नीबू
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विटामिन सी से भरपूर नीबू स्फूर्तिदायक और रोग निवारक फल है। इसका रंग पीला या हरा तथा स्वाद खट्टा होता है। इसके रस में ५% साइट्रिक अम्ल होता है तथा जिसका pH २ से ३ तक होता है। किण्वन पद्धति के विकास के पहले नीबू ही साइट्रिक अम्ल का सर्वप्रमुख स्त्रोत था। साधारणतः नीबू के पौधे आकार में छोटे ही होते हैं पर कुछ प्रजातियाँ ६ मीटर तक लम्बी उग सकती हैं। नींबू की उत्पत्ति कहाँ हुई इसके बारे में कोई ठोस प्रमाण नहीं है परन्तु आमतौर पर लोग यही मानते हैं कि यह पौधा मूल रूप से भारत, उत्तरी म्यांमार एवं चीन का निवासी है।[१][२]खाने में नीबू का प्रयोग कब से हो रहा है इसके निश्चित प्रमाण तो नहीं हैं लेकिन यूरोप और अरब देशों में लिखे गए दसवीं सदी के साहित्य में इसका उल्लेख मिलता है। मुगल काल में नीबू को शाही फल माना जाता था। कहा जाता है कि भारत में पहली बार असम में नीबू की पैदावार हुई।[३]
पौष्टिक गुण
नीबू में ए, बी और सी विटामिनों की भरपूर मात्रा है-विटामिन ए अगर एक भाग है तो विटामिन बी दो भाग और विटामिन सी तीन भाग। इसमें -पोटेशियम, लोहा, सोडियम, मैगनेशियम, तांबा, फास्फोरस और क्लोरीन तत्त्व तो हैं ही, प्रोटीन, वसा और कार्बोज भी पर्याप्त मात्रा में हैं।[४] विटामिन सी से भरपूर नीबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही एंटी आक्सीडेंट का काम भी करता है और कोलेस्ट्राल भी कम करता है। नीबू में मौजूद विटामिन सी और पोटेशियम घुलनशील होते हैं, जिसके कारण ज्यादा मात्रा में इसका सेवन भी नुकसानदायक नहीं होता। रक्ताल्पता से पीडि़त मरीजों को भी नीबू के रस के सेवन से फायदा होता है। यही नहीं, नीबू का सेवन करने वाले लोग जुकाम से भी दूर रहते हैं। एक नीबू दिन भर की विटामिन सी की जरूरत पूरी कर देता है। नीबू के कुछ घरेलू प्रयोगों पर लगभग हर भारतीय का विश्वास हैं। ऐसा माना जाता है कि दिन भर तरोताजा रहने और स्फूर्ति बनाए रखने के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में एक नीबू का रस व एक चम्मच शहद मिलाकर पीना चाहिए। एक बाल्टी पानी में एक नीबू के रस को मिलाकर गर्मियों में नहाने से दिनभर ताजगी बनी रहती है। गर्मी के मौसम में हैजे से बचने के लिए नीबू को प्याज व पुदीने के साथ मिलाकर सेवन करना चाहिए। लू से बचाव के लिए नीबू को काले नमक वाले पानी में मिलाकर पीने से दोपहर में बाहर रहने पर भी लू नहीं लगती। इसके अलावा इसमें विटामिन ए, सेलेनियम और जिंक भी होता है। गले में मछली का कांटा फंस जाए तो नीबू के रस को पीने से निकल जाता है।[५]
| देश | उत्पादन (टन में) | |||
|---|---|---|---|---|
| २,०६०,०००F | ||||
| १,८८०,०००F | ||||
| १,२६०,०००F | ||||
| १,०६०,०००F | ||||
| ८८०,०००F | ||||
| ७४५,१००F | ||||
| ७२२,००० | ||||
| ७०६,६५२ | ||||
| ६१५,०००F | ||||
| ५४६,५८४ | ||||
| १३,०३२,३८८F | ||||
| कोई प्रतीक नहीं = आधिकारिक आंकड़े, F = FAO अनुमानितः, A = सकल (आधिकारिक, अर्ध आधिकारिक और अनुमानित: आंकडे़ शामिल हो सकते हैं); स्त्रोत: संयुक्त राष्ट्र का खाद्य और कृषि संगठन: आर्थिक और सामाजिक विभागः सांख्यकीय शाखा |
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उत्पादन
विश्व में सबसे अधिक नीबू का उत्पादन भारत में होता है। यह विश्व के कुल नीबू उत्पादन का १६ प्रतिशत भाग उत्पन्न करता है। मैक्सिको, अर्जन्टीना, ब्राजील एवं स्पेन अन्य मुख्य उत्पादक देश हैं। दाहिनी ओर विश्व के दस शीर्ष नीबू उत्पादक देशो की सूची है(२००७ के अनुसार)। नीबू,लगभग सभी प्रकार की भूमियों में सफलतापूर्वक उत्पादन देता है परन्तु जीवांश पदार्थ की अधिकता वाली,उत्तम जल निकास युक्त दोमट भूमि,जिसकी गहराई २-२.५ मी.या अधिक हो,आदर्श मानी जाती है। भूमि का पी-एच ६.५-७.० होने से सर्वोत्तम वृद्धि और उपज मिलती है।
इसकी कुछ प्रमुख किस्में हैं कागजी नीबू, प्रमालिनी, विक्रम, चक्रधर, पी के एम-१ (P K M-1) और साईं शर्बती। इनमें से कागजी नीबू सर्वाधिक महत्वपूर्ण किस्म है। इसकी व्यापक लोकप्रियता के कारण इसे खट्टा नीबू का पर्याय माना जाता है। प्रमालिनी किस्म गुच्छे में फलती है,जिसमें ३ से ७ तक फल होते हैं। यह कागजी नीबू की तुलना में ३० प्रतिशत अधिक उपज देती है। इसके फल में ५७ प्रतिशत (कागजी नीबू में ५२ प्रतिशत) रस पाया जाता है। विक्रम नामक किस्म भी गुच्छों में फलन करती है। एक गुच्छे में ५-१० तक फल आते हैं। कभी-कभी मई-जून तथा दिसम्बर में बेमौसमी फल भी आते हैं। कागजी नीबू की अपेक्षा यह ३०-३२ प्रतिशत अधिक उत्पादन देती है। चक्रधर नामक किस्म खट्टा नीबू की बीज रहित किस्म है जो रोपण के चौथे वर्ष से फल देना प्रारम्भ कर देती है। इसमें ६०-६६ प्रतिशत रस पाया जाता है। इसके फल प्राय:जनवरी - फरवरी, जून-जुलाई तथा सितम्बर-अक्टूबर में मिलते हैं। पी के एम-१ नामक किस्म उच्च उत्पादन देने वाली किस्म है, जिसके फल गोल,मध्यम से लेकर बड़े आकार के होते हैं। पीले रंग के फलों में लगभग ५२ प्रतिशत तक रस मिलता है। साई शरबती उच्च उत्पादन क्षमता वाली किस्म है। इसमें ग्रीष्म फलन की प्रवृत्ति पाई जाती है। बीजरहित (सीडलेस) नीबू- यह एक नया चयन है जो अन्य किस्मों से दोगुना उत्पादन देता है। यह एक पछैती किस्म है जिसके फल हल्के गुलाबी रंग वाले और पतले छिलके वाले होते हैं। इसके अतिरिक्त ताहिती या पर्शियन वर्ग के नीबू गुणसूत्र त्रिगुणित होते हैं। फल आकार में बड़े व बीजरहित होते हैं। असम के कुछ क्षेत्रों में अभयपुरी लाइम तथा करीमगंज लाइम भी उगाये जाते हैं।[६]
पुराने समय से ही नीबू एक गर्भ निरोधक के रूप मे इस्तेमाल होता रहा है, पर आधुनिक युग मे इसके इस गुण की ओर लोगों ने ध्यान कम ही दिया है। ऑस्ट्रेलिया के कुछ वैज्ञानिकों ने अपने एक शोध के दौरान पाया है कि नीबू का रस मानव शुक्राणु को मारने मे सक्षम है, साथ ही यह एच आई वी विषाणु को भी मार देता है।[७]
संदर्भ
- ↑ Wright, A. Clifford. History of Lemonade, CliffordAWright.com
- ↑ The origins, limmi.it.
- ↑ गुणों की खान है नीबू (एचटीएमएल)। ओरलैंडो झाँसी। अभिगमन तिथि: ४ मई, २००९।
- ↑ प्रकृति द्वारा स्वास्थ्य नीबू और आँवला (पीएचपी)। भारतीय साहित्य संग्रह। अभिगमन तिथि: ४ मई, २००९।
- ↑ नीबू एक फ़ायदे अनेक। जागरण। अभिगमन तिथि: ४ मई, २००९।
- ↑ फल नीबू (जेएसपी)। डील। अभिगमन तिथि: ९ मार्च, २००९।
- ↑ नीबू परिवार नियोजन में सहायक= [१]