जमुई

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जमुई
—  शहर  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य बिहार
ज़िला जमुई
जनसंख्या 66,752 (2001 के अनुसार )
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)

• 78 मीटर (256 फी॰)

Erioll world.svgनिर्देशांक: 24°55′N 86°13′E / 24.92°N 86.22°E / 24.92; 86.22 जमुई बिहार के जमुई जिले का मुख्यालय है। यह जैनों के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। प्राचीन समय में इस जगह को जूम्भिकग्राम और जमबुबानी के नाम से जाना जाता था। ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से यह स्थान काफी महत्वपूर्ण रहा है। माना जाता है कि 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने उज्जिहवलिया नदी के तट पर स्थित जूम्भिकग्राम में दिव्य ज्ञान प्राप्त किया था। इस जिले की स्थापना गुप्त, पाल और चन्देल शासकों ने की थी। जमुई का संबंध प्रसिद्ध महाकाव्य महाभारत से भी जोड़ा जाता है।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

गुरूद्वारा पक्की संगत, मिन्टो टॉवर, जैन मंदिर धर्मशाला, चन्द्रशेखर संग्रहालय, काली मंदिर, श्रमभारती तथा सेंट थॉमस चर्च आदि यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं।

गुरूद्वारा पक्की संगत[संपादित करें]

जमुई जिले के मोगहार स्थित गुरूद्वारा पक्की संगत प्राचीन गुरूद्वारों में से है। माना जाता है कि यह वह स्थान है जहां सिक्खों के नौवें गुरू, गुरू तेग बहादुर कुछ समय के लिए ठहरें थे। गुरूद्वारे में एक कमरा है। माना जाता है कि इस कमरे में रखे हुए तकिया और कोट को गुरू जी ने प्रयोग किया था। गुरूद्वारे के समीप पर ही एक पुराना किला भी है।

मिन्टो टॉवर[संपादित करें]

जमुई जिला मुख्यालय के पूर्व से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गिद्धौर में मिन्टो टॉवर है। यह टॉवर बिहार के प्रमुख पयर्टन स्थलों में से है। मिन्टो टॉवर का निर्माण महाराजा रामेश्‍वर प्रसाद सिंह ने करवाया था। यह टॉवर लॉर्ड मिन्टो, भारत के गर्वनर जर्नल और वाइसराय की याद में बनवाया गया था, जो 10 फरवरी 1960 ई. में यहां घूमने के लिए आए थे। काफी संख्या में पर्यटक यहां आना पसंद करते है। मिन्टो टॉवर के समीप ही एक मंदिर भी है। गिद्धौर में बना मिंटो टावर का निर्माण चंदेल वंश के अंतिम राजा प्रताप सिंह के पिता महाराजा चन्द्रचूड़ सिंह ने अंग्रेज शासक लार्ड मिंटो के सम्मान में करवाई थी। वर्ष 1907 में लार्ड मिंटो गिद्धौर आए थे। उस समय राजा ने गिद्धौर स्टेशन से मिंटो टावर तक लगभग दो किमी कालीन बिछवाई थी। शाही बग्गी पर सवार होकर राजा प्रताप सिंह अपने पिता महाराजा चन्द्रचूड़ सिंह के साथ लार्ड मिंटो की अगुवाई की और टावर तक आए थे। उसी दिन महराजा ने सवारी हेतु फोर्ड की नई परफेक्ट कार मंगवाई थी। जिस पर सवार होकर टावर से राजमहल तक महराजा और लार्ड मिंटो आए थे।

जैन मंदिर धर्मशाला[संपादित करें]

जमुई के पश्चिम से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिंकदरा में जैन मंदिर और एक धर्मशाला स्थित है। इस धर्मशाला में कुल 65 कमरें है। मंदिर स्थित यह धर्मशाल जैन भक्तों को रहने की सुविधा उपलब्ध कराती है। यह धर्मशाल मंदिर के भीतर स्थित है। जैन मंदिर भगवान महावीर को समर्पित है। काफी संख्या में लोग मंदिर में आते हैं। इसके अलावा यह स्थान भगवान महावीर के जन्म स्थान के रूप में भी जाना जाता है।

चन्द्रशेखर संग्रहालय[संपादित करें]

चन्द्रशेखर संग्रहालय मल्टी-परपस म्यूजियम है। इसकी स्थापना 1985 ई. में हुई थी। जमुई स्थित चन्द्रशेखर संग्रहालय की स्थापना श्री भुब्वनेशवरनाथ वमा की थी। पुरातात्विक वस्तुएं, टेरीकोटा सील और प्राचीन चट्टान आदि इस संग्रहालय में देखी जा सकती है। इसके अतिरिक्त, संग्रहालय में भगवान विष्णु, भगवान सूर्या, देवी उमा और दुर्गा की अनेक प्रतिमाएं देखी जा सकती है। यह संग्रहालय चन्द्रशेखर सिंह संग्रहालय के नाम से प्रसिद्ध है। यह संग्रहालय प्रत्येक दिन खुला रहता है। केवल सोमवार को अवकाश रहता है। खुलने का समय: सुबह 10 बजे से शाम 4.30 बजे तक

