नूर इनायत ख़ान

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
यह लेख निर्वाचित लेख बनने के लिए परखने हेतु रखा गया है। अधिक जानकारी के लिए निर्वाचित लेख आवश्यकताएँ देखें।
नूर इनायत ख़ान
उपनाम मैडेलीन (1943, जासूसी के दौरान नर्स के रूप में)
जन्म 01 जनवरी 1914
मास्को, रूसी साम्राज्य
देहांत 13 सितम्बर 1944(1944-09-13) (उम्र 30)
डकाऊ एकाग्रता शिविर, जर्मनी
निष्ठा यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस
सेवा/शाखा महिला सहायक वायु सेना (डब्लू ए ए एफ),
विशेष अभियान के कार्यकारी (एस ओ ई)
प्राथमिक चिकित्सा नर्सिंग क्षेत्र
सेवा वर्ष 1940-1944 (डब्लू ए ए एफ)
1943–1944 (एस ओ ई)
उपाधि सहायक अनुभाग अधिकारी (डब्लू ए ए एफ)
ध्वज (एफ ए एन वाई)
दस्ता सिनेमा
ईनाम जार्ज क्रॉस, क्रोक्स डी गेयर, डिस्पैचिज में मेंशन

नूर इनायत ख़ान (उर्दू: نور النساء, अँग्रेजी: Noor Inayat Khan; 1 जनवरी 1914 – 13 सितंबर 1944) भारतीय मूल की ब्रिटिश गुप्तचर थीं, जिन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान मित्र देशों के लिए जासूसी की। ब्रिटेन के स्पेशल ऑपरेशंस एक्जीक्यूटिव के रूप में प्रशिक्षित नूर द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान फ्रांस के नाज़ी अधिकार क्षेत्र में जाने वाली पहली महिला वायरलेस ऑपरेटर थीं। जर्मनी द्वारा गिरफ्तार कर यातना दिए जाने और गोली मारकर उनकी हत्या किए जाने से पहले द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान वे फ्रांस में एक गुप्त मिशन के अंतर्गत नर्स का काम करती थीं। फ्रांस में उनके इस कार्यकाल तथा उसके बाद आगामी 10 महीनों तक चली यातनाओं के बावजूद पूछताछ करने वाले नाज़ी जर्मनी की खुफिया पुलिस गेस्टापो द्वारा उनसे कोई राज़ नहीं उगलवाया जा सका। उनके बलिदान और साहस की गाथा युनाइटेड किंगडम और फ्रांस में प्रचलित है। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें युनाइटेड किंगडम एवं अन्य राष्ट्रमंडल देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मान जॉर्ज क्रॉस से सम्मानित किया गया। उनकी स्मृति में लंदन के गॉर्डन स्क्वेयर में स्मारक बनाया गया है, जो इंग्लैण्ड में किसी मुसलमान को समर्पित और किसी एशियाई महिला के सम्मान में इस तरह का पहला स्मारक है।

प्रारंभिक जीवन[संपादित करें]

:डकाऊ मेमोरियल हॉल में नूर की स्मारक पट्टिका

नूर इनायत का जन्म 1 जनवरी, 1914 को मॉस्को, रूस में हुआ था। उनका पूरा नाम "नूर-उन-निसा इनायत ख़ान" है।[1] वे चार भाई-बहन थे, भाई विलायत का जन्म 1916, हिदायत का जन्म 1917, और बहन ख़ैर-उन-निसा का जन्म 1919 में हुआ था।[2] उनके पिता भारतीय और माँ अमेरिकी थीं। उनके पिता हज़रत इनायत ख़ान 18वीं सदी में मैसूर राज्य के शासक टीपू सुल्तान के पड़पोते थे, जिन्होंने भारत के सूफ़ीवाद को पश्चिमी देशों तक पहुँचाया था। वे एक धार्मिक शिक्षक थे, जो परिवार के साथ पहले लंदन और फिर पेरिस में बस गए थे।[1][2][3] नूर की रूचि भी उनके पिता के समान पश्चिमी देशों में अपनी कला को आगे बढ़ाने की थी। नूर संगीतकार भी थीं और वीणा बजाने का उन्हें शौक था। वहाँ उन्होंने बच्चों के लिए कहानियाँ भी लिखी और जातक कथाओं पर उनकी एक किताब भी छपी थी।[4]

