जयपुर का इंडियन ऑयल डिपो अग्निकांड

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जयपुर (इंडियन ऑयल) अग्निकांड

अग्निकांड स्थल
स्थान जयपुर, राजस्थान, भारत
निर्देशांक 26°55′34″N 75°49′25″E / 26.9260, 75.8235
तिथि 29 अक्टूबर 2009 (2009-10-29)
७:३५ अपराह्न (यूटीसी+५:३०)
मृत्यु १२
घायल ३००+

जयपुर इंडियन ऑयल डिपो अग्निकांड गुरूवार २९ अक्टूबर २००९ को हुआ था। इस अग्निकाण्ड में राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर शहर के निकट स्थित सांगानेर में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के तेल भण्डार डिपो में भीषण आग लग गई जिसमें कंपनी को जहाँ करोड़ों की हानि हुई, वहीं इस दुर्घटना में ११ लोगों की मृत्यु भी हो गयी।[1]

पृष्टभूमि

जयपुर के औद्योगिक क्षेत्र सीतापुरा में भारत की तीन प्रमुख पेट्रोलियम तेल कम्पनियों में से एक इंडियन ऑयल की एक बड़ी तेल भण्डारण व्यवस्था है। इसमें अलग अलग कई टैंकों में पेट्रोल, डीज़ल, केरोसीन आदि रखे जाते है। इसके ठीक सामने दूसरी बड़ी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की भी तेल भण्डारण व्यवस्था है। सीतापुरा इलाका मूल रूप से एक बाहरी औद्योगिक क्षेत्र है पर शहर की निरंतर बदलती मांग के कारण वहां रिहायशी व शिक्षा सम्बन्धी इमारतें भी है।[2]

दुर्घटना

गुरूवार २९ अक्तूबर को सांय ७ बजे के करीब इंडियन ऑयल डिपो में कर्मचारियों द्वारा पास ही के अन्य भण्डारण व्यवस्था को तेल की आपूर्ति करने के लिए दो टैंको के बीच की तेल पाइपलाइन के वाल्व खोले गये। भूलवश उन्होंने जिस टैंक में तेल पूरा भरा था, वह टैंक उस के कारण उच्च दबाव में था के वाल्व पहले खोले व आगे के बाद में। इसी कारण बीच के वाल्व में एकदम से तेज रिसाव हुआ व पेट्रोल का फव्वारा छूट पड़ा। इससे हर तरफ पेट्रोल तेजी से फैल गया व ज्वलनशील पदार्थ की गैस इलाके में फैल गयी। पेट्रोल रिसाव होने व पेट्रोल की गंध के कारण ज्यादातर कर्मचारी व आस पास के औद्योगिक व रिहाइशी इमारतें खाली करा ली गयीं। तदोपरान्त डिपो में दुबारा विधुत चालू करने की वजह से चिंगारी भड़की व पेट्रोल ने तुरंत आग पकड़ ली। इससे ११ तेल के टैंकों में आग लग गयी व वो धू धू कर जलने लगे।

का‍र्रवाई

घटना के बाद जिला प्रशासन ने सभी उपायों के साथ आग बुझाने की कोशिश की तथा वहां दमकल सेवा व एंबुलेंस भेजी गयीं। कानून व्यवस्था सुचारु रखने व पूरे क्षेत्र को खाली कराने के लिए भारी पुलिस बंदोबस्त के साथ सेना की भी सहायता ली गयी। आग और न फैले इस उद्देश्य से अन्य शहरों से भी मदद बुलाई गयी पर विशेषज्ञो की राय के बाद आग को खुद ही बुझने के लिए छोड़ दिया गया व उस पर किसी भी प्रकार से पानी आदि नहीं डाला गया।[3]

नुकसान

Io.jpg

इंडियन ऑयल कंपनी को इस अग्निकांड से लगभग १००० करोड़ रुपये का नुकसान हुआ व १० करोड़ लीटर तेल जल कर नष्ट हो गया।[4] इस हादसे में इंडियन ऑयल के कर्मचारियों समेत ११ लोगों की जान गयी व करीब १५० लोग घायल हो गए। आसपास स्थित लगभग ५००-७०० इमारतों को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा। हर इमारत को लगभग १० लाख तक का नुकसान हुआ।[5] भयंकर धुएं के कारण पूरे शहर में प्रदूषण फैल गया व घने काले बादल बन गये।[6] इसी कारण कई जगह सूर्य का प्रकाश भी नहीं पहुंच पाय़ा। पर्यावरण पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ा। जहां हवा में कई जहरीले रसायन घुल गए वहीं राजस्थान आने वाले कई पक्षी यहाँ से दूर चले गए।[7] इस धुएं के कारण हरियाणा और दिल्ली राज्यों में धुंध महसूस किया गया।[तथ्य वांछित]

मुआवजा

भारत सरकार ने करीब ५० करोड़ की शुरुआती सहायता की घोषणा की। साथ ही इंडियन ऑयल ने प्रत्येक मृतक के परिवार को २ लाख व घायलों को १ लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है।[8]

संदर्भ

बाहरी स्रोत