काकन[संपादित करें]

काकन जुमई के उत्तर से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह जगह धार्मिक केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध है। माना जाता है कि जैनों के नौवें तीर्थंकर सुविधिनाथ का जन्म इसी स्थान पर हुआ था। प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में भक्त यहां आते हैं। इसके अलावा यहां लोगों के लिए रहने की सुविधा भी प्रदान की गई है। प्रसिद्ध जैन मंदिर कुमार ग्राम प्राचीन देवी मंदिर के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि इंदापी जिसे इंद्रप्रस्थ के नाम से भी जाना जाता है, वह भी यहां घूमने के लिए आए थे।

काली मंदिर[संपादित करें]

काली मंदिर जुमई, जमुई रेलवे स्टेशन के सामने (मलयपुर) में स्थित है। यह मंदिर देवी काली को समर्पित है। प्रत्येक वर्ष दीपावली से छठ तक इस जगह पर बहुत ही प्रसिद्ध मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले को काली मेला के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर निर्माण का श्रेय मलयपुर निवासी अशोक सिंह को जाता है. उन्ही के कठिन परिश्रम से जमुई काली मंदिर की सुन्दरता और रख-रखाव बरक़रार है. जमुई काली मंदिर जमुई ज़िले का गौरव है

धनेश्वर नाथ (महादेव सिमरिया)[संपादित करें]

जिला मुख्यालय के सिकन्दरा-जमुई मुख्य मार्ग पथ पर बाबा धनेश्वर नाथ (महादेव सिमरिया) मंदिर स्थित है। बाबा धनेश्वर नाथ शिव मंदिर स्वयंभू शिवलिंग है। इसे बाबा वैद्यनाथ के उपलिंग के रूप में जाना जाता है। प्राचीन मान्यता के अनुसार यह शिव मंदिर 400 दशक से भी अधिक पुराना है। जहां बिहार ही नहीं बरन दूसरे राज्य जैसे झारखंड, पश्चिम बंगाल आदि से श्रद्धालु नर-नारी पहुंचते हैं। पूरे वर्ष इस मंदिर में पूजन दर्शन, उपनयन, मुंडन आदि अनुष्ठान करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। विशेषताएं-इस मंदिर के चारों और शिवगंगा बनी हुई है। मंदिर का मुख्य द्वार पूरब दिशा की ओर है। मंदिर परिसर में सात मंदिर है जिसमें भगवान शंकर का मंदिर गर्भगृह में अवस्थित है।

ऐसी मान्यता है कि गिद्धौर वंश के तत्कालीन महाराजा पूरनमल सिंह को स्वप्न आया कि महादेव सिमरिया स्थित शिवडीह में शिवलिंग प्रकट हुआ है। जिसकी चर्चा दूर-दूर तक फैल रही है। तब महाराजा ने अपने दल-बल के साथ उक्त स्थान पर आकर विधिवत तरीके से पूजा-अर्चना कर शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की। उस के बाद से यह शिवमंदिर बाबा धनेश्वर नाथ के नाम से जाना जाने लगा और पुजारियों के आजीविका के लिए महाराजा द्वारा जमीन उपलब्ध कराए गए ।

गिद्धेश्वर स्थान[संपादित करें]

जिला मुख्यालय से लगभग १५ किलो मीटर दूर खैरा प्रखंड में गिद्धेश्वर स्थान है. कहा जाता है की राम व रावण की लड़ाई में जब रावण-सीता का अपहरण कर लंका जा रहा था तो यही वह स्थान है जब गिद्धराज जटायू ने रावण से युद्ध किया था। आज भी यह स्थान क्षेत्र के लोगों के लिए दर्शनीय केन्द्र है। यहाँ गिद्धेश्वर महादेव मंदिर भी है जो यहाँ के लोगो के लिए आस्था का केंद्र है।

सेंट थॉमस चर्च[संपादित करें]

जमुई के दक्षिण-पूर्व से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सेंट थॉमस चर्च एक कैथोलिक चर्च है। इसकी स्थापना 1950 ई. में फ्रेंच साइस एस. जे ने की थी। इस चर्च के प्रथम पादरी थॉमस वेट्टीकेड थे।

आवागमन[संपादित करें]

वायु मार्ग

यहां का सबसे निकटतम हवाई अड्डा पटना स्थित जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट, पटना है। पटना से जमुई 161 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अतिरिक्त गया अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी है। गया से जमुई 136 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

रेल मार्ग

जमुई रेलमार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख शहरों से पहुंचा जा सकता है। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जमुई है।

सड़क मार्ग

भारत के कई प्रमुख शहरों से सड़कमार्ग द्वारा जमुई आसानी से पहुंचा जा सकता है।

संदर्भ[संपादित करें]