पक्षी

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Birds
जीवाश्म काल: Late Jurassic–Recent, 156–0 मिलियन वर्ष
Scarlet Robin, Petroica boodang
Scarlet Robin, Petroica boodang
वैज्ञानिक वर्गीकरण
Domain: Eukaryota
जगत: Animalia
सबकिंगडम: Eumetazoa

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फायलम: Chordata
उप-फायलम: Vertebrata
इन्फ्राफायलम: Gnathostomata
सुपरवर्ग: Tetrapoda

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वर्ग: Aves
(Linnaeus, 1758)[१]
Orders

About two dozen - see section below

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पक्षी, (एविस वर्ग ) पंखिया, द्विपद, अन्तःउश्नीय (गरम-खून वाले), तथा वर्टीब्रेट(कशेरुक; रीढ़ की हड्डी वाले) पशु हैं जो अंडे देते हैं. लगभग 10000 जीवित प्रजातियां हैं, जो उन्हें सबसे अधिक संख्या वाले चतुश्पदीय कशेरुक बनाते हैं. वे आर्कटिक से अंटार्कटिक तक के दुनिया भर के परितंत्रों में रहते है.पक्षियों के आकार ५ cm (२ इंच) बी हमिंगबर्ड से लेकर २.७ मी. (९ फुट) शुतुरमुर्ग तक होते हैं. जीवाश्म रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि पक्षी जुरासिक अवधि के दौरान त्रिपदीय डायनासोर से विकसित हुए, लगभग 150-200 Ma (मिलियन वर्ष पहले), और जुरासिक के अंत में पाया जाने वाला आर्कियोप्टेरिक्स सबसे पहला ज्ञात पक्षी, c 155-150 Ma.अधिकांश जीवाश्म विज्ञानियों के अनुसार, पक्षी डायनासोर के एकमात्र ऐसे वंशज हैं जो लगभग 65.5 Ma की क्रेटासिउस-तृतीय विलोप घटना के बाद भी जीवित बच गये.


आधुनिक पक्षियों की विशेषताएं हैं, पंख, दंतहीन चोंच, कठोर आवरण वाले अंडे देना, उच्च चयापचयी दर, चार खानों वाला एक ह्रदय तथा एक हल्का परन्तु मजबूत हड्डियों वाला ढांचा. सभी पक्षियों के आगे के हाथ पंखों में परिवर्तित हो चुके हैं और अधिकाँश उड़ सकते हैं, कुछ अपवादों में शामिल हैं राटित, पेंगुइन, और विविध स्थानिक द्वीप की कई प्रजातियाँ. पक्षियों की अनूठी पाचन और श्वसन प्रणाली उनकी उड़ने की क्षमता के लिए अति सहायक होती है. कोरविद और तोते जैसे कुछ पक्षी, पशुओं की सबसे बुद्धिमान प्रजातियों में से एक हैं; कई पक्षी प्राजातियों को औजारों का निर्माण करते और उनका उपयोग करते हुए पाया गया है, और कई सामाजिक प्रजातियाँ एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ज्ञान के सांस्कृतिक प्रसारण का प्रदर्शन करती हैं.


कई प्रजातियां लंबी दूरी का वार्षिक स्थानांतरण करती हैं और कई अन्य लघु अनियमित यातायात करती हैं. पक्षी सामजिक हैं; वे दृश्य संकेतों और गीत संवाद का उपयोग कर संचार करते हैं, और सामुदायिक प्रजनन और शिकार, एकत्रीकरण, और परभक्षियों को घेरने जैसे सामाजिक व्यवहारों में भाग लेते हैं. पक्षी प्रजातियों का विशाल बहुमत सामाजिक एकसंगमनी है, सामान्यतः एक बार में एक प्रजनन मौसम, कभी कभी कुछ वर्षों तक, पर शायद ही कभी जीवन भर के लिए. अन्य प्रजातियों की प्रजनन प्रणालियाँ बहुसंगिनी हैं ("कई मादाएं") या, यदा कदा, बहुपतिका ("कई नारों") वाली. अंडे आम तौर पर एक घोंसले में दिए जाते हैं और माता पिता द्वारा उनको सेने का कार्य किया जाता है. अधिकांश पक्षियों में अंडे सेने के बाद माता पिता द्वारा देखभाल हेतु एक विस्तारित अवधि होती है.


कई प्रजातियाँ आर्थिक महत्व की होती हैं, अधिकांशतः शिकार या खेती द्वारा एकत्रित भोजन के स्रोत के रूप में. गाने वाले पंछी और तोते जैसी कुछ प्रजातियाँ पालतू पक्षियों के रूप में भी प्रचलित हैं. अन्य उपयोगों में शामिल हैं ग्वाना(गोबर) का उर्वरक के रूप में उपयोग. पक्षी मानव संस्कृति के सभी पहलुओं में, धर्म से लेकर कविता और लोकप्रिय संगीत तक, महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं. करीब 120-130 प्रजातियाँ 17 वीं सदी के बाद की मानव गतिविधियों के परिणामस्वरुप विलुप्त हो गई हैं, और सैकडों अन्य उससे पहले ही विलुप्त हो चुकी हैं. वर्तमान में करीब 1200 पक्षियों की प्रजातियाँ मानव गतिविधियों के कारण विलुप्त होने की कगार पर हैं, यद्यपि उनकी रक्षा के प्रयास जारी हैं.


अनुक्रम

विकास और वर्गीकरण

Searchtool.svg मुख्य लेख: Bird evolution
आर्कियोप्टेरिक्स, सबसे पहला ज्ञात पक्षी

पक्षियों का पहला वर्गीकरण फ्रांसिस वि्लुबी और जॉन रे द्वारा 1676 में ओर्निथोलोगी के खंड में किया गया था.[२] वर्तमान में प्रयुक्त वर्गीकरण प्रणाली को बनाने के लिए कारोलुस लिनिअस ने 1758 में उस कार्य को संशोधित किया. [३] लिन्नेअन वर्गीकरण में पक्षियों को जैविक श्रेणी एविस में रखा गया है. जातिवृत्तिक वर्गीकरण एविस को डायनासोर के वंशज ठेरोपोड के रूप में रखता है.[४] एविस और एक सहयोगी समूह, क्लेड क्रोकोडिलिया, साथ में ये दोनों सरीसृप वंशज समूह अर्कोसौरिया के एक मात्र जीवित सदस्य हैं. जातीवृति के आधार पर, एविस सामान्यतः आधुनिक पक्षियों और आर्कियोप्टेरिक्स लिथोग्राफिका के सबसे हाल के आम पूर्वज के वंशजों के रूप में परिभाषित किये जाते हैं.[५]


जुरासिक अवधि के पूर्वार्ध के टिथोनियन चरण (लगभग 155– 150 मिलियन वर्ष पूर्व) का आर्कियोप्टेरिक्स इस परिभाषा के तहत सबसे पहला ज्ञात पक्षी है. जैक गौथिए और फ़ाइलोकोद प्रणाली में विश्वास रखने वाले वाले अन्य लोगों ने एविस की परिभाषा में केवल आधुनिक पक्षी समूहों को ही शामिल किया है. ऐसा करने के लिए, केवल जीवाश्मों द्वारा ज्ञात अधिकांश समूहों को छोड़ दिया गया और बदले में उन्हें एविआले [६] में डाल दिया गया है, परंपरागत रूप से त्रिपद डायनासोर समझे जाने वाले पशुओं के संबंध में आर्कियोप्टेरिक्स के स्थान के बारे में अनिश्चितताओं से बचने के लिए.


सभी आधुनिक पक्षी निओर्निथेस उप-श्रेणी में आते हैं, जिसके दो उप-वर्ग हैं: पलिओनथे, जिसमें शुतुरमुर्ग जैसे उड़ान शक्ति रहित पक्षी आते हैं, और अत्यधिक विविधतापूर्ण नीओनाथे, जिसमे बाकी सब पक्षी शामिल हैं.[४] इन दो उपवर्गों को अक्सर वरिष्ट वर्ग का दर्जा दिया दिया है,[७] यद्यपि लिवेज्य और जूसी नें उन्हें "कोहोर्ट" दर्जा प्रदान क्या है.[४] वर्गीकरण द्रष्टिकोण के आधार पर, जीवित पक्षियों की ज्ञात प्रजातियों की संख्या 9,800[८] से 10,050[९] के बीच है.


डायनासोर और पक्षियों की उत्पत्ति

Searchtool.svg मुख्य लेख: Origin of birds
कांफुसिउसोर्निस , चीन का एक क्रीटेशस पक्षी

जीवाश्म सबूत और गहन जीवविज्ञान के आधार पर, अधिकांश वैज्ञानिक स्वीकार करते हैं कि पक्षी थेरोपोड डायनासोर के विशिष्ट उपवर्ग हैं.[१०] अधिक विशिष्ट रूप से, वे थेरोपोड्स के एक समूह मनिरैप्टर के सदस्य हैं जिसमे, अन्य के आलावा, द्रोमेसौर्स और ओविरापोरिड्स भी शामिल हैं.[११] जैसे जैसे वैज्ञानिक पक्षियों के निकट सम्बन्धी गैर- एवियन थेरोपोड्स के अधिक अवशेषों को खोजते जा रहे हैं, पक्षियों और गैर-पक्षियों के बीच का पूर्व का स्पष्ट अंतर धुंधलाता जा रहा है. उत्तर पूर्व चीन के लिओनिंग प्रांत की हाल की खोज, जिनमें पाया गया कि कई लघु थेरोपोड़ डायनासोर के पास पंख थे, इस अस्पष्टता में योगदान दिया है.[१२]


समकालीन जीवाश्म-विज्ञान में सर्वसम्मत विचार यह है कि पक्षी, एविस, दिओनिकोसौर्स के सबसे करीबी रिश्तेदार हैं, जिसमे द्रोमोअसौरिड्स और त्रोदोन्तिद्स शामिल हैं. ये तीनो साथ में एक समूह बनाते हैं जिसे परएविस कहा जाता है.बेसल ड्रोमेओसौर माइक्रोरैप्टर में ऐसी विशेषताएं थीं जो उसे हवा में बहने या उड़ने में सक्षम बना सकती थीं. अधिकांश बेसल दिनोनिकोसोर बहुत छोटे होते हैं. ये सबूत इस संभावना को बढ़ाते हैं कि पारेविअन्स के सभी पूर्वज अर्बोरेअल रहे होंगे और/ या बहने में सक्षम रहे होंगे. [१३][१४]


स्वर्गीय जुरासिक के उत्तरार्ध का आर्कियोप्टेरिक्स , प्रथम संक्रमणकालीन जीवाश्मों में से एक के रूप में प्रसिद्द है और 19 वीं शताब्दी के अंत में इसने उत्पत्ति के सिद्धांत को समर्थन प्रदान किया. आर्कियोप्टेरिक्स के पास सरीसृप के स्पष्ट गुण हैं: दांत, नाखूनदार उंगलियाँ, और छिपकली की तरह एक लम्बी पूँछ, लेकिन इसके पंख बहुत अच्छे से संरक्षित हैं, जिनमें आधुनिक पक्षियों के सामान उड़ने वाले पंख हैं. इसे आधुनिक पक्षियों का एक प्रत्यक्ष पूर्वज नही माना जाता है, पर एविस या एविआले का सबसे प्राचीन सदस्य है, और संभवतः यह असली पूर्वज का निकट संबंध है. ऐसा भी सुझाव दिया गया है कि आर्कियोप्टेरिक्स एक डायनासौर था जिसकी पक्षियों से निकटता अन्य डायनासौर समूहों से कोई अधिक नहीं थी,[१५] और ज्यादा संभव है कि आर्कियोप्टेरिक्स की अपेक्षा अविमिमुस ही सभी पक्षियों का पूर्वज रहा होगा. [१६]