प्रथम विश्व युद्ध के तुरंत बाद उनका परिवार मॉस्को से लंदन, इंग्लैण्ड आ गया था, जहाँ नूर का बचपन बीता।[1][2] वहाँ नॉटिंग हिल में स्थित एक नर्सरी स्कूल में दाखिले के साथ उनकी शिक्षा आरम्भ हुई। 1920 में वे फ्रांस चली गईं, जहाँ वे पेरिस के निकट सुरेसनेस के एक घर में अपने परिवार के साथ रहने लगीं जो उन्हें सूफ़ी आंदोलन के एक अनुयाई के द्वारा उपहार में मिला था। 1927 में पिता की मृत्यु के बाद उनके ऊपर माँ और छोटे भाई-बहनों की ज़िम्मेदारी आ गई। स्वभाव से शांत, शर्मीली और संवेदनशील नूर संगीत को जीविका के रूप में इस्तेमाल करने लगी और पियानो की धुन पर सूफ़ी संगीत का प्रचार-प्रसार करने लगी। कविता और बच्चों की कहानियाँ लिखकर अपने कैरियर को सँवारने लगीं। साथ ही फ्रेंच रेडियो में नियमित योगदान भी देने लगीं। 1939 में बौद्धों की जातक कथाओं से प्रभावित होकर उन्होंने एक पुस्तक ट्वेंटी जतका टेल्स[क 1] नाम से लंदन से प्रकाशित की।[5]द्वितीय विश्व युद्ध के फैलने के बाद, फ्रांस और जर्मनी की लड़ाई के दौरान वे 22 जून 1940 को अपने परिवार के साथ समुद्री मार्ग से ब्रिटेन के फालमाउथ, कॉर्नवाल लौट आयीं।[1][2]

प्रकाशित कृति/ अनुवाद[संपादित करें]

बाहरी छवियाँ
यादों के साये में नूर ड्रीम एन फन
भारत की असली 'बॉबी जासूस' नवभारत टाइम्स

महिला सहकर्मी, वायु सेना[संपादित करें]

अपने पिता की शांतिवाद की शिक्षा से प्रभावित नूर को नाज़ियों के अत्याचार से गहरा सदमा लगा।[1] जब फ्रांस पर नाज़ी जर्मनी ने हमला किया तो उनके दिमाग़ में उसके ख़िलाफ़ वैचारिक उबाल आ गया। उन्होंने अपने भाई विलायत के साथ मिलकर नाज़ी अत्याचार को कुचलने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा था कि-

"मैं कुछ भारतीयों को इस युद्ध में उच्च सैन्य प्रशिक्षण के साथ शामिल करने की पक्षधर हूँ। मैं चाहती हूँ कि जो भी भारतीय मित्र देशों की सेवा में कुछ करने की इच्छा रखता हो, हम उनके बीच सेतु का निर्माण करेंगे, उन्हें उत्प्रेरित करेंगे और उनकी प्रशंसा करेंगे।"

—नूर खान के पत्र के मुख्य अंश का हिन्दी अनुवाद[9]

19 नवंबर 1940 को वे वायु सेना में द्वितीय श्रेणी एयरक्राफ्ट अधिकारी के रूप में शामिल हुईं, जहाँ उन्हें "वायरलेस ऑपरेटर" के रूप में प्रशिक्षण हेतु भेजा गया। जून 1941 में उन्होंने आरएएफ बॉम्बर कमान के बॉम्बर प्रशिक्षण विद्यालय में आयोग के समक्ष "सशस्त्र बल अधिकारी" के लिए आवेदन किया, जहाँ उन्हें सहायक अनुभाग अधिकारी के रूप में पदोन्नति प्राप्त हुई।[1][2]वे अपने तीन उपनामों क्रमश:"नोरा बेकर"[10]"मेडेलीन"[1] और 'जीन-मरी रेनिया'[11] के रूप में भी जानी जाती हैं।

विशेष अभियान के कार्यकारी एफ सेक्सन एजेंट के रूप में जासूसी[संपादित करें]

नूर की पहचान का जिम्मेदार डकाऊ का पूर्व कैदी माइकल पेल्लिस।
"भारत में अंग्रेज़ी साम्राज्य से लोहा लेने वाले हैदर अली और टीपू सुल्तान के ख़ानदान की एक महिला ने बहादुरी के लिए ब्रिटेन में सम्मान हासिल किया।”
महबूब ख़ान, बीबीसी संवाददाता [4]

बाद में नूर को स्पेशल ऑपरेशंस कार्यकारी के रूप में एफ (फ्रांस) की सेक्शन में जुड़ने हेतु भर्ती किया गया और फरवरी 1943 में उन्हें वायु सेना मंत्रालय में तैनात किया गया। उनके वरिष्ठों में गुप्त युद्ध के लिए उनकी उपयुक्तता पर मिश्रित राय बनी और यह महसूस किया गया कि अभी उनका प्रशिक्षण अधूरा है, किन्तु फ्रेंच की अच्छी जानकारी और बोलने की क्षमता ने स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप का ध्यान उन्होंने अपनी ओर आकर्षित कर लिया, फलत: उन्हें वायरलेस आपरेशन युग्मित अनुभवी एजेंटों की श्रेणी में एक वांछनीय उम्मीदवार के तौर पर प्रस्तुत किया गया। फिर वह बतौर जासूस काम करने के लिए तैयार की गईं और 16-17 जून 1943 में उन्हें जासूसी के लिए रेडियो ऑपरेटर बनाकर फ्रांस भेज दिया गया। उनका कोड नाम 'मेडेलिन' रखा गया।[1] वे भेष बदलकर अलग-अलग जगह से संदेश भेजती रहीं।

उन्होंने दो अन्य महिलाओं क्रमश: डायना राउडेन (पादरी कोड नाम) और सेसीली लेफ़ोर्ट (ऐलिस शिक्षक/कोड नाम) के साथ फ्रांस की यात्रा की, जहाँ वे फ्रांसिस सुततील (प्रोस्पर कोड नाम)के नेतृत्व में एक नर्स के रूप में चिकित्सकीय नेटवर्क में शामिल हो गई। डेढ़ महीने बाद ही चिकित्सकीय नेटवर्क से जुड़े रेडियो ओपरेटरों को जर्मनी की सुरक्षा सेवा (एस डी) के द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। वे द्वितीय विश्व युद्ध में पहली एशियन सीक्रेट एजेंट थी। एक कामरेड की गर्लफ्रेंड ने जलन के मारे उनकी मुखबिरी की और वे पकड़ी गईं।[1][2]

बहादुरी की मिसाल[संपादित करें]

ब्रिटिश वायु सेना द्वारा इंग्लैंड में नूर की स्मृति में संस्थापित शिलालेख

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नूर विंस्टन चर्चिल के विश्वसनीय लोगों में से एक थीं। उन्हें सीक्रेट एजेंट बनाकर नाजियों के कब्जे वाले फ्रांस में भेजा गया था। नूर ने पेरिस में तीन महीने से ज्यादा वक्त तक सफलतापूर्वक अपना खुफिया नेटवर्क चलाया और नाजियों की जानकारी ब्रिटेन तक पहुंचाई। पेरिस में 13 अक्टूबर, 1943 को उन्हें जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। इस दौरान खतरनाक कैदी के रूप में उनके साथ व्यवहार किया जाता था। हालांकि इस दौरान उन्होंने दो बार जेल से भागने की कोशिश की, लेकिन असफल रहीं।[2]

डकाऊ स्थित नूर का प्रतिरोध स्मारक

गेस्टापो के पूर्व अधिकारी हैंस किफर ने उनसे सूचना उगलवाने की खूब कोशिश की, लेकिन वे भी नूर से कुछ भी उगलबा नहीं पाए। 25 नवंबर, 1943 को इनायत एसओई एजेंट जॉन रेनशॉ और लियॉन के साथ सिचरहिट्सडिन्ट्स (एसडी), पेरिस के हेडक्वार्टर से भाग निकलीं, लेकिन वे ज्यादा दूर तक भाग नहीं सकीं और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। बात 27 नवंबर, 1943 की है। अब नूर को पेरिस से जर्मनी ले जाया गया। नवंबर 1943 में उन्हें जर्मनी के फॉर्जेम जेल भेजा गया। इस दौरान भी अधिकारियों ने उनसे खूब पूछताछ की, लेकिन उसने कुछ नहीं बताया।[2][12]

उन्हें दस महीने तक बेदर्दी से प्रताड़ित किया गया, फिर भी उन्होंने अपनी जुबान नहीं खोली। उन्हें जेल में बंद करके जजीरों में बांधा गया, बहुत प्रताड़ित किये जाने के बाद भी नूर ने कोई राज जाहिर नहीं किया।[1][2]

नूर वास्तव में एक मजबूत और बहादुर महिला थीं[1][2], जिन्होंने आखिरी दम तक अपना राज नहीं खोला और जब उन्हें गोली मारी गई, तो उनके होठों पर शब्द था -"फ्रीडम यानी आजादी"। [1][2] इस उम्र में इतनी बहादुरी कि जर्मन सैनिक तमाम कोशिशों के बावजूद उनसे कुछ भी नहीं जान पाये, यहाँ तक कि उनका असली नाम भी नहीं।[9][13][14]

प्रशंसक[संपादित करें]

नूर एक राष्ट्रवादी महिला थीं और गाँधी तथा नेहरू की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं।[15]

मृत्यु[संपादित करें]

लंदन में नूर की तांबे की प्रतिमा, जिसका अनावरण दिनांक 8 नवंबर 2012 को हुआ

11 सिंतबर, 1944 को उन्हें और उसके तीन साथियों को जर्मनी के डकाऊ प्रताड़ना कैंप ले जाया गया, जहाँ 13 सितंबर, 1944 की सुबह चारों के सिर पर गोली मारने का आदेश सुनाया गया। यद्यपि सबसे पहले नूर को छोडकर उनके तीनों साथियों के सिर पर गोली मार कर हत्या की गई। तत्पश्चात नूर को डराया गया कि वे जिस सूचना को इकट्ठा करने के लिए ब्रिटेन से आई थीं, वे उसे बता दें। लेकिन उसने कुछ नहीं बताया, अंतत: उनके भी सिर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। उसके बाद सभी को शवदाहगृह में दफना दिया गया। मृत्यु के समय उनकी उम्र सिर्फ 30 वर्ष थी।[4][16][17][18]

स्मृति शेष[संपादित करें]

ब्रिटेन का सर्वोच्च जॉर्ज क्रॉस सम्मान

डाक टिकट[संपादित करें]

ब्रिटेन के रॉयल मेल के द्वारा नूर की स्मृति में डाक टिकट जारी किया गया है। ‘उल्लेखनीय लोगों’ की श्रृंखला में नूर पर नौ अन्य लोगों के साथ डाक टिकट जारी किया गया जिसमें अभिनेता सर एलेक गिनीज और कवि डिलन थॉमस शामिल हैं।[19]

स्मारक[संपादित करें]

लंदन में उनकी तांबे की प्रतिमा लगाई गई है । यह पहला मौका है जब ब्रिटेन में किसी मुस्लिम या फिर एशियाई महिला की प्रतिमा लगी है। गॉर्डन स्क्वेयर गार्डन्स में उस मकान के नजदीक प्रतिमा स्थापित की गई है जहां वह बचपन में रहा करती थीं। प्रतिमा का अनावरण दिनांक 8 नवंबर 2012 को महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की बेटी राजकुमारी एनी ने किया।[20][21][15]

इस प्रतिमा को लंदन के कलाकार न्यूमैन ने बनाया है।[22]

सम्मान[संपादित करें]

  • सालों की गुमनामी के बाद ब्रिटेन द्वारा उस बहादुर भारतीय महिला को मरणोपरांत 1949 में जॉर्ज क्रॉस से नवाजा गया।[23][24]
  • फ्रांस के द्वारा उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान - "क्रोक्स डी गेयर" से नवाजा गया।[25]

विमर्श[संपादित करें]

नूर इनायत ख़ान: एक नज़र में

नागरिक पहचान

  • नागरिक नाम: नूर-उन-निशा इनायत ख़ान
  • एस॰ ई॰ ओ॰ एजेंट के रूप में, सेक्शन एफ:
    • उपनाम : « मेडेलीन »
    • आपरेशनल कोड नाम : नर्स
    • कवर पहचान : जीनी मारी रेगनीर, नानी
    • छद्म नाम : नोरा बेकर

पूर्वज

  • जुमा शाह, पंद्रहवीं सदी के सूफी संत।
  • टीपू सुल्तान(1749-1799), प्राचीन मैसूर राज्य के शासक।

पारिवारिक सदस्य

  • पिता: पीर-ओ-मुरशिद हजरत इनायत खान, (प्रसिद्ध भारतीय सूफी फकीर, जिन्होने भारत के सूफ़ीवाद को पश्चिमी देशों तक पहुँचाया)
  • माँ: ओरा रे बेकर (अमेरिकी महिला,जिन्होने 1912 में मुस्लिम घूंघट अपनाया)
  • भाई:
विलायत इनायत खान (1916-2004)
हिदायत इनायत खान (1917)
  • बहन: खैर-उन-निशा इनायत खान (1919),उपनाम: क्लेयर रे हार्पर, जो अँग्रेजी के प्रसिद्ध उपन्यासकर डेविड हार्पर की माँ हैं।

सैन्य करियर

  • नवंबर 1940, महिला सहायक वायु सेना ; 424598 एसीडब्ल्यू
  • 8 फरवरी 1943, एस॰ ई॰ ओ॰, सेक्शन एफ; ग्रेड: सेक्शन ऑफिसर; रेजिमेंट: 9901
स्त्रोत: श्राबणी बासु की पुस्तक "स्पाई प्रिंसेस यानी जासूस राजकुमारी- नूर इनायत ख़ान" से

ब्रितानी साम्राज्य की विरोधी होने के बावजूद नूर ने ब्रिटेन के लिए जासूसी की और एक नई मिसाल क़ायम भी की, लेकिन क्या उन्हें इतिहास में वो मुक़ाम हासिल है जिसकी वो हक़दार थीं। दिलचस्प सवाल ये है कि सूफ़ी संगीत प्रेमी और बेहद ख़ूबसूरत महिला नूर द्वितीय विश्व युद्ध के समय में जासूस कैसे बन गईं? ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब लंदन में रहने वाली भारतीय मूल की एक पत्रकार श्राबणी बासु ने अपनी किताब "स्पाई प्रिंसेस यानी जासूस राजकुमारी- नूर इनायत ख़ान" के ज़रिए तलाश करने की कोशिश की है।[26]नूर की आत्मकथा ‘स्पाई प्रिंसेज’ लिखने वाली श्राबणी बासु को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरुन और दूसरे सांसदों की सहायता मिली। शामी चक्रवर्ती, गुरिंदर चड्ढा, अनुष्का शंकर और नीना वाडिया जैसी हस्तियों ने भी उनका साथ दिया।[16]

"जब मैंने उनकी कहानी पर शोध शुरू किया, मुझे पता चला कि वह सूफ़ी थीं और अहिंसा और धार्मिक समन्वय में विश्वास करती थीं।”
श्राबणी बासु, लेखिका, 'नूर स्मारक ट्रस्ट' की संस्थापक'

मैंने ब्रिटेन में भारतीयों के योगदान के बारे में कही एक लेख पढ़ा था जिसमें नूर इनायत ख़ान का नाम भी था। लिखा गया था कि वह ब्रितानी जासूस थीं लेकिन उनके बारे में बहुत थोड़ी सी जानकारी थी। अलबत्ता उनकी एक तस्वीर छपी थी जिसमें वह बहूत ख़ूबसूरत नज़र आ रही थीं। बस तभी से मेरी रुचि जागी कि उनके बारे में कुछ किया जाए।

श्राबणी बासु, लेखिका[4]


आयाम[संपादित करें]

भारतीय फिल्मकार तबरेज नूरानी व जफर हई नूर की कहानी को बड़े पर्दे पर पेश करने जा रहे हैं। हई व नूरानी ने लंदन में रहने वाली भारतीय व पत्रकार से लेखिका बनी श्राबणी बासु की किताब 'स्पाई प्रिंसेस यानी जासूस राजकुमारी- नूर इनायत ख़ान' पर फिल्म बनाने के अधिकार खरीद लिए हैं। नूरानी जहां लॉस ऐन्जेलिस में रहते हैं, वहीं हई मुम्बई में रहते हैं।[27] हालांकि इसके पूर्व भारत के जाने-माने फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल ने भी उस भारतीय महिला जासूस पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर की फिल्म बनाने की घोषणा कर चुके हैं।[28]

संदर्भ-ग्रंथ[संपादित करें]

  • "विट्वीन सिल्क एंड साइनाइड: ए कोडमेकर्स स्टोरी 1941-1945" (अँग्रेजी), लियोपोल्ड शमूएल मार्क्स (1998 ), हार्पर कॉलिन्स, 2000. ISBN 0- 684-86780
  • "नूर-उन-निशा इनायत खान: मेडलीन" (जीवनी, अँग्रेजी), जीन ओवर्टन फुलर (1988), प्रकाशक: ईस्ट-वेस्ट पब्लिकेशन, लंदन।
  • "दि वुमेन हू लिव्ड फॉर डेंजर: दि वुमेन एजेंट्स ऑफ एस ओ ई इन दि सेकेंड वर्ल्ड वार" (अँग्रेजी), मार्कस बिन्नी (2003), प्रकाशक: क्रोनेट बूक।
  • "ए लाइफ इन सेक्रेट्स: दि स्टोरी ऑफ वेरा अटकींस एंड दि लॉस्ट एजेंट्स ऑफ एस ओ ई" (अँग्रेजी), साराह हेल्म (2005), प्रकाशक:अबैकस।
  • "ऑफ एस ओ ई इन फ्रांस" (आधिकारिक इतिहास, अँग्रेजी), एम. आर.डी. फुट, प्रकाशक: फ्रैंक कास प्रकाशन (2004)( पहले एच.एम.एस.ओ.लंदन से 1966 में प्रकाशित)।
  • "दि टाइगर क्लाव" (जीवन पर आधारित एक उपन्यास, अँग्रेजी), शौना सिंह बाल्डविन, नोफ कनाडा, (2004), 592 पृष्ठ, पेपर बैक: विंटेज कनाडा (26 जुलाई, 2005), आईएसबीएन 0-676-97621-2
  • "ला प्रिंसेज औबली" (नूर के जीवन पर आधारित उपन्यास, फ्रेंच), लौरेंत जोफ्रीन (2004)।
  • "ए मैन कौल्ड इट्रेप्ड" (अँग्रेजी, विलियम स्टीवेंसन, प्रकाशक: ल्योंस प्रेस, 1976 , भाग द्वितीय , अध्याय 27 ।
  • "स्पाई प्रिंसेस : द लाईफ ऑफ नूर इनायत ख़ान"(जीवनी, अँग्रेजी, श्राबणी बासु, ओमेगा प्रकाशन, आईएसबीएन 0: 0930872789/13: 978-0930872786
  • श्राबणी बासु[29]

उद्धरण[संपादित करें]

  1. यह अंग्रेज़ी में लिखी गई एक पुस्तक है जिसके शीर्षक का मूल भाषा में नाम Twenty Jataka Tales है और इसका हिन्दी अनुवाद 'बीस जातक कथाएँ' है। इस पुस्तक की आईएसबीएन संख्या 978-0892813230 है।

टीका-टिप्पणी[संपादित करें]

   क.    ^  सभी कहानियाँ 'जातकमाला' (संस्कृत) से आयेरे कुरान द्वारा चयनित और अनुवादित है, पाली भाषा से नूर इनायत खान द्वारा इसे पुन: अनूदित और विलविक ली मायर द्वारा चित्रित किया गया है।

   ख.    ^  (अनूदित: लिंक, इव; चित्रित: विलविक ली मायर, हेनरीट्ट), आईएसटी वेस्ट पब्लिकेशन, दि हग, प्रकाशन वर्ष: 1978, आई एस बी एन 978-90-70104-30-6

   ग.    ^  (अनूदित: फुशलीन, पूरन, चित्रित: मट्टीओली, स्टेफेनिया प्रकाशन: पेरतामा परियोजना) आई एस बी एन 978-3-907643-11-2

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Noor-un-Nisa Inayat Khan [नूर-उन-निसा इनायत खान]" (अंग्रेज़ी में). सूफी ऑर्डर इंटरनेशनल. http://www.sufiorder.org/noor.html. अभिगमन तिथि: 15 मार्च 2014. 
  2. "Tomb of Hazrat Inayat Khan [हजरत इनायत खान की कब्र]" (अंग्रेज़ी में). डेल्ही इनफार्मेशन. http://www.delhiinformation.org/tombs/tombofhazratinayatkhan.html. अभिगमन तिथि: 15 मार्च 2014. 
  3. "Noor Inayat Khan [नूर इनायत ख़ान]" (अंग्रेज़ी में). स्पार्टाकस एजुकेशनल. http://www.spartacus.schoolnet.co.uk/SOEnoor.htm. अभिगमन तिथि: 15 मार्च 2014. 
  4. ख़ान, महबूब. "जासूस राजकुमारी-नूर इनायत ख़ान". बीबीसी हिन्दी. http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2006/03/060302_noor_inayat.shtml. अभिगमन तिथि: 15 मार्च 2014. 
  5. "Noor Anayat Khan: The princess who became a spy [नूर इनायत ख़ान: एक राजकुमारी जो गुप्तचर बन गई]" (अंग्रेज़ी में). द इंडिपेंडेंट. 20 फ़रवरी 2006. http://www.independent.co.uk/arts-entertainment/books/features/noor-anayat-khan-the-princess-who-became-a-spy-526024.html. अभिगमन तिथि: 15 मार्च 2014. 
  6. पुस्तक, मूल अँग्रेजी नाम: Twenty Jātaka Tales, प्रकाशक: जी॰ जी॰ हर्राप लंदन, प्रकाशन वर्ष : 1939,आईएसबीएन संख्या 978-0892813230
  7. पुस्तक, मूल स्वाहिली नाम का अँग्रेजी अनुवाद:Twenty Jātaka tale, प्रकाशक: ईस्ट-वेस्ट पब्लिकेशन फंड दि हग, प्रकाशन वर्ष: 1978 आईएसबीएन संख्या: 978-90-70104-30-6
  8. पुस्तक, मूल जर्मन नाम का अँग्रेजी अनुवाद:Twenty Jātaka stories, प्रकाशन: पेतमा प्रोजेक्ट ज्यूरिख, प्रकाशन: 6 अक्तूबर 2009, आईएसबीएन संख्या: 978-3-907643-11-2
  9. Visram, Rozina (1986). ""Ayahs, Lascars and Princes: The Story of Indians in Britain 1700-1947"" (English में). letter from Noor Khan (अनुवाद: नूर खान के पत्र) (First ed.). Pluto Press. pp. 142. ""I wish some Indians would win high military distinction in this war. If one or two could do something in the Allied service which was very brave and which everybody admired it would help to make a bridge between the English people and the Indians."" 
  10. "The Message of Hazrat Inayat Khan [हजरत इनायत खान का संदेश]" (अँग्रेजी में). http://www.hazratinayatkhan.org/audio2-noor-archive.php. अभिगमन तिथि: 15 अप्रैल 2014. "A message of Love, Harmony & Beauty(अनुवाद:प्रेम, सद्भाव और सौंदर्य का एक संदेश)" 
  11. दबोरा वेइस (20 मार्च 2014). "Holocaust Heroine Motivated by Islam? [इस्लाम से प्रेरित नायिका]" (अंग्रेज़ी में). फ्रंट पेज मैगज़ीन. http://www.frontpagemag.com/2014/deborah-weiss/holocaust-heroine-motivated-by-islam/. अभिगमन तिथि: 9 अप्रैल 2014. 
  12. "Noor Anayat Khan: The princess who became a spy [नूर इनायत ख़ान: एक राजकुमारी जो जासूस बनी]". द इंडिपेंडेंट. २० फ़रवरी २००६. http://www.independent.co.uk/arts-entertainment/books/features/noor-anayat-khan-the-princess-who-became-a-spy-526024.html. अभिगमन तिथि: ९ अप्रैल २०१४. 
  13. एंथोनी केव ब्राउन (2007). "Bodyguard of Lies [झूठ के अंगरक्षक]". द लियोंस प्रेस. p. 551. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-1-59921-383-5. http://books.google.ca/books?id=Q0UBW_KysgMC&pg=PA551. 
  14. London Gazette: (Supplement) no. 38578, p. 1703, 5 अप्रैल 1949. Retrieved 29 मार्च 2014.
  15. "लंदन में भारतीय जासूस की मूर्ति!". बीबीसी हिन्दी. http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/11/121116_noorstatue_rf.shtml. अभिगमन तिथि: 12 अगस्त 2014. 
  16. "स्पाई प्रिंसेज नूर का सम्मान". आई नैक्सट लाइव. http://inextlive.jagran.com/uk-to-honour-spy-princess-201211030025. अभिगमन तिथि: 15 मार्च 2014. 
  17. "स्पाई प्रिसेंज नूर इनायत खान" (हिन्दी में). career7india.com. http://www.career7india.com/news/newsdetail/id/308/news/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%88+%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9C+%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%B0+%E0%A4%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A4+%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A8. अभिगमन तिथि: 15 मार्च 2014. 
  18. "Selected Document Release, 2003, Noor Inayat KHAN (1914–44)". द नेशनल आर्काइवज़. http://www.nationalarchives.gov.uk/releases/2003/may12/selectedagents.htm. अभिगमन तिथि: ९ अप्रैल २०१४. 
  19. "भारतीय महिला जासूस नूर पर ब्रिटेन ने जारी किया डाक टिकट". पीपुल्स समाचार. http://www.peoplessamachar.co.in/index.php?option=com_content&view=article&id=41706%3Abritain-issued-stamps-on-indian-female-spy-noor&catid=10%3Aworld-news&Itemid=112. अभिगमन तिथि: 12 अगस्त 2014. 
  20. "लंदन में जासूस नूर की प्रतिमा का अनावरण". ज़ी न्यूज. 8 नवंबर 2012. http://zeenews.india.com/hindi/tags.aspx?tag=%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%B0-%E0%A4%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A4-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A8. अभिगमन तिथि: 15 मार्च 2014. 
  21. "भारतीय मूल की ब्रिटिश जासूस नूर इनायत खान की प्रतिमा का लंदन में अनावरण". जागरण जोश. http://www.jagranjosh.com/current-affairs/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%B6-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%B0-%E0%A4%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A4-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B2%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A3-1352440566-2. अभिगमन तिथि: 15 मार्च 2014. 
  22. "स्पाई प्रिंसेज नूर का सम्मान". आई नैक्सट. 3 नवंबर 2012. http://inextlive.jagran.com/uk-to-honour-spy-princess-201211030025. अभिगमन तिथि: 12 अगस्त 2014. 
  23. "George Cross, George Medal and the Medal of the Order of the British Empire (military): Air Ministry recommendation to the Selection Committee and correspondence (Assistant Section Officer Nora Inayat-Khan, Women's Auxiliary Air Force)", T 351/47, National Archives, Kew.
  24. "Noor Inayat Khan [नूर इनायत ख़ान]" (अंग्रेज़ी में). स्पार्टाकस एजुकेशनल. http://www.spartacus.schoolnet.co.uk/SOEnoor.htm. अभिगमन तिथि: ९ अप्रैल २०१४. 
  25. "Noor Inayat Khan: Life of a Spy Princess [नूर इनायत खान: एक गुप्तचर का जीवन]" (अंग्रेज़ी में). बीबीसी. Archived from the original on १४ जनवरी २०११. https://web.archive.org/web/20110114091855/http://www.bbc.co.uk/history/programmes/timewatch/gallery_spy_06.shtml. 
  26. Basu, Shrabani (1) (अँग्रेजी में). Spy Princess: The Life of Noor Inayat Khan(हिन्दी जासूस राजकुमारी: नूर इनायत खान का जीवन) (First ed.). London: Omega Publications. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-930872-78-9, 978-0930872786. 
  27. "बड़े पर्दे पर पेश होगी अंतर्राष्ट्रीय कहानी 'नूर इनायत'". नवभारत टाइम्स. http://navabharat.org/glamor/bollywood/20620-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%B0-%E0%A4%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A4. अभिगमन तिथि: 15 मार्च 2014. 
  28. "द्वितीय विश्व युद्घ पर बेनेगल की फिल्म". आई बी एन लाइव खबर. http://khabar.ibnlive.in.com/showstory.php?id=12328&ref=hindi.in.com. अभिगमन तिथि: 15 मार्च 2014. 
  29. "Noor Anayat Khan: The princess who became a spy [नूर इनायत ख़ान: एक राजकुमारी जो गुप्तचर बन गई।]". द इंडिपेंडेंट. 20 फरवरी 2006. Archived from the original on २८ फ़रवरी २००७. https://web.archive.org/web/20070228144611/http://enjoyment.independent.co.uk/books/features/article346472.ece. 

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]