रक्ताल्पता
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| रक्ताल्पता {{{other_name}}} वर्गीकरण एवं बाह्य साधन |
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| लौहतत्व की कमी से हुई रक्ताल्पता के एक रोगी की परिधीय रक्त स्मीयर माइक्रोस्कोपी। | |
| आईसीडी-१० | D50.-D64. |
| आईसीडी-९ | 280-285 |
| डिज़ीज़-डीबी | 663 |
| मेडलाइन प्लस | 000560 |
| ईमेडिसिन | med/132 emerg/808 emerg/734 |
| एम.ईएसएच | D000740 |
रक्ताल्पता (रक्त+अल्पता), का साधारण मतलब रक्त (खून) की कमी है। यह लाल रक्त कोशिका में पाए जाने वाले एक पदार्थ (कण) रूधिर वर्णिका यानि हीमोग्लोबिन की संख्या में कमी आने से होती है। हीमोग्लोबिन के अणु में अनचाहे परिवर्तन आने से भी रक्ताल्पता के लक्षण प्रकट होते हैं। हीमोग्लोबिन पूरे शरीर मे ऑक्सीजन को प्रवाहित करता है, और इसकी संख्या मे कमी आने से शरीर मे ऑक्सीजन की आपूर्ति मे भी कमी आती है जिसके कारण व्यक्ति थकान और कमजोरी महसूस कर सकता है।
अनुक्रम |
कारण [संपादित करें]
- शरीर द्वारा लौह और अन्य आहार के उपयोग मे समस्या।
- लौहतत्व युक्त भोजन का अपर्याप्त सेवन।
- मुंह, आहार-नाल, आमाशय या आंतों मे रक्तस्राव।
- योनिक रक्तस्राव या भारी मासिक स्राव।
- एक वर्ष से कम आयु के शिशुओं द्वारा गाय या बकरी के दूध का सेवन।
- शिशुओं को दिये जाने वाले खाद्य अनुकल्प मे लौहतत्व की कमी।
लक्षण [संपादित करें]
- थकान या कमजोरी अनुभव करना।
- त्वचा, होठ, मसूड़ों, आंखों, नाखून और हथेलियों का पीला होना।
- स्पष्ट सोचने मे परेशानी या भ्रम अनुभव करना।
- चक्कर आना या बेहोशी छाना।
- हांफना या सीने मे दर्द।
- दिल की धड़कनों का तेज होना।
- शिशुओं और बच्चों का धीमा विकास।
उपचार व देखभाल [संपादित करें]
- चिकित्सक की सलाह अनुसार अपने भोजन पर विशेष ध्यान देना।
- हरी पत्तेदार सब्जियों, अंडों, लाल मांस, फल, दुग्ध-उत्पाद, मेवों, फलियों और मछली को अपने भोजन मे शामिल करना।
- चिकित्सक की सलाह अनुसार कोई लौह-पूरक (आयरन सप्लीमेंट) लेना।
- प्रतिदिन ६-८ ग्लास तरल पदार्थ लेना।
- कम हुए लौहतत्व और रक्त की पूर्ति के लिए रक्ताधान करवाना।
यदि आपको खड़े होते ही चक्कर आते हैं या आप हांफने लगते हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क साधे।yeh disease waterborne hai.
सन्दर्भ [संपादित करें]
बाहरी कड़ियाँ [संपादित करें]
संदर्भ [संपादित करें]
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