वैकल्पिक सिद्धांत और विवाद

पक्षियों की उत्पत्ति के अध्ययन में कई विवाद रहे हैं प्रारंभिक असहमतियों में यह शामिल था कि पक्षियों की उत्पत्ति डायनासोर से हुई अथवा उससे भी पहले के अर्कोसोर से. डायनासोर शिविर के भीतर का विवाद यह था कि ज्यादा संभव पूर्वज कौन है, ओर्निथिस्कियन या थेरोपोड़ डायनासोर.[१७] हालाँकि ओर्निथिस्कियन (पक्षीय-कमर) डायनासोर की कमर का ढांचा आधुनिक पक्षियों के समान है, ऐसा माना जाता है कि पक्षियों की उत्पत्ति सौर्स्कियन (छिपकली जैसी कमर) डायनासोर से हुई होगी.[१८] असल में, थेरिज़िनोसौएइदे नाम से जाने जाने वाले थेरोपोड्स के एक विशिष्ट समूह में पक्षीय कमर का विकास तीसरी बार हुआ था. कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि पक्षियों की उत्पत्ति डायनासोर से नहीं हुई, बल्कि लोंगिस्कामा जैसे प्रारंभिक अर्कोसौर्स से इनकी उत्पत्ति हुई है. [१९][२०]


पक्षियों का प्रारंभिक विकास

इन्हें भी देखें: List of fossil birds


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Aves 

Archaeopteryx


 Pygostylia 

Confuciusornithidae


 Ornithothoraces 

Enantiornithes


 Ornithurae 

Hesperornithiformes



Neornithes






बेसल पक्षी फाइलोजेनी चिअप, 2007 के बाद सरलीकृत [२१]

साँचा:Userboxbottom क्रेटेसियस अवधि के दौरान पक्षियों की विविधता में अत्यधिक वृद्धि आई.[२१] कई समूहों नें नाखूनदार पंख और दांत जैसी आदिम विशेषताओं को बनाए रखा, हालाँकि आधुनिक पक्षियों (निओर्निथेस) समेत कई पक्षी समूहों में दांत स्वतन्त्र रूप से समाप्त हो गये. जबकि आर्कियोप्टेरिक्स और जेहोलोर्निस जैसे प्रारंभिक स्वरूपों नें अपने पूर्वजों की लम्बी हड्डीदार पूंछ को बनाए रखा, [२१] क्लेद पिगोस्तिलिया में पिगोस्ताइल हड्डी के प्रकटीकरण के साथ अधिक उन्नत पक्षियों की पूंछ छोटी हो गयी.


एनन्शिओर्निथेस (या "अपोज़िट बर्ड्स") छोटी पूंछ वाले पहले बड़े पक्षी थे, ऐसा नामकरण इस्लिय्र था क्योंकि उनकी गर्दन की हड्डी की बनावट आधुनिक पक्षियों से विपरीत थी. एनन्शिओर्निथेस के विविध प्रकार हैं, तटपक्षियों और मछली खाने वालों से लेकर वृक्ष-वसीय और बीज-सेवक तक.[२१] अधिक उन्नत प्रजातियाँ मछली खाने में माहिर थीं, जैसे कि इच्थ्योर्निठेस (फिश बर्ड्स") की एक घोमरा जैसी उप-श्रेणी.[२२] मिसोजोइक समुद्री पक्षियों, हेस्पेरोर्निथिफोर्म्स, की एक प्रजाति समुद्री परिवेश में मछलियों का शिकार करने हेतु इतने अच्छे से अनुकूलित हो गयी कि उनकी उड़ने की क्षमता का लोप हो गया और वे मूलतः जलवासी हो गयीं. अत्याद्धिक विशिष्टताओं के बावजूद, हेस्पेरोर्निथिफोर्म्स आधुनिक पक्षियों के कुछ निकटतम सम्बन्धियों का प्रतिनिधित्व करते हैं. [२१]


आधुनिक पक्षियों का विकिरण

इन्हें भी देखें: Sibley-Ahlquist taxonomy एवं dinosaur classification
मोया पर हास्ट के ईगल द्वारा हमला

ऐसा माना गया है कि उपवर्ग निओनिर्थेस अब, जिसमे सभी आधुनिक पक्षी सम्मिलित हैं, वेगाविस की खोज के कारण, क्रितेशिअस[२३] के अंत तक कुछ मूल प्रजातियों में विकसित हुआ और इसे दो उच्च वर्गों में विभाजित किया गया है, पेलिओग्नथे और निओग्नाथे. पलिओनथोन में मध्य और दक्षिणी अमेरिका के तिनामोउस और रातिट्स शामिल हैं. बाकी के निओग्नथेस से मूल अंतर गलोंसेरे का था, एक श्रेष्ट वर्ग जिसमें शामिल हैं अन्सेरिफोर्म्स(बत्तख, हंस, राजहंस और चीखनेवाले पक्षी) और गल्लिफोर्म्स (तीतर, ग्रौस, और उनके साथी, साथ ही टीला बनाने वालेगुआन और उनके साथी).विभाजन की तारीख पर वैज्ञानिकों द्वारा व्यापक बहस हो रही है. यह मान लिया गया है कि निओर्निथेस क्रितेशियस में विकसित हुए, और गलोआन्सेरी और निओर्निथेस के बीच का विभाजन K-T विलोप घटना के पहले हुआ, लेकिन इस विषय पर विचारों में भिन्नता है कि बचे हुए निओर्निथेस का विकिरण डायनासोर के लोप से पहले हुआ कि बाद में.[२४] इस असहमति का एक कारण है साक्ष्यों में भिन्नता; आणविक डेटिंग क्रितेशस विकिरण की तरफ इशारा करता है, जबकि जीवाश्म सबूत एक तृतीयक विकिरण का समर्थन करता है. आणविक और जीवाश्म सबूत में मिलन करने के लिए प्रयास विवादास्पद साबित हुए हैं. [२४][२५]


पक्षियों का वर्गीकरण एक विवादास्पद मुद्दा है.सिबली और अह्ल्कुइस्त की फाइलोजेनी एंड क्लासिफिकेशन ऑफ़ बर्ड्स (1990) पक्षियों के वर्गीकरण में एक महत्वपूर्ण कार्य है,[२६] हलाँकि इस पर लगातार बहस होती रही है और कई बार संशोधित हो चुका है. अधिकाँश सबूत यह दर्शाते हैं कि वर्गीकरण सही है,[२७] लेकिन वैज्ञानिकों में इस विषय में असहमति है; आधुनिक पक्षी शारीरिकी, जीवाश्म और डीएनए से सबूतों को पेश करने के बाद भी कोई सर्वसम्मति उभर कर सामने नहीं आई है. अभी हाल में , नये जीवाश्म और आणविक सबूत आधुनिक पक्षियों की प्रजातियों के विकास की स्पष्ट तस्वीर प्रदान कर रहे हैं.


आधुनिक पक्षी प्रजातियाँ: वर्गीकरण

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Neornithes  
Paleognathae 

Struthioniformes



Tinamiformes



 Neognathae 
 

Other birds


Galloanserae 

Anseriformes



Galliformes





आधुनिक पक्षियों के मूल विविधताएँ
सिबली-अह्ल्कुइस्त वर्गीकरण पर आधारित

साँचा:Userboxbottom यह निओर्निथेस (या आधुनिक पक्षियों) में प्रजातियों के वर्गीकरण की एक सूची है. यह सूची पारंपरिक वर्गीकरण का उपयोग करती है (तथा कथित क्लेमेंट्स ऑर्डर), सिबली-मोनरो वर्गीकरण द्वारा संशोधित. पक्षियों की सूची परिवारों सहित प्रजातियों का एक अधिक विस्तृत सार प्रदान करती है.


नियोनाइथ्स उपश्रेणी
नियोनाइथ्स उपश्रेणी में दो श्रेष्ठ्वर्ग शामिल हैं-


पेलिओनथे श्रेष्ठ्वर्ग:


इस नाम को 'पेलिओनाथ' से लिया गया है जो कि प्राचीन ग्रीक भाषा का "पुराने जबड़े" के लिए प्रयुक्त शब्द था, तालू की संरचना के सन्दर्भ में, जिसे अन्य पक्षियों की तुलना में अधिक प्राचीन और सरीसृप से संबंधित बताया गया है. पेलिओनथे में दो वर्ग शामिल हैं जिनमें 49 मौजूदा प्रजातियाँ शामिल हैं.



निओनाथे श्रेष्ठ्वर्ग


निओनाथे श्रेष्ठ्वर्ग में 27 वर्ग हैं जिनमें कुल लगभग दस हजार प्रजातियाँ शामिल हैं. निओनाथे नें, अनुकूली विकिरण से गुजर कर, वर्तमान में दिखने वाले प्रकार(खासकर बिल और पैरों के), कार्यों और व्यवहार की अत्यधिक विविधता का निर्माण किया.


निओनाथे में शामिल वर्ग हैं:



अत्यधिक भिन्न सिबली -मोनरो वर्गीकरण (सिबली -अह्ल्कुइस्त वर्गीकरण) नें आणविक डेटा पर आधारित कुछ पहलुओं में अति विस्तृत अनुकूलन पाया, उदहारण के लिए, हाल के जीवाश्म, आणविक और संरचनात्मक साक्ष्य गलोंसेरा का समर्थन करते हैं. [२४]


वितरण

घरेलु गौरैयाकी सीमा मानवीय गतिविधियों के कारण नाटकीय रूप से विस्तारित है


पक्षी अधिकांश स्थलीय निवास तथा सभी सातों महाद्वीपों पर रहते और प्रजनन करते हैं , सुदूर दक्षिण में हिम पेट्रेल की प्रजनन कालोनी से लेकर४४०-किलोमीटर (२७० मील) अंटार्क्टिक महाद्वीप तक.[२८] उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सर्वाधिक पक्षी विविधता पायी जाती है. पहले ऐसा सोचा जाता था कि इस उच्च विविधता का कारण कटिबंधीय क्षेत्रों की उच्च प्रजातिकरण दर है, हालाँकि हाल के अध्ययनों में पाया गया है कि उच्च अक्षांशों में भी उच्च प्रजातिकरण दर होती है जो उच्च विलुप्ति दर के कारण बराबर(ऑफसेट) हो जाती है.[२९] पक्षियों की कई प्रजातियों नें खुद को समुद्र के अन्दर और ऊपर, दोनों परिस्थितियों के अनुसार ढाल लिया है. कुछ जलपक्षी केवल प्रजनन हेतु ही किनारे पर आते हैं[३०] और कुछ पेंगुइनों को ३००-मीटर (९८० फुट) तक गोता लगाते देखा गया है.[३१]


कई पक्षी प्रजातियों ने उन स्थानों पर अपना बसेरा कर लिया है जिनका परिचय मनुष्यों द्वारा करवाया गया था. इनमें से कुछ परिचय सोंच-विचार के बाद करवाए गये; उदाहरण के लिए, रिंग-नेक्ड मनाल का दुनिया भर में एक शिकार पक्षी के रूप में परिचय कराया गया.[३२] अन्य स्वतः ही हो गये, जैसे कि वाइल्ड मोंक पाराकीट्स का चंगुल से भागने के बाद कई उत्तरी अमेरिकी शहरों में बस जाना.[३३] कैटल एग्रेट,[३४] येलो-हेडेड कराकरा[३५] और गालाह[३६] जैसी कुछ प्रजातियाँ प्राकृतिक रूप से अपनी मूल सीमाओं से काफी दूर तक फ़ैल गयीं, क्योंकि कृषि पद्धतियों नें उनके लिए उपयुक्त नवीन बसेरों का निर्माण कर दिया था.


शारीरिक रचना और शरीर विज्ञान

Searchtool.svg मुख्य लेख: Bird anatomy
एक पक्षी की बाह्य शारीरिकी रचना: 1 चोंच, 2 सर 3 इरिस 4 प्यूपिल , 5 मेंटल, 6 कम कोवेर्ट , 7 स्कापुलार्स , 8 माध्य कोवेर्ट्स , 9 तेर्तिअल्स , 10 दुम, 11 प्रिमरिएस , 12 वेंट, 13 जांघ, 14 टिबियो - तर्सल जोड़बंदी, 15 टैसास, 16 पैर, 17 टिबिअ, 18 बेली, 19 फलान्क्स , 20 स्तन, 21 गले, 22 बाली
Spoken Wikipedia
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ये एक आवाज़-लेख है, जो इस लेख का 2008-01-05 दिनांक को बना आवाज़ प्रतिरूप है । इसे आप सुन सकते हैं ।

अन्य कशेरुकों की तुलना में, पक्षियों की शारीरिक संरचना कई असामान्य रूपांतरों को दर्शाती है, अधिकांशतः उड़ने में सहायता हेतु.


कंकाल बहुत हलकी हड्डियों का बना होता है. उनमें हवा से भरी बड़ी कैविटीज़(छिद्र) होती हैं जो श्वसन प्रणाली के साथ जुड़ती हैं.[३७] खोपडी की हड्डियाँ जुड़ी होती हैं और कपलीय जोड़ों को नहीं दर्शाती हैं.[३८] ऑर्बिट बड़े होते हैं और हड्डीदार पट द्वारा विभाजित होते हैं. रीढ़ में थोरासिक, लम्बर और कौडल क्षेत्र होते हैं जिनमें सेर्विकल (गला) वर्तिब्रे की संख्या काफी परिवर्तनशील और अत्यधिक लोचदार होती है, लेकिन चालन एंटीरियर थोरासिक वर्तिब्रे में कम हो जाता है और लेटर वेर्तिब्रे में होता ही नहीं है.[३९] अंत के कुछ पेल्विस के साथ जुड़कर सिंसेक्रम का निर्माण करते हैं.[३८] उड़ान मांसपेशियों के लिए पसलियाँ चपटी और सेरनम कील्ड होता है, केवल न उड़ सकने वाली पक्षी प्रजातियों को छोड़कर. आगे के हाथ पंखों में परिवर्तित हो गये हैं.[४०]


सरीसृप की भांति, पक्षी प्राथमिक रूप से युरिकोटेलिक, अर्थात उनके गुर्दे उनके रक्त से नाइट्रोजन का कचरा निकालने हैं और यूरिया या अमोनिया की बजाय यूरिक एसिड का उत्सर्जन करते हैं. पक्षियों में मूत्राशय या बाहरी मूत्रमार्ग नहीं होता है और यूरिक एसिड मल् के साथ अर्ध-ठोस वस्तु के रूप में निकलता है.[४१][४२] हालाँकि, हमिंग बर्ड जैसे पक्षी एमोनोटेलिक हो सकते हैं, वे अधिकांश नाइट्रोजन कचरे को अमोनिया के रूप में निकालते हैं.[४३] वे क्रेटिन भी निकालते हैं, स्तनपाइयों की तरह क्रेटिनिन नहीं.[३८] यह वस्तु और साथ ही आंतों का उत्पाद भी, पक्षियों के क्लोअका से निकलता है.[४४][४५] क्लोअका एक बहुउद्देश्यीय द्वार है: इससे कचरा बाहर निकलता है, पक्षी क्लोअका को जोड़कर प्रजनन करते हैं, और मादाएं इससे अंडे देती हैं.इसके आलावा, पक्षियों की कई प्रजातियाँ मल् के तौर पर गुटिकाओं(छोटी गोलियां) को निकालती हैं.[४६] पक्षियों का पाचन तंत्र अनूठा है, भण्डारण के लिए एक क्रॉप और एक गिजार्ड है जिसमें निगले हुए पत्थर खाने को पीसने का काम करके दांतों की कमी की क्षतिपूर्ति करते हैं. [४७]अधिकांश पक्षियों में पाचन तीव्रता से होता है ताकि उड़ने में बाधा न उत्पन्न हो.[४८] कुछ प्रवासी पक्षी अपने शरीर के कई हिस्सों से प्रोटीन का इस्तेमाल प्रवास के दौरान अतिरिक्त उर्जा के रूप में करते हैं, जिसमें आंतों का प्रोटीन भी शामिल है.[४९]


पक्षियों की श्वसन प्रणाली सभी जानवरों में सबसे अधिक जटिल होती है.[३८] साँस लेने पर, ताजी हवा का 75 % फेंफड़ों को छोड़कर सीधे एक हवा की थैली में जाता है, जो फेंफड़ों से शुरू होती है और हड्डियों में हवा के स्थानों द्वारा जुड़ती है, और उन्हें हवा से भर देता है. हवा का अन्य 25% सीधे फेफड़ों में चला जाता है. जब पक्षी साँस छोड़ता है, उपयोग की गई वायु फेफडे से निकल जाती है और हवा की थैली में संग्रहीत ताजी हवा उसी समय फेंफड़ों में भर जाती है. इस प्रकार, एक पक्षी के फेंफड़ों को श्वास लेते और निकालते, दोनों समय निरंतर ताजी हवा की आपूर्ति बनी रहती है.[५०] सिरिन्ग्ज़ के उपयोग द्वारा ध्वनी निकाली जाती है, यह कई टिम्पेनिक झिल्लियों वाला एक मस्क्युलर कक्ष है जो ट्रेकिआ के निचले सिरे पर स्थित है, जहाँ से वह पृथक होता है.[५१] पक्षियों के ह्रदय में चार कक्ष होते हैं और दांया अओर्टिक आर्च व्यवस्थित रक्त संचार करता है (स्तनपाइयों के विपरीत जहाँ बांया आर्च इस कार्य को करता है).[३८] पोस्त्कावा, रीनल पोर्टल प्रणाली के माध्यम से अंगों से रक्त प्राप्त करता है. स्तनधारियों में विपरीत, पक्षियों की लाल रक्त कोशिकाओं में एक नाभिक होता है. [५२]


पक्षियों के आकार के हिसाब से उनका तंत्रिका तंत्र अपेक्षाकृत ज्यादा बड़ा होता है.[३८] मष्तिष्क का सबसे अधिक विकसित हिस्सा वह है जो उड़ान संबंधित कार्यों को नियंत्रित करता है, जबकि सेरिबैलम गति का समन्वय करता है और सेरीब्रम व्यवहार पद्धति, नेविगेशन, संभोग और घोंसले बनाने को नियंत्रित करता है. कीवी,[५३] आधुनिक गिद्ध,[५४] और ट्युबिनोसेस [५५]जैसे उल्लेखनीय उदाहरणों को छोड़कर, अधिकांश पक्षियों की घ्राण शक्ति निर्बल होती है. पक्षियों की दृश्य प्रणाली आमतौर पर अत्यधिक विकसित होती है.जल पक्षियों के खास लचीले लेंस उन्हें पानी और हवा, दोनों में देखने की शक्ति प्रदान करते हैं.[३८] कुछ प्रजातियों में दोहरी फोवी भी होती है. पक्षी टेट्राक्रोमेटिक होते हैं, उनकी आँखों में पराबैंगनी(यूवी) संवेदनशील, और साथ ही हरे, लाल और नीले कोन सेल होते हैं.[५६] यह उन्हें पराबैंगनी प्रकाश का अनुभव करने में सक्षम बनता है, जो प्रेमालाप में शामिल होता है. कई पक्षी पराबैंगनी में पक्षति विधि को दिखाते हैं जो मानवीय आंखों के लिए अदृश्य है; कुछ पक्षी जिनके लिंग नंगी आंखों से समान प्रतीत होते हैं, वे अपने पंख पर उपस्थित पराबैंगनी को प्रतिबिंबित करने वाले धब्बों द्वारा पहचाने जाते हैं. नरों के नीले स्तनों में पराबैंगनी को प्रतिबिंबित करने वाले धब्बे होते हैं जिन्हें प्रेमालाप के दौरान डब पंखों को उठाकर दिखाया जाता है.[५७] पराबैंगनी प्रकाश का उपयोग भोजन की तलाश के वक्त भी किया जाता है- छोटे बाज शिकार के लिए चूहों आदि द्वारा जमीन पर छोड़े गये यूवी प्रतिबिंबित मूत्र निशानों को खोजते हैं.[५८] पक्षियों में आंख झपकने के लिए पलकों का उपयोग नहीं किया जाता है. बल्कि निसिटेटिंग झिल्ली, एक तीसरी पलक जो आडे चलती है, द्वारा आँखों को चिकनाई प्रदान की जाती है.[५९] निसिटेटिंग झिल्ली आँखों को ढंकती भी है और कई जलीय पक्षियों में कॉन्टेक्ट लेंस की तरह काम करती है.[३८] पक्षियों के रेटिना में पेक्टेन नामक पंखे के आकार की एक रक्त आपूर्ति प्रणाली होती है.[३८] अधिकांश पक्षी अपनी आँखों को चला नहीं सकते हैं, हालाँकि ग्रेट जलकाग जैसे कुछ अपवाद भी हैं.[६०] सिर के कनारे पर आँखों वाले पक्षियों का दृश्य क्षेत्र विस्तृत होता है, जबकि उल्लू जैसे पक्षी जिनकी आंखें सामने की ओर होती हैं उनकी द्विनेत्री दृष्टि होती है और क्षेत्र की गहराई का वे अनुमान लगा सकते हैं.[६१] पक्षियों के कान में बाहरी पिने नहीं होते हैं लेकिन वे पंख से ढके होते हैं, हालाँकि एसियो , ब्युबो , और ओट्स उल्लू जैसे कुछ पक्षियों में ये पंख कान की आकृति जैसे लगते हैं.भीतरी कान में एक कोक्लीआ होता है, लेकिन यह स्तनधारियों की तरह सर्पिल नहीं होता है. [६२]


कुछ प्रजातियां शिकारियों के खिलाफ रासायनिक सुरक्षा का उपयोग करने में सक्षम होती हैं; कुछ प्रोसल्लारीफोर्मेस एक हमलावर के खिलाफ एक अप्रिय तेल को निकालते हैं,[६३] और न्यू गिनी के पिटोहुईस की कुछ प्रजातियों की त्वचा और पंखों में एक शक्तिशाली न्यूरोतौक्सिन होता है.[६४]


क्रोमोसोम

पक्षियों में दो लिंग होते हैं: नर और मादा.पक्षियों के लिंग का निर्धारण जेड और डब्ल्यू सेक्स क्रोमोसोम द्वारा किया जाता है, स्तनधारियों में मौजूद एक्स और वाई क्रोमोसोम की बजाय. नर पक्षियों में दो जेड क्रोमोसोम (ZZ) होते हैं, ओर मादा पक्षियों में एक डब्ल्यू क्रोमोसाम और एक जेड क्रोमोसाम (WZ) होता है. [३८]


पक्षियों की लगभग सभी प्रजातियों में लिंग का निर्धारण निषेचन पर होता है. हालांकि, हाल के एक अध्ययन में ऑस्ट्रेलियाई ब्रश-टर्की में तापमान पर निर्भर लिंग निर्धारण को प्रर्दशित किया गया है, अंडे सेने के दौरान उच्च तापमान के परिणाम स्वरूप मादाओं की संख्या ज्यादा हो जाती है. [६५]


===पंख, पक्षति और छिलके

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Searchtool.svg मुख्य लेख: Feather
अफ्रीकी स्कोप्स उल्लूका का पक्षति इसे अपने आसपास के साथ खो जाने की अनुमति देता है.


पंख पक्षियों का एक अद्वितीय गुण है. ये उड़ान की सुविधा प्रदान करते हैं, तापमान नियंत्रण में मदद करते हैं, तथा प्रदर्शन, छलावरण और संकेतन में इस्तेमाल होते हैं.[३८] पंखों के कई प्रकार होते हैं और सबका अपना महत्त्व होता है. पंख बाहरी त्वचा पर विकसित होते हैं और त्वचा के टेरिले नामक विशिष्ट स्थान पर ही उगते हैं. इन पंखों के विस्तार (टेरिलोसिस) के वितरण को वर्गीकरण और व्यवस्था में उपयोग किया जाता है. शरीर पर पंखों की व्यवस्था और उपस्थिति को पक्षति कहा जाता है, यह प्रजातियों के दरम्यान उम्र, सामाजिक स्थिति,[६६] और लिंग के अनुसार भिन्न हो सकते हैं.[६७]


पक्षति नियमित रूप से झड़ते हैं; पक्षियों के प्रजनन के बाद के पक्षति को "गैर-प्रजनन" पक्षति कहा जाता है, या- हम्फ्री-पार्क्स शब्दावली में- "बेसिक" पक्षति; प्रजनन पक्षति या इसके प्रकारों को हम्फ्री-पार्क्स प्रणाली में "वैकल्पिक" पक्षति कहा जाता है.[६८] अधिकांश प्रजातियों में यह झड़ना वार्षिक अंतराल पर होता है, हालाँकि कुछ में यह वर्ष में दो बार भी हो सकता है, और बड़े शिकारी पक्षियों में यह कुछ वर्षों में केवल एक बार ही होता है. झड़ने के तरीके प्रजातियों के हिसाब से भिन्न हो सकते हैं. पस्सेरिनेस में, उड़ान पंख एक एक करके झड़ते हैं, सबसे भीतर वाला सबसे पहले. जब पांचवां या छठा प्राथमिक पंख झाड़ता है तब बाह्यतम पंख गिरना शुरू होते हैं. अंतरतम पंखों के झड़ जाने के बाद, अंतरतम से शुरू करके द्वितीयक पंख गिरना शुरू करते हैं और इसी प्रकार यह बाहरी पंखो (सेंट्रीफ्यूगल मोल्ट)तक पहुंचता है. ग्रेटर प्राथमिक कोवर्ट्स अपने द्वारा ढके प्रथामिकों के संयोजन में झड़ते हैं[६९]. बतख और कलहंस जैसी प्रजातियाँ अपने सारे उडान पंखों को एक ही बार में गिरा देती हैं, अस्थायी रूप से उड़ने में असमर्थ हो जाती हैं.[७०] एक सामान्य नियम के रूप में, पूंछ के पंखों का झड़ना और बदला जाना सबसे अंदरूनी जोड़ों से शुरू होता है.[६९] हालाँकि फ़ासिअनिडे में पूंछ के पंखों का झड़ना केन्द्राभिमुखी होता है.[७१] कठफोडवोँ और ट्रीक्रीपर्स के पूंछ के पंखों में केन्द्रत्यागी झड़ना संशोधित रूप में होता है, अर्थात यह दूसरे सबसे अंदरूनी जोड़ों से शुरू करके केन्द्रीय जोड़े पर समाप्त होता है ताकि पक्षियों की चढाने वाली पूंछ की कार्यात्मकता बनी रहे.[६९][७२] पस्सेरिनेस में आमतौर पर प्राथमिक पंख बाहर की तरफ बदले जाते हैं, द्वितीयक अन्दर की तरफ, और पूंछ केंद्र से बाहर की तरफ.[७३] घोंसला बनाने से पहले, अधिकांश प्रजातियों की मादाओं में एक बेयर ब्रूड पैच आ जाता है, पेट के निकट पंखों के झड़ जाने से. वहां की त्वचा में रक्त कोशिकाओं की समुचित आपूर्ति बनी रहती है जो मादाओं को अंडे सेने में मदद करती है. [७४]

लाल लोरी प्रीनिंग

पंखों को रखरखाव की आवश्यकता होती है और पक्षी नियमित रूप से इनको तराशते और संवारते रहते हैं, औसतन दिन में लगभग 9% समय इस काम के लिए दिया जाता है.[७५] चोंच का उपयोग अवांछित कणों को चुनने और यूरोजियल ग्रंथि द्वारा मोम जैसे एक स्राव को लगाने के लिए किया जाता है; ये स्राव पंखों के लोच को बनाये रखते हैं और कीटाणु-रोधी एजेंट के रूप में काम करते हैं, पंखों को नुकसान पहुँचने वाले जीवाणुओं को दूर रखते हैं.[७६] चींटियों द्वारा स्रावित फोर्मिक एसिड का उपयोग इसके पूरक के रूप में किया जाता है, जिसे पक्षी एंटिंग नामक एक प्रक्रिया से प्राप्त करते हैं, पंखों के परजीवियों को दूर रखने के लिए.[७७]


पक्षी की त्वचा के छिलके उसी केरतिन के बने होते हैं जिससे चोंच, पंजे ऑर स्पुर्स बने होते हैं. वे मुख्य रूप से पैर की उंगलियों और प्रपादिका में पाए जाते हैं, पर कुछ पक्षियों में टखने के ऊपर भी पाए जा सकते हैं. अधिकाँश पक्षियों के छिलके एक के ऊपर एक चढ़े नहीं रहते हैं, किंगफिशर और कठफोड़वा को छोड़कर. पक्षियों के आवरण को सरीसृप और स्तनधारियों के समजातीय माना जाता है. [७८]


उड़ान

Searchtool.svg मुख्य लेख: Bird flight
रेस्टलेस फ्लाईकैचर इन दी दाउन्स्ट्रोक ऑफ़ फ्लैपिंग फ्लाईट

अधिकाँश पक्षी उड़ सकते हैं, यह गुण उन्हें अन्य सभी कशेरुकों से अलग करता है. उड़ान अधिकाँश पक्षी प्रजातियों के लिए आवागमन का प्राथमिक साधन है ऑर इसका उपयोग प्रजनन, भोजन, तथा शिकारी से बचने और भागने के लिए किया जाता है. पक्षियों में उड़ान हेतु विभिन्न विशेषताएं हैं जैसे कि, हल्का हड्डियों का ढांचा, दो बड़ी उड़ान मांसपेशियां, पेक्टोरलिस (जो पक्षियों के कुल वजन का 15% होता है), तथा सप्राकोराकोइडियस और संशोधित अग्र- अंग (पंख) जो एक एरोफोइल की तरह काम करते हैं. [३८] पक्षियों की उड़ान के प्रकार का निर्धारण उनके पंखों के आकार और प्रकार द्वारा होता है; कई पक्षी शक्तिशाली और जल्दी जल्दी पंख फड़-फ़्डाने वाली उड़ान के साथ ऊंचाई पर कम उर्जा खपत वाली उड़ान के मिश्रण का प्रयोग करते हैं. वर्तमान में लगभग 60 पक्षी प्रजातियाँ उड़ान क्षमता रहित हैं, जैसा कि कई विलुप्त पक्षी थे.[७९] उड़ान-रहितता अक्सर पक्षियों में एकाकी द्वीपों में पाई जाती है, संभवतः संसाधनों की कमी और शिकारियों की अनुपस्थिति के कारण.[८०] उड़ान-रहित होने के बावजूद पेंग्विन पानी में "उड़ने" के लिए समान शारीरिक क्रियाओं का प्रयोग करती हैं, बतख, शीयरवाटर और डिपर्स भी ऐसा ही करती हैं.[८१]


व्यवहार

अधिकांश पक्षी दिनचर हैं, लेकिन उल्लू और नाईटजार्स जैसी कई प्रजातियाँ निशाचर या सांध्यचर (संध्या समय सक्रिय होती हैं) होती हैं, और कई तटीय जल-पक्षी ज्वर-भाटे के समय भोजन करते हैं, चाहे दिन हो या रात. [८२]


आहार और भोजन

चोंच में दूध पिलाने का रूपांतर

पक्षियों के विविध आहारों में शामिल हैं पराग, फल, पौधे, बीज, सडा हुआ मांस, तथा चिड़ियों समेत कई अन्य छोटे जानवर.[३८] चूँकि पक्षियों के दांत नहीं होते, उनके पाचन तंत्र उस भोजन के अनुरूप हैं जिसे बिना चबाये हुए पूरा निगल लिया गया हो.


पक्षी जो भोजन प्राप्ति के लिए कई रणनीतियां अपनाते हैं या विभिन्न खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं उन्हें 'सामान्यज्ञ' कहा जाता है, जबकि अन्य जो विशिष्ट भोजन हेतु समय और प्रयास केन्द्रित करते हैं या भोजन प्राप्ति हेतु एक ही प्रकार की रणनीति का उपयोग करते हैं उन्हें 'विशेषज्ञ' कहा जाता है.[३८] पक्षियों की भोजन प्राप्ति रणनीतियां प्रजातियों के हिसाब से भिन्न होती हैं. कई पक्षी कीड़े, अकशेरुकी, फल, या बीजों को बटोरते हैं. कुछ एक शाखा से अचानक हमला करके कीड़ों का शिकार करते हैं. हमिंगबर्ड, सनबर्ड, लोरीज़ और लोरिकीट्स जैसे पराग सेवन करने वाले पक्षियों के पास खास तरह की जीभ होती है तथा कई पक्षियों की चोंच फूलों में फिट बैठने के हिसाब से निर्मित होती है.[८३] कीवी तथा तटपक्षी अपनी लम्बी चोंच से अकशेरुकियों को खोजते हैं; तटपक्षियों की विभिन्न लम्बाई वाली चोंच तथा भोजन के विशिष्ट तरीकों के परिणाम स्वरूप पारितंत्र में उनके स्थानों का बंटवारा हो गया है.[३८][८४] लूंस, गोताखोर बतख, पेंग्विन तथा औक पानी के अन्दर अपना शिकार खोजने के लिए अपने पंखों या पैरों का उपयोग करके तैरते हैं,[३०] जबकि सूलिड्स, किंगफिशर और ट्रंस जैसे जलीय शिकारी पक्षी हवा से सीधे अपने शिकार पर गोता लगते हैं. फ्लेमिंगो, प्रिओन की तीन प्रजातियां, और कुछ बतख फ़िल्टर फीडर हैं.[८५][८६]कलहंस और डैब्लिंग बतखें मुख्यतः चरती हैं.


फ़्रिगेट्बर्ड्स, समुद्री पक्षी, गुल्स [८७] और स्कुअस,[८८] क्लेप्टो-पैरसाइटिज़्म में संलग्न रहते हैं, अर्थात अन्य पक्षियों से अपना भोजन चुराते हैं. क्लेप्टो-पैरसाइटिज़्म को शिकार द्वारा प्राप्त भोजन का पूरक माना जाता है, किसी प्रजाति की खुराक का मुख्य हिस्सा नहीं; ग्रेट फ़्रिगेट्बर्ड्स द्वारा मास्क्ड बूबीज़ से भोजन छीने जाने पर किये गए एक अध्ययन के अनुसार फ़्रिगेट्बर्ड्स अपने भोजन का ज्यादा से ज्यादा 40% ही छीनती हैं और औसतन केवल 5% ही छीनती हैं.[८९] अन्य पक्षी मुर्दाखोर होते हैं; इनमें से कुछ, जैसे कि गिद्ध, सड़े हुए मांस को खाने के विशेषज्ञ हैं, जबकि अन्य (जैसे कि समुद्री पक्षी, कोर्विड्स या अन्य शिकारी पक्षी) अवसरवादी होते हैं. [९०]


जल और पीना

कई पक्षियों को पानी की आवश्यकता पड़ती है हालांकि उनका मलत्याग का तरीका और स्वेद ग्रंथियों की कमी, जल की शारीरिक मांग को घटा जरुर देती हैं.[९१] कुछ रेगिस्तानी पक्षी अपनी जल की आवश्यकता की पूर्ति अपने भोजन में मौजूद नमी द्वारा पूरा कर लेते हैं. वे अपने शरीर का तापमान बढ़ा कर वाष्पीकरण या जल्दी जल्दी साँस लेने से होने वाली नमी के नुकसान को बचा सकते हैं.[९२] समुद्री पक्षी समुद्री पानी पीते हैं और उनके सर में मौजूद नमक ग्रंथि अतिरिक्त नमक को नाक के रास्ते बाहर निकाल देती है.[९३]


अधिकांश पक्षी अपनी चोंच में पानी भर के अपने सर को ऊपर उठा लेते हैं ताकि पानी गले के रास्ते भीतर चला जाये. कबूतर, फिंच, माउस्बर्ड, बटन-बतख और बस्टर्ड परिवारों की कुछ प्रजातियाँ, खासकर शुष्क क्षेत्रों की, अपने सर को ऊपर उठाये बिना पानी को चूसने में सक्षम हैं.[९४] कुछ रेगिस्तानी पक्षी जल स्रोतों पर निर्भर होते हैं और सैन्ड्ग्राउज़ रोजाना जल-स्रोत के निकट एकत्र होने के लिए विशिष्ट तौर से जानी जाती हैं. घोंसला बनाने वाली सैन्ड्ग्राउज़ अपने पेट के पंखों को गीला करके अपने बच्चों को पानी पहुंचती हैं.[९५]


प्रवास

Searchtool.svg मुख्य लेख: Bird migration

कई पक्षी प्रजातियाँ वैश्विक मौसम के तापमान के अन्तर का लाभ उठाने के लिए प्रवास करती हैं, इस प्रकार भोजन स्रोतों और प्रजनन स्थानों की उपलब्धता को अनुकूलतम बनाने का प्रयास करती हैं. ये प्रवास विभिन्न समूहों में अलग हैं. कई सताहिपक्षी, तटपक्षी, और जल-पक्षी वार्षिक लम्बी दूरी का प्रवास करते हैं, सामान्यतः दिन की लंबाई और मौसम की स्थिति के अनुसार. ये पक्षी प्रजनन काल शीतोष्ण या आर्कटिक/अंटार्कटिक क्षेत्रों में और गैर-प्रजनन काल उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों या विपरीत गोलार्द्ध में व्यतीत करते हैं. प्रवास के पहले, पक्षी अपने शरीर की चर्बी और अन्य संसाधनों में भारी वृद्धि कर लेते हैं और अपने कुछ अंगों के आकार को घटा लेते हैं.[४९][९६] प्रवास में उर्जा की भारी खपत होती है, क्योंकि पक्षियों को बिना रुके रेगिस्तानों और समुद्रों को पार करना पड़ता है. जमीनी पक्षियों की उड़ान सीमा लगभग २,५०० कि.मी. (१,६०० मील) है और तट पक्षियों की ४,००० कि.मी. (२,५०० मील),[३८] हालाँकि बार-टेल्ड गौड्विट १०,२०० कि.मी. (६,३०० मील) तक बिना रुके उड़ने में सक्षम है.[९७] समुद्री पक्षी भी लंबे प्रवास करते हैं. सूटी शियर्वौटर्स का वार्षिक प्रवास सबसे लम्बा होता है, न्यूजीलैंड और चिली में वे अपना घोंसला बनाती हैं और उत्तरी ग्रीष्म काल को वे जापान, अलास्का और कैलिफोर्निया में भोजन करते हुए बिताती हैं, इस सालाना आवागमन की लम्बाई है ६४,००० कि.मी. (३९,८०० मील).[९८] अन्य जल पक्षी प्रजनन के बाद अलग हो जाते हैं, लम्बी दूरी की यात्रा करते हैं परन्तु कोई निश्चित मार्ग नहीं होता है. दक्षिणी महासागर में घोंसला बनने वाले अल्बत्रोस अक्सर प्रजनन कालों के बीच परिध्रुविय यात्रा करते हैं. [९९]

न्यूजीलैंड बार-पूंछ गोद्वित उपग्रह के मार्गों पर निशान लगाया हुआइन प्रजातियों के पास सबसे लंबे समय तक ज्ञात किसी प्रजाति का बिना रुके प्रवास है

कुछ पक्षी प्रजातियाँ लघु प्रवास करती हैं, ख़राब मौसम से बचने या भोजन प्राप्ति के लिए केवल उतनी दूरी तक जाती हैं जितना आवश्यक हो. उदीच्य चिड़िया जैसी हमलावर प्रजातियाँ एक ऐसी ही प्रजाति हैं, किसी स्थान पर फिन्चेज बहुतायत हो सकती है पर अगले साल वे वहां से गायब मिलेंगी. इस प्रकार का प्रवास सामान्यतः भोजन उपलब्धता के कारण होता है.[१००] प्रजातियाँ अपने दायरे के भीतर छोटी दूरी की यात्रा भी कर सकती हैं, ऊंचाई पर बसने वाली प्रजातियाँ कौन्स्पेसिफिक्स के मौजूदा दायरे में आ सकती हैं; कुछ अन्य प्रजातियाँ आंशिक प्रवास करती हैं, जहाँ आबादी का केवल कुछ हिस्सा ही प्रवास करता है, आमतौर पर मादाएं या अप्रधान नर.[१०१] कुछ क्षेत्रों में आंशिक प्रवास पक्षियों के प्रवास व्यवहार का एक बड़ा हिस्सा हो सकता है; ऑस्ट्रेलिया में एक सर्वेक्षण में पाया गया कि गैर-पैसेरीन पक्षियों का 44% और पैसेरीन पक्षियों का 32% आंशिक प्रवासी प्रवृत्ति का था.[१०२] ऊंचाई से प्रवास एक प्रकार का कम दूरी का प्रवास है जिसमें पक्षी प्रजनन काल को ऊंचाई पर बिताने के बाद नीचे आ जाते हैं. ऐसा अधिकांशतः तापमान परिवर्तन के कारण किया जाता है जब सामान्य क्षेत्रों में भोजन का आभाव हो जाता है.[१०३] कुछ प्रजातियाँ खानाबदोश हो सकती हैं, जिनका कोई निश्चित स्थान नहीं होता और भोजन उपलब्धता तथा मौसम के अनुसार एक जगह से दूसरी जगह प्रवास करती रहती हैं. तोता परिवार कुल मिलाकर न तो प्रवासी है और न ही एक निश्चित स्थान का, इन्हें निम्न में से कुछ भी कहा जा सकता है, हमलावर, विखराव वाला, खानाबदोश या लघु और अनियमित प्रवास करने वाला. [१०४]


लम्बी दूरी की यात्रा के बाद भी ठीक उसी स्थान पर लौट कर आने की पक्षियों की क्षमता का ज्ञान हमें काफी समय से है; 1950 के दशक में किये गये एक प्रयोग में, एक मैन्ग्ज़ शियर्वौटर जिसको बोस्टन में छोडा गया था वह स्कोमर, वेल्स स्थित अपनी कालोनी में ५,१५० कि.मी. (३,२०० मील) दूरी तय करके 13 दिन में वापिस आ गया.[१०५] प्रवास के दौरान पक्षी परिचालन के लिए कई विधियों का इस्तेमाल करते हैं. दिन के प्रवासियों के लिए, दिन में परिचालन के लिए सूर्य उपयोग किया जाता है और रात में एक तारकीय कम्पास का प्रयोग किया जाता है. जो पक्षी सूर्य का उपयोग करते हैं, दिन में सूर्य की बदलती स्थिति से पार पाने के लिए एक आतंरिक घड़ी का प्रयोग करते हैं.[३८] तारकीय कम्पास के साथ उन्मुखता निर्भर करती है पोलारिस के इर्दगिर्द के तारा समूहों की स्थिति पर. [१०६] कुछ प्रजातियों में अपने विशिष्ट फोटो-रिसेप्टर्स द्वारा पृथ्वी के भू-चुम्बकत्व को महसूस करने की क्षमता होती है.[१०७]


संचार

सन्बिटर्न द्वारा बड़े शिकारी की नकल का चौंकाने वाला प्रदर्शन

पक्षी मुख्य रूप से दृश्य और श्रवण संकेतों का उपयोग करके संवाद करते हैं. सिग्नल इंटर-स्पेसिफिफ (विभिन्न प्रजातियों के बीच) और इंट्रा-स्पेसिफिक (अपनी ही प्रजाति के भीतर) हो सकते हैं.


पक्षी कभी कभी पक्षति का उपयोग सामाजिक वर्चस्व और मूल्यांकन के लिए करते हैं,[१०८] यौन चयनित प्रजातियों में प्रजनन स्थिति प्रदर्शित करने के लिए या भय पैदा करने के लिए,[१०९] जैसा कि सनबितर्न अपने बच्चों की बाज से रक्षा करने के लिए किसी बड़े परभक्षी की आवाज की नकल बनाकर करता है. पक्षियों के बीच दृश्य संचार में खास किस्म की हरकतें शामिल हो सकती हैं, जिन्हें गैर-सांकेतिक हरकतों से विकसित किया गया है, जैसे कि सजावट , पंखो को व्यवस्थित करना, चोंच लड़ना या अन्य व्यवहार. ये प्रदर्शन आक्रमण या समर्पण दिखा सकते हैं, या जोड़ा बनाने में योगदान दे सकते हैं.[३८] सबसे सुन्दर प्रदर्शन दिखता है प्रेमालाप के दौरान, जहाँ विविध प्रकार की मुद्राओं और अंगों के संयोजन से "नृत्य" प्रदर्शन किया जाता है;[११०] नर की जोड़ा बनाने की क्षमता इसी प्रदर्शन पर निर्भर कर सकती है. [१११]


[[File:Troglodytes aedon.oggIMAGE_OPTIONSCall of the , a common North American songbird पक्षियों की ध्वनी और संगीत जो सिरिन्ग्ज़ में उत्पन्न होती है, पक्षियों द्वारा ध्वनी संचार के प्रमुख साधन हैं. यह संचार बहुत जटिल हो सकता है, कुछ प्रजातियां इस सिरिन्ग्ज़ के दो पक्षों को स्वतंत्र रूप से संचालित कर सकती हैं, जिसकी वजह से दो ध्वनियां एक साथ निकाल सकती हैं.[५१] ध्वनि का विभिन्न उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जाता है,[३८] साथी के आकर्षण, संभावित जोड़े का मूल्यांकन,[११२] जोड़ा बनाना, अधिकार क्षेत्र पर दावा करना और बचाना,[३८] पहचान करना (जब माता=पिता कालोनी में अपने बच्चों को खोजते हैं या प्रजनन काल के आरंभ में जब साथी मिलते हैं [११३]), अन्य साथियों को शिकारियों की चेतावनी देना, कभी कभार खतरे की विशिष्ट जानकारी के साथ चेतावनी.[११४] कुछ पक्षी संचार के लिए यांत्रिक ध्वनी का प्रयोग भी करते हैं. न्यूजीलैंड की कोनोकोरिफा स्निप्स अपने पंखो से हवा को गुजरवा कर ध्वनी पैदा करती है,[११५] काठफोरवा अपने क्षेत्र में ठक ठक करता है [४८] और पाम कौकेटू ध्वनी करने के लिए औजारों का उपयोग करती है. [११६]


एकत्र होना

लाल चोंच वाली कुएलेअस, चिड़िया का सबसे अनेक प्रजातियों [296] विशाल भेड़ फार्म-कभी दसियों हज़ारों मजबूत.

जबकि कुछ पक्षी अनिवार्य रूप से क्षेत्रीय हैं या लघु परिवार के समूह में रहते हैं, अन्य पक्षी बड़े समूह बना सकते हैं. एकत्र होने का प्रमुख लाभ है संख्याओ में सुरक्षा और भोजन की खोज में अधिक सहूलियत.[३८] जंगल जैसे बंद स्थानों पर शिकारियों के खिलाफ सुरक्षा काफी महत्त्वपूर्ण हो जाती है, जहाँ घात लगाकर हमला करना एक आम बात है इसलिए कई आंखें पूर्व चेतावनी प्रणाली के रूप में काम कर सकती हैं. इसकी वजह से कई मिश्रित-प्रजाति वाले समूहों का निर्माण हो जाता है, जिनमें आमतौर पर कई प्रजातियों की छोटी छोटी संख्याएँ शामिल होती हैं; ये संग्रह संख्यात्मक सुरक्षा तो प्रदान करते हैं पर साथ ही संसाधनों पर अधिकार हेतु प्रतियोगिता की संभावना को भी घटा देते हैं. [११७] इसके दुष्परिणामों में शामिल हैं, ज्यादा शक्तिशाली पक्षियों द्वारा कमजोरों पर अत्याचार तथा कुछ मामलों में भोजन संबंधी दक्षता में कमी आना. [११८]


पक्षी कभी कभी गैर-पक्षी प्रजातियों के साथ भी संगठन बनाते हैं. गोताखोर समुद्री पक्षी डॉल्फिन और ट्यूना के साथ रहते हैं, जो शोलिंग मछली को सतह की तरफ धकेलती हैं.[११९] हौर्नबिल, बौने मौन्गूज़ का पारस्परिक सम्बन्ध रहता हैं तथा साथ ही दाना खोजती हैं और एक दूसरे को शिकारियों के प्रति सावधान भी करती हैं. [१२०]


आराम और बसेरा

कई पक्षी, यह अमेरिकी फ्लेमिंगो, जैसे उनके वापस में जब सो उनके सिर टक


दिन के सक्रिय हिस्सों में पक्षियों की उच्च चयापचय दर के पूरक के रूप में अन्य समय में वे आराम करते हैं. पक्षी सोते वक्त भी बहुत सतर्क रहते हैं, बीच बीच में आंखें खोल कर 'झांकते' रहते हैं ताकि जरा भी गड़बडी या खतरा महसूस हो तो वे भाग सकें.[१२१] ऐसा माना जाता है कि स्विफ्ट पक्षी उड़ते समय भी सोने में सक्षम हैं और राडार से यह पता चला है कि वे हवा के रुख के साथ स्वयं को मोड़ लेते हैं.[१२२] ऐसा सुझाव दिया गया है कि निद्रा के कुछ प्रकार हैं जो उड़ान के समय भी संभव हैं.[१२३] कुछ पक्षियों में मद्धम-तरंग निद्रा देखी गयी है, जहाँ एक बार में दिमाग का एक हिस्सा ही सोता है. पक्षी अपनी इस क्षमता का उपयोग झुंड में अपनी स्थिति के हिसाब से करते हैं. इस प्रकार उनके सोते हुए हिस्से के दूसरी तरफ वाली आंख आने वाले शिकारियों या अन्य खतरों पर नजर रख सकती है. यह विशिष्टता समुद्री स्तनपाइयों में भी देखी जाता है. [१२४] सामुदायिक बसेरा आम है क्योंकि यह शारीरिक गर्मी के नुकसान तथा शिकारियों संबंधी खतरों को कम करता है.[१२५] आराम करने के अड्डों का सुरक्षा और तापमान-नियंत्रण के मद्देनजर चयन किया जाता है. [१२६]


कई पक्षी सोते समय अपने सर को अपने पीछे मोड़ लेते हैं और चोंच को पीछे के पंखों में दबा लेते हैं, हालांकि अन्य अपनी चोंच को अपने सीने के पंख के बीच में रखते हैं. कई पक्षी एक पैर पर आराम करते हैं, जबकि कुछ अपने पैरों को अपने पंखों में खींच लेते हैं, खासकर सर्दियों में. पर्चिंग पक्षियों में एक टेंडन लॉकिंग प्रणाली होती है जो उनको सोते समय लट्ठे को पकडे रहने में सहायता करती है. कई सतही पक्षी जैसे बटेर और महोख वृक्षों में बसेरा बनाते हैं. लोरिकुलुस परिवार के कुछ तोते उल्टे लटक कर आराम करते हैं.[१२७] कुछ हमिंगबर्ड रात्रि में अकर्मण्यता की स्थिति में चली जाती हैं जहाँ उनकी चयापचय दर में कमी आ जाती है.[१२८] लगभग सौ अन्य प्रजातियों द्वारा यह शारीरिक अनुकूलन दर्शाया जाता है, जिनमें शामिल हैं, ओव्लेट-नाइट्जर्स, नाइत्जार्स, और वूड्स्वैलो. कॉमन पूअर्विल नामक एक प्रजाति तो शीत-निद्रा की स्थिति तक पहुँच जाती है.[१२९] पक्षियों में स्वेद ग्रंथियां नहीं होती हैं, लेकिन वे स्वयं को ठंढा करने के लिए छाया में जा सकते हैं, पानी में खड़े हो सकते हैं, जोर जोर से सांस ले सकते हैं, अपने आकार को फैला सकते हैं, अपने गले के पास पंख फ़डफ़डा सकते हैं या यूरोहाइड्रोसिस जैसे विशिष्ट व्यवहार का उपयोग कर सकते हैं.


प्रजनन

सामाजिक प्रणालियाँ

लाल गर्दन वाला फलारोपे के पास एक असामान्य पोल्यान्द्रोउस सम्भोग विधि है जहाँ नर अंडो और बच्चों और चमकीले रंग की मादाओं को नर के साथ सक्षम होने के लिए देखभाल कर सकते है

पंचानबे प्रतिशत पक्षी प्रजातियाँ सामाजिक रूप से एक पत्नीक हैं. ये प्रजातियाँ कम से कम प्रजनन काल ख़तम होने तक तो जोड़ा बना के रखती ही हैं, या, कुछ मामलों में, कई वर्षों तक अथवा किसी एक साथी की मृत्यु तक.[१३०] एक पत्नीकता, माता-पिता दोनों द्वारा देखभाल की अनुमति देता है, यह खासकर उन प्रजातियों में ज्यादा महत्त्वपूर्ण है जहाँ मादाओं को सफल शिशु-पालन हेतु नरों की सहायता की आवश्यकता होती है.[१३१] सामाजिक रूप से एक पत्नीक कई प्रजातियों में अपने साथी के आलावा भी सहवास (बेवफाई) करना आम बात है.[१३२] यह आमतौर पर प्रधान नरों और उन मादाओं के बीच देखा जाता है जिनका जोड़ा अप्रधान नरों के साथ है, लेकिन बतखों और एनातिड्स में यह जबरदस्ती भी किया जा सकता है.[१३३] मादाओं के लिए, इसके लाभों में शामिल हैं, अपने बच्चों के लिए बेहतर जींस मिलने की संभावना और अपने साथी की संभव इन्फेर्तिलिटी के खिलाफ सुरक्षा.[१३४] जोड़े के बाहर सहवास करने वाली प्रजातियों के नर अपने साथियों पर कड़ी नजर रखते हैं, अपने होने वाले बच्चों के पितृत्व को सुनिश्चित करने के लिए. [१३५]


अन्य सहवास प्रणालियाँ, जैसे कि बहुपत्नी, बहुपति, बहु विवाह, व्यभिचार, भी पाई जाती हैं.[३८] बहु विवाह प्रथा तब उत्पन्न होती है जब मादाएं अपने नरों के बिना ही बच्चों को पालने में सक्षम होती हैं.[३८] कुछ प्रजातियाँ परिस्थिति के अनुसार एक से ज्यादा प्रणाली का उपयोग कर सकती हैं.


प्रजनन में आमतौर पर प्रेमालाप प्रदर्शन किसी न किसी रूप में शामिल अवश्य रहता है, आमतौर पर नरों द्वारा.[१३६] अधिकांश प्रदर्शन साधारण होते हैं जिनमें किसी न किसी प्रकार का गायन शामिल होता है. हालाँकि कुछ प्रदर्शन काफी विस्तृत होते हैं. प्रजातियों पर निर्भर, इनमे पंख या पूँछ से ढोल बजाना, नाच, हवाई उड़ान या चाटना शामिल हो सकता है. साथी का चुनाव आमतौर पर मादाओं द्वारा किया जाता है,[१३७] हालाँकि बहुपतित्व फालारोप्स में इसका उल्टा होता है: साधारण नर चमकदार मादाओं को चुनते हैं.[१३८] प्रेमालाप भोजन, चोंच लड़ाना और एक दूसरे की सफाई करना आमतौर से साथियों के बीच किया जाता है, सामान्यतः जोड़ा बनाने और सहवास के बाद.[४८]


क्षेत्र, घोंसले और अंडे सेना

इन्हें भी देखें: Bird nest
यूरेशियन ब्लैक का घोंसला

कई पक्षी प्रजनन काल के दौरान समान प्रजाति से सक्रीयता पूर्वक क्षेत्र की रक्षा करते हैं; क्षेत्र पर आधिपत्य द्वारा वे अपने बच्चों के लिए भोजन स्रोत की रक्षा करते हैं. समुद्री पक्षी और स्विफ्ट जैसी कुछ प्रजातियाँ जो भोजन के क्षेत्रों की रक्षा करने में असमर्थ हैं, प्रायः कौलोनीज़ में प्रजनन करती हैं; संभवतः यह शिकारियों से सुरक्षा प्रदान करता है. कालोनी में प्रजनन करने वाले घोंसले बनाने के छोटे स्थानों की रक्षा करते हैं और इसके लिए प्रतियोगिता बहुत तीव्र हो सकती है, अपनी ही प्रजाति के भीतर के सदस्यों में या बाहरी प्रजाति के सदस्यों से. [१३९]


सभी पक्षी उल्बीय अंडे देते हैं जिनके कवच कड़े और अधिकतर कैल्शियम कार्बोनेट के बने होते हैं.[३८] गड्ढों और बिलों में घोंसले बनाने वाली प्रजातियाँ सफेद या पीले अंडे देती हैं जबकि खुले में घोंसला बनाने वाले छाद्मावरण अंडे देती हैं. हालाँकि, इस पद्धति के कई अपवाद हैं; सतह पर घोंसला बनाने वाले नाइट्जार्स पीले अंडे देते हैं और छलावरण उनके पक्षति द्वारा प्रदान किया जाता है. प्रजातियाँ जो शिशु-परजीवियों का शिकार हैं उनके अण्डों के विविध रंग होते हैं, एक परजीवी के अण्डों की बेहतर पहचान हेतु, इसकी वजह से मादा परजीवियों को उसी रंग के अंडे देने के लिए बाध्य होना पड़ता है. [१४०]


समाजयोग्य वीवरके घोंसलों के उपनिवेश पक्षी निर्मित संरचनाओंमें सबसे बड़े होते हैं

पक्षियों के अंडे आमतौर पर घोंसले में दिए जाता हैं. अधिकांश प्रजातियों के घोंसले काफी व्यवस्थित होते हैं, इनके आकार कप,गुम्बदनुमा, चपटे, गद्देदार, टीलेदार या बिलों में हो सकते हैं. [१४१] हालाँकि कुछ पक्षियों के घोंसले काफी प्राचीन शैली के होते हैं; उदाहरण के लिए ऐल्बेट्रोस के घोंसले जमीन पर एक छिलके से ज्यादा कुछ नहीं होते. अधिकाँश पक्षी लूटमार से बचाने के लिए घोंसलों को छुपे स्थानों पर बनाते हैं, लेकिन बड़े या कॉलोनियां में रहने वाले पक्षी- जो रक्षा करने में अधिक सक्षम हैं- अधिक खुले घोंसले बना सकते हैं. घोंसला निर्माण के दौरान, कुछ प्रजातियाँ ऐसे पौधों से सामग्री जुटाती हैं जिनके परजीवी-रोधी गुण उनके बच्चों को अधिक सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं,[१४२] और तापमान नियंत्रण के लिए अक्सर पंखों का उपयोग किया जाता है.[१४१] कुछ प्रजातियों के घोंसले होते ही नहीं हैं; चोटी पर घोंसला बनाने वाला सामान्य गिलेमोट पत्थरों पर अपने अंडे देता है, जबकि नर सम्राट प्रजाति की पेंगुइने अण्डों को अपने पैरों और शरीर के बीच दबाकर रखती हैं. घोंसलों की अनुपस्थिति विशेष रूप से सतही- घोंसलों की प्रजातियों में पाया जाता है, जहाँ नवजात जन्म के समय ही परिपक्व होते हैं.


ऊष्मायन, शिशुओं के विकास हेतु तापमान नियंत्रण, आमतौर पर अंतिम अंडा देने के बाद शुरू किया जाता है.[३८] एक पत्नी प्रजातियों में ऊष्मायन अक्सर बारी बारी से किया जाता है, जबकि बहुपत्नी प्रजातियों में कोई एक ऊष्मायन के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार होता है. माता पिता से अंडे को गर्मी ब्रूड पैच के माध्यम से पहुंचाई जाती है, पक्षियों के उदर या सीने पर नग्न त्वचा का एक स्थान. ऊष्मायन में उर्जा की खपत बहुत अधिक हो सकती है; उदाहरण के लिए, वयस्क ऐल्बेट्रोस ऊष्मायन के दौरान प्रति दिन साँचा:Convert/g तक वजन खो सकते हैं.[१४३] मेगापोड्स में ऊष्मायन हेतु गर्मी सूर्य, सड़ते हुए वनस्पति और ज्वालामुखीय स्रोतों से प्राप्त की जाती है.[१४४] ऊष्मायन अवधि १० दिन (कठफोड़वा, कुक्कू और पैसेरीन पक्षियों में) से लेकर 80 दिनों (ऐल्बेट्रोस और कीवी में) तक की हो सकती है. [३८]


माता पिता की देखभाल और उड़ने के योग्य बनाना

बारिश से एक कनाडा गुसे आश्रयों गोस्लिंग्स , जैसा कि वे पानी का विकास नहीं होगा, उनके पंखों के प्रूफिंग जब तक वे कलियाना.


अंडे सेने के समय, बच्चे प्रजाति के आधार पर असहाय से लेकर स्वतंत्र रूप से विकसित तक हो सकते हैं. असहाय बच्चों को ऐल्ट्रीशियल कहा जाता है, और जन्म के समय वे आमतौर पर छोटे, अंधे, चलने फिरने में अक्षम और नग्न होते हैं; जन्म के समय जो शिशु चलने फिरने में सक्षम और पंखदार होते हैं उन्हें परिपक्व (प्रिकौशियल) कहा जाता है. ऐल्ट्रीशियल शिशुओं को तापमान नियंत्रण की आवश्यकता पड़ती है, इसलिए उनका प्रिकौशियल शिशुओं की अपेक्षा ज्यादा लम्बी अवधि तक पालन पोषण किया जाता है. जो शिशु इन दोनों अतियों में से किसी में नहीं आते वे अर्ध-प्रिकौशियल या अर्ध-ऐल्ट्रीशियल हो सकते हैं.


माता पिता की देखभाल की प्रकृति और अवधि विभिन्न प्रजातियों में काफी भिन्न हो सकती है. एक छोर पर, मेगापोड्स में माता-पिता की जिम्मेदारी जन्म के साथ ख़तम हो जाती है; नवजात शिशु घोंसले से स्वतः ही बाहर आता है और बिना माता पिता की सहायता के अपना भोजन खुद ही तलाश करने में सक्षम होता है. [१४५] दूसरे छोर पर, कई समुद्री पक्षी लम्बी अवधि तक शिशुओं की देखभाल करते हैं, जिसमें ग्रेट फ़्रिगेट्बर्ड के शिशु पंखदार होने में छह माह तक का समय ले सकते हैं और माता-पिता द्वारा इसके बाद भी 14 महीनों तक उनको भोजन प्रदान किया जाता है.[१४६]

ग्रेट ब्लू हेरों माता=पिता अपने बच्चों के साथ घोंसले में

कुछ प्रजातियों में, माता-पिता दोनों बच्चों की देखभाल करते हैं; अन्य में यह जिम्मेदारी केवल एक की होती है. कुछ प्रजातियों में, उसी प्रजाति के अन्य सदस्य- आमतौर पर उनके नजदीकी रिश्तेदार- शिशुओं के पालन-पोषण में मदद करते हैं.[१४७] इस प्रकार का अभिभावकत्व कोर्विदा प्रजाति में काफी आम है, जैसे कि कौवा, आस्ट्रेलियन मैगपाई और फेरी-रेन में,[१४८] लेकिन यह राइफलमैन और रेड काईट जैसी सर्वदा भिन्न प्रजातियों में भी देखा जाता है जानवरों के अधिकांश समूहों में, नर पैतृक देखभाल काफी दुर्लभ है. हालाँकि पक्षियों में यह काफी आम है- किसी भी अन्य कशेरुक श्रेणी से कहीं अधिक.[३८] हालाँकि क्षेत्र और घोंसले की सुरक्षा, ऊष्मायन और शिशुओं को भोजन कराना आमतौर पर साझा जिम्मेदारी होती है, कभी कभी श्रम विभाजन भी देखने में आता है, जहाँ एक साथी किसी विशेष कर्तव्य के पूरे या अधिकांश हिस्से के लिए पूर्णतया जिम्मेदार होता है.[१४९]


शिशुओं के पंखदार होने की अवधि में भारी अंतर देखने को मिलता है. स्य्न्थ्लिबोराम्फुस मुर्रेलेट्स प्रजाति के नवजात, जैसे कि प्राचीन मुर्रेलेट, अंडे से निकलने के अगले ही दिन घोंसला छोड़ देते हैं और अपने माता-पिता के साथ समुद्र की तरफ चले जाते हैं, जहाँ स्थलीय शिकारियों से दूर उनका पालन-पोषण किया जाता है.[१५०] बतखों जैसी कुछ अन्य प्रजातियाँ, अपने शिशुओं को काफी छोटे में ही घोंसले से बाहर कर देती हैं. अधिकांश प्रजातियों में, बच्चे उड़ने में सक्षम होने के ठीक पहले या ठीक बाद में घोंसला छोड़ देते हैं. उड़ने में सक्षम होने बाद देखभाल की मात्रा भिन्न भिन्न होती है; ऐल्बेट्रोस के शिशु स्वयं ही घोंसला छोड़ देते हैं और आगे उन्हें कोई सहायता नहीं मिलती, जबकि अन्य प्रजातियों में इसके बाद भी थोड़ा बहुत भोजन प्रदान किया जाना जारी रहता है.[१५१] अपने प्रथम प्रवास के दौरान शिशु भी माता-पिता के साथ जा सकते हैं.[१५२]


शिशुओं के परजीवी

Searchtool.svg मुख्य लेख: Brood parasite
रीड वार्ब्लेर एक आम कोयल स्थापना, एक बच्चे परजीवी.

शिशु परजीवीतता , जहाँ कोई मादा अपने अण्डों को किसी और के अण्डों के साथ रख देती है, किसी भी अन्य जीव प्रजाति की तुलना में यह पक्षियों में सबसे अधिकता से पाया जाता है.[१५३] एक बार किसी परजीवी पक्षी नें अपने अंडे किसी और पक्षी के घोंसले में रख दिए, मेजबान मादा उनको अपना समझ कर सेती हैं, अक्सर अपने स्वयं के अण्डों की कीमत पर. शिशु परजीवी या तो ओब्लिगेट शिशु परजीवी हो सकते हैं- जो स्वयं सक्षम न होने की वजह से अपने अण्डों को दूसरों के घोंसलों में देते हैं- या नॉन-ओब्लिगेट शिशु परजीवी हो सकते हैं- जो कभी कभार अपने अण्डों को कौन्स्पेसिफिक्स के घोंसलों में देते हैं ताकि अपनी प्रजनन संख्यात्मकता को बढ़ाया जा सके, यद्यपि वे स्वयं अपने अण्डों को सेने में सक्षम हैं.[१५४] एक सौ पक्षी प्रजातियाँ ओब्लिगेट परजीवी हैं, जिनमें शामिल हैं, हनीगाइड, इक्टेरिड्स, एस्ट्रिल्डिड फिंच और बतख, हालाँकि इनमें सबसे प्रसिद्द कुक्कू है.[१५३] कुछ शिशु परजीवी दूसरों के घोंसलों में अंडे देने में भी सक्षम हैं, इस तरह वे मेजबानों को बाहर भगा कर उनके अण्डों या शिशुओं को मार भी देते हैं; ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किये जाता है कि घोंसले में आने वाला सारा भोजन परजीवी के शिशुओं को ही प्राप्त हो. [१५५]


पारिस्थितिकी

दक्षिण ध्रुवीय स्कुआ (शेष) एक गेनेरालिस्ट शिकारी, अन्य पक्षी, मछली, सड़ा और अन्य जानवरों के अंडे ले रहा है. इस स्कुआ एक पुश करने का प्रयास है अदेलिए पेंगुइन अपनी घोंसला दूर (सही)

पारिस्थितिक तंत्र में पक्षियों के विविध स्थान हैं.[१५६] जहाँ कुछ पक्षी सामान्यग्य हैं, अन्य अपने निवास क्षेत्र और भोजन आवश्यकताओं में उच्च दर्जे के विशेषज्ञ हैं. जंगल जैसे साझा निवास स्थान में भी, पक्षियों की भिन्न प्रजातियों की स्थितियों में विविधता पाई जाती है, कुछ प्रजातियाँ जंगल की छतरी पर भोजन प्राप्त करती हैं, कुछ छतरी के नीचे और, और अन्य कुछ जंगल की सतह पर. जंगली पक्षी कीट-भक्षक, फल-भक्षक और पराग-भक्षक (फूलों का पराग) हो सकते हैं. जलीय पक्षी आम तौर पर मछलियों या पौधों को खाते हैं, या चोरी करके अथवा परजीवी होते हैं. शिकारी पक्षी स्तनधारी या अन्य पक्षियों का शिकार करने में माहिर होते हैं, जबकि गिद्ध मांस-भक्षी होते हैं.


कुछ पराग-भक्षी पक्षी महत्त्वपूर्ण पौलिनेटर होते हैं, और कई फल-भक्षी बीजों के वितरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.[१५७] पौधों और पौलिनेटिंग पक्षियों का अक्सर सह-विकास होता है,[१५८] और कुछ मामलों में एक पुष्प का प्राथमिक पौलिनेटर एकमात्र वही प्रजाति होती है जो उसके पराग तक पहुँच सकती है.[१५९]


पक्षी अक्सर द्वीप पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण होते हैं. पक्षी अक्सर उन द्वीपों तक पहुँच जाते हैं जहाँ स्तनधारियों की पहुँच नहीं है; ऐसे द्वीपों पर पक्षी वह भूमिका निभा सकते हैं जिसे आमतौर पर बड़े जानवरों द्वारा निभाया जाता है. उदाहरण के लिए, न्यूज़ीलैंड में मोआ महत्त्वपूर्ण ब्राउजर थे, जैसा कि वर्तमान में केरेरू और कोकाको हैं.[१५७] आज भी न्यूज़ीलैंड के पौधों में वे सुरक्षात्मक अनुरुपतायें सुरक्षित हैं जिनका विकास विलुप्त हो चुके मोआ से स्वयं को बचाने के लिए उन पौधों ने किया था.[१६०] घोंसला बनाने वाले समुद्री पक्षी भी द्वीपों और आसपास के क्षेत्रों के पारिस्थितिक तन्त्र पर प्रभाव डाल सकते हैं, मुख्यतः खाद की बड़ी मात्रा के द्वारा, जो स्थानीय मिटटी [१६१] और आसपास के समुद्र को पोषण प्रदान कर सकती है. [१६२]


एवियन पारिस्थितिकी की शोध के लिए एवियन पारिस्थितिकी की कई पद्धतियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें शामिल हैं, गिनती, घोंसला निरीक्षण, पकड़ना और चिन्हित करना.


मनुष्यों के साथ रिश्ता

मुर्गियों की औद्योगिक खेती.


चूँकि पक्षी बहुत आम और आसानी से दिखने वाले पशु हैं, मनुष्यों से उनका रिश्ता अति प्राचीन है.[१६३] यदा कदा यह रिश्ता परस्पर होता है, जैसे कि हनीगाइड्स और अफ्रीका के बोरना लोगों द्वारा संयुक्त रूप से शहद एकत्र करना.[१६४] इसके आलावा यह रिश्ता सहभोजी का भी हो सकता है, उदाहरण के लिए,घरेलु गौरैया [१६५] जैसी प्रजातियों को मानव गतिविधियों नें लाभान्वित किया है. कई पक्षी प्रजातियाँ कृषि कीटनाशक के रूप में व्यवसायिक रूप से महत्त्वपूर्ण हो गयी हैं,[१६६] और कुछ विमानन के लिए जोखिम उत्पन्न करती हैं.[१६७] मानव गतिविधियाँ हानिकारक भी हो सकती हैं और इनकी वजह से कई पक्षी प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर पहुँच गयी हैं.


सिटकोसिस, सैल्मोनेलोसिस, कैम्पिलोबैक्टीरिओसिस, माइकोबैक्टीरिओसिस (पक्षियों का टीबी), एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू), गिआर्डिअसिस, और क्रिप्टोस्पोरिडिओसिस - इन बीमारियों के लिए पक्षी रोग प्रसार के एजेंटों के रूप में काम कर सकते हैं. इनमें से कुछ जूनोटिक रोग भी हैं जो मनुष्य को भी प्रेषित किये जा सकते हैं. [१६८]


आर्थिक महत्व

मांस और अण्डों के पाले गये पक्षी, जिसे मुर्गी पालन (पॉल्ट्री) कहा जाता है, मनुष्यों द्वारा भक्षित पशु प्रोटीन के सबसे बडे स्रोत हैं; 2003 में, दुनिया भर में 760 लाख टन पॉल्ट्री और 610 लाख टन अण्डों का उत्पादन किया गया था.[१६९] मनुष्यों द्वारा मुर्गों का भक्षण भारी मात्रा में किया जाता है, हालाँकि टर्की, बतख और गीज़ भी अपेक्षाकृत काफी आम हैं. पक्षियों की कई प्रजातियों का मांस के लिए भी शिकार किया जाता हैं. पक्षियों का शिकार मुख्यतः एक मनोरंजक गतिविधि है, अत्यंत अविकसित क्षेत्रों के सिवाय. उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में वाटरफाउल का शिकार सबसे अधिक किया जाता है; व्यापक रूप से शिकार किये जाने वाले अन्य पक्षियों में शामिल हैं फीसैन्ट्स, जंगली टर्की, बटेर, कबूतर, तीतर, ग्राउज़, स्नाइप, और वुडकॉक.[१७०] ऑस्ट्रेलिया और न्यू ज़ीलैंड में मटनबर्डिंग भी काफी प्रचलित है.[१७१] हालाँकि, मटनबर्ड जैसे कुछ पक्षियों के शिकार स्थायी हो सकते हैं, शिकार की वजह से दर्जनों प्रजातियाँ या तो विलुप्त हो चुकी हैं या खतरे में हैं. [१७२]


एशियाई मछुआरों द्वारा कोर्मोरंट्स का उपयोग सीधे गिरावट में है पर जीवित कुछ इलाकों में पर्यटक आकर्षण हैं

पक्षियों से प्राप्त अन्य व्यावसायिक रूप से मूल्यवान उत्पादों में शामिल हैं पंख (खासकर कलहंस और बतख के निचले हिस्से), जिनका उपयोग गर्मी प्रदान करने के लिए कपडों या गद्दों में किया जाता है, और समुद्री पक्षियों का मल (खाद के रूप में), जो फास्फोरस और नाइट्रोजन का एक बहुमूल्य स्रोत है. प्रशांत का युद्ध, जिसे खाद युद्ध भी कहा जाता है, खाद के भंडारों पर नियंत्रण हेतु लड़ा गया था. [१७३]


पक्षियों को मानव द्वारा दोनों, पालतू और व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए पालतू बनाया जाता है. तोता और मैना जैसी कुछ रंगबिरंगी पक्षी प्रजातियों को पालतू बनाया जाता है और पिंजडों में कैद करके भोजन दिया जाता है, एक पुरानी प्रथा जिसकी वजह से लुप्तप्राय प्रजातियों की अवैध तस्करी को बढ़ावा मिलता है.[१७४] बाज और कौर्मोरैन्ट्स को लम्बे समय से क्रमशः शिकार और मछली पकड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. दूत कबूतर, जिनका इस्तेमाल कम से कम १ ई. से होता चला आ रहा है, द्वितीय विश्व युद्ध तक इनकी महत्ता बनी हुई थी. वर्तमान में ये गतिविधियाँ या तो शौकिया (मनोरंजन और यात्रा),[१७५] या खेल (कबूतरों की दौड़) के रूप में ही प्रचलित हैं.


एमेच्योर पक्षी उत्साहियों (जिन्हें बर्डवॉचर, ट्विचार या आमतौर पर बर्डर कहा जाता है) की संख्या लाखों में है.[१७६] कई लोग अपने घरों में पक्षियों के दाने पानी के स्थानों को बना कर रखते हैं, विभिन्न प्रजातियों को आकर्षित करने के लिए. पक्षियों का भोजन करोड़ों डॉलर का एक व्यवसाय बन चुका है; उदाहरण के लिए, एक अनुमान के अनुसार ब्रिटेन में लगभग 75% लोग सर्दियों के दौरान पक्षियों के लिए भोजन उपलब्ध कराते हैं. [१७७]


धर्म, लोकगीत और संस्कृति

"यह 3 पक्षी की" मास्टर के द्वारा कार्ड बजाना, 16 वीं सदी जर्मनी

पक्षी लोकगीत, धर्म, और लोकप्रिय संस्कृति में प्रमुख एवं विविध भूमिकाएं निभाते हैं. धर्म में, पक्षी किसी देवता के दूत या गुरु या नेता के रूप में दिखाई दे सकते हैं, उदाहरण के लिए मेकमेक संप्रदाय में ईस्टर द्वीप के टंगता मनु नें मुखिया के रूप में सेवा की,[१७८] या एक सेवक के रूप में, जैसा कि हुगिन और मुनिन के मामले में दिखाई देता है, दो आम रेवेन जिन्होनें नॉर्स देवता ओडिन के कान में समाचार दिया था.[१७९] पक्षी एक धार्मिक चिन्ह के रूप में भी दिखाई पड़ सकते हैं, जैसे कि जोनाह (Hebrew: יוֹנָה , कबूतर) ने भय, विलाप, समर्पण और सौन्दर्य जैसे कबूतरों के साथ पारंपरिक रूप से जोड़ कर देखे जाने वाले गुणों को अपना लिया था.[१८०] पक्षियों को देवता के रूप में भी दिखाया गया है, जैसे कि, भारत में द्रविड़ लोग मोर को पृथ्वी माता के रूप में पूजते हैं.[१८१] कुछ पक्षियों को राक्षस रूप में भी दिखाया गया है, जैसे कि पौराणिक पक्षी रॉक तथा माओरी लोगों का काल्पनिक पक्षी पोआकाई , एक विशालकाय पक्षी जो मनुष्यों को भी उठा ले जाने में सक्षम था. [१८२]


पक्षी प्रागैतिहासिक काल से संस्कृति और कला में दर्शाए जाते रहे हैं, जब उन्हें प्रारंभिक गुफा चित्रों में दिखाया जाता था.[१८३] बाद में पक्षियों को धार्मिक और सांकेतिक कला डिज़ाइनों में भी दिखाया गया, जैसे कि मुग़ल और फारसी सम्राटों का शानदार मयूर सिंघासन.[१८४] पक्षियों के प्रति वैज्ञानिक जिज्ञासा बढ़ने के साथ, उनके कई चित्रों को किताबों में स्थान दिया गया. जॉन जेम्स औडुबौन सबसे प्रसिद्द पक्षी चित्रकारों में से एक हैं, जिनके द्वारा बनाये गये उत्तरी अमेरिका के पक्षियों के चित्रों को यूरोप में भारी व्यवसायिक सफलता मिली, और बाद में उन्होंने राष्ट्रीय औडोबौन सोसाइटी को अपना नाम भी दिया.[१८५] कविता में भी पक्षियों का विशिष्ट स्थान है; उदाहरण के लिए, होमर ने अपनी पुस्तक ओडिसी में नाईटिंगल को स्थान दिया है, और कैटुलुस ने अपनी पुस्तक कैटुलुस II में गौरैया को एक कामोद्दीपक प्रतीक के रूप में दिखाया है.[१८६] एक ऐल्बेट्रोस और एक नाविक के बीच का संबंध, सामुएल टेलर कोलरिज की पुस्तक "दी राईम ऑफ़ दी एन्शियन्ट मैराइनर" की केन्द्रीय विषय-वस्तु है, जिसकी वजह से 'बोझ' शब्द के एक रूपक के तौर पर में इसका प्रचलन हुआ.[१८७] पक्षियों पर आधारित अन्य अंग्रेजी रूपक हैं: वल्चर फंड्स, और वल्चर निवेशक, मुर्दाखोर वल्चर (गिद्ध) के नाम पर ये नाम पड़े हैं. [१८८]


विभिन्न पक्षी प्रजातियों की विभिन्न संस्कृतियों में विभिन्न धारणाएं प्रचलित हैं. अफ्रीका के कुछ हिस्सों में उल्लू को दुर्भाग्य, जादू-टोना, और मृत्यु का प्रतीक माना जाता है,[१८९] लेकिन यूरोप के अधिकांश हिस्सों में उन्हें बुद्धिमान माना जाता है.[१९०] हूपूस को प्राचीन मिस्र में पवित्र माना जाता था और फारस में सदाचार का प्रतीक, लेकिन यूरोप में उनको चोर समझा जाता था और स्कान्दिनाविया में युद्ध के अग्रदूत के रूप में देखा जाता था. [१९१]


संरक्षण

कैलिफोर्निया कोंडोर एक बार, लेकिन 22 पक्षियों गिने आज संरक्षण के उपाय करने के लिए उस पर 300 उठाया है.
Searchtool.svg मुख्य लेख: Bird conservation
इन्हें भी देखें: Late Quaternary prehistoric birds एवं Extinct birds

यद्यपि मानवीय गतिविधियों ने बार्न स्वैलो और यूरोपीय स्टार्लिंग जैसी कुछ प्रजातियों के विस्तार में सहायता दी है, उनकी वजह से कई प्रजातियों की जनसँख्या में कमी आयी है या वे विलुप्त हो गयी हैं. इतिहास की लगभग सौ पक्षी प्रजातियाँ विलुप्त हो चुकी हैं,[१९२] हालाँकि मानवीय गतिविधियों के कारण पक्षी प्रजातियों के विलुप्त होने की सबसे नाटकीय घटना तब घटित हुई जब मेलनेशियन, पौलिनेशियन, और माइक्रोनेशियन द्वीपों में मनुष्यों द्वारा औपनिवेशीकरण के दौरान लगभग 750 -1800 पक्षी प्रजातियों का नाश हो गया.[१९३] दुनिया भर में कई पक्षी प्रजातियों की संख्या में कमी आ रही है, बर्डलाइफ इंटरनेशनल और IUCN द्वारा 2009 में 1227 प्रजातियों को विलुप्तप्राय घोषित कर दिया गया था.[१९४][१९५]


मनुष्यों द्वारा पक्षियों को सबसे बड़ा खतरा उनके निवास स्थान के छिन जाने का है.[१९६] अन्य खतरों में शामिल हैं, अत्यधिक शिकार, संरचनात्मक टकरावों के कारण आकस्मिक मृत्यु या लॉन्ग-लाइन फिशिंग बाईकैच,[१९७] प्रदूषण (तेल रिसाव या कीटनाशकों का उपयोग),[१९८] गैर-स्थानीय इनवेसिव प्रजातियों से प्रतियोगिता और शिकार का भय,[१९९] तथा जलवायु परिवर्तन.


सरकारें और संरक्षण समूह पक्षियों की रक्षा हेतु कार्य करते हैं, या तो कानून पारित कर जो पक्षी के निवास को संरक्षित और पुनर्स्थापित करते हैं, या उनको संरक्षित स्थानों में रखकर, ताकि बाद में दोबारा सामने लाया जा सके. इस तरह की परियोजनाओं में कुछ सफलता अवश्य मिली है; एक अध्ययन का अनुमान है कि संरक्षण प्रयासों द्वारा 1994 से 2004 के बीच 16 पक्षी प्रजातियों को बचा लिया गया है जो अन्यथा विलुप्त होने की कगार पर थीं, इनमें शामिल हैं कैलिफोर्निया कोंडोर और नॉरफ़ॉक द्वीप का हरा तोता.[२००]


टिप्पणियाँ

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