राजगीर

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राजगीर
—  नगर  —
राजगीर स्थित गृद्धकूट पर्वत
राजगीर स्थित गृद्धकूट पर्वत
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य बिहार
ज़िला नालंदा
जनसंख्या 41,619 (2011 के अनुसार )
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)

• 73 मीटर (240 फी॰)

Erioll world.svgनिर्देशांक: 25°02′N 85°25′E / 25.03°N 85.42°E / 25.03; 85.42 राजगीर, बिहार प्रांत में नालंदा जिले में स्थित एक शहर एवं अधिसूचीत क्षेत्र है। यह कभी मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी, जिससे बाद में मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ।

राजगृह का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है. वसुमतिपुर, वृहद्रथपुर, गिरिब्रज और कुशग्रपुर के नाम से भी प्रसिद्ध रहे राजगृह को आजकल राजगीर के नाम से जाना जाता है. पौराणिक साहित्य के अनुसार राजगीर बह्मा की पवित्र यज्ञ भूमि, संस्कृति और वैभव का केन्द्र तथा जैन तीर्थंकर महावीर और भगवान बुद्ध की साधनाभूमि रहा है. इसका ज़िक्र ऋगवेद, अथर्ववेद, तैत्तिरीय पुराण, वायु पुराण, महाभारत, बाल्मीकि रामायण आदि में आता है. जैनग्रंथ विविध तीर्थकल्प के अनुसार राजगीर जरासंध, श्रेणिक, बिम्बसार, कनिक आदि प्रसिद्ध शासकों का निवास स्थान था. जरासंध ने यहीं श्रीकृष्ण को हराकर मथुरा से द्वारिका जाने को विवश किया था.

पटना से 100 किमी उत्तर में पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसा राजगीर न सिर्फ़ एक प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थल है बल्कि एक खुबसूरत हेल्थ रेसॉर्ट के रूप में भी लोकप्रिय है। यहां हिन्दु, जैन और बौद्ध तीनों धर्मों के धार्मिक स्थल हैं। खासकर बौद्ध धर्म से इसका बहुत प्राचीन संबंध है। बुद्ध न सिर्फ़ कई वर्षों तक यहां ठहरे थे बल्कि कई महत्वपूर्ण उपदेश भी यहां की धरती पर दिये थे। बुद्ध के उपदेशों को यहीं लिपिबद्ध किया गया गया था और पहली बौद्ध संगीति भी यहीं हुई थी।

मौसम[संपादित करें]

तापमान: अधिकतम 40 °C, न्यूनतम 20 °C. जाड़ों में: अधिकतम 28 °C, न्यूनतम 6 °C
वर्षा: 1,860 मिमी (मध्य-जून से मध्य-सितंबर)
सबसे उपयुक्त: अक्तूबर से मार्च

दर्शनीय स्थल[संपादित करें]

प्राचीन बौद्ध