), लाओ-त्सी या लाओ-त्से प्राचीन चीन के एक प्रसिद्ध दार्शनिक थे, जो ताओ ते चिंग नाम के मशहूर उपदेश ले लेखक के रूप में जाने जाते हैं। उनकी विचारधाराओं पर आधारित धर्म को ताओ धर्म कहते हैं। लाओ-त्सू एक सम्मान जतलाने वाली उपाधि है, जिसमें 'लाओ' का अर्थ 'आदरणीय वृद्ध' और 'त्सू' का अर्थ 'गुरु' है। चीनी परम्परा के अनुसार लाओ-त्सू छठी शताब्दी ईसापूर्व में झोऊ राजवंश के काल में जीते थे। इतिहासकारों में इनकी जीवनी को लेकर विवाद है। कुछ कहते हैं कि वे एक काल्पनिक व्यक्ति हैं, कुछ कहते हैं कि इन्हें बहुत से महान व्यक्तियों को मिलकर एक व्यक्तित्व में दर्शाया गया है और कुछ कहते हैं कि वे वास्तव में चीन के झोऊ काल के दुसरे भाग में झगड़ते राज्यों के काल में (यानि पांचवीं या चौथी सदी ईसापूर्व में) रहते थे।[1][2]

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बाहरी जोड़[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Lao-tzu and the Tao-te-ching, Michael LaFargue, SUNY Press, 1998, ISBN 978-0-7914-3599-1, ... Lao-tzu Lao-tzu, the alleged Warring States philosopher and author of the Tao-te-ching, was elevated in Han bibliography to the status of 'founder' of the 'Taoist school' ...
  2. Opusculum de sectis apud Sinenses et Tunkinenses: A small treatise on the sects among the Chinese and Tonkinese, Adriano (di St. Thecla), SEAP Publications, 2002, ISBN 978-0-87727-732-3, ... Laozi is a mythical rather than a historical figure. All the information about his life relies on later accounts. The information on him first appears as early as third century BCE in numerous places in the Zhuangzi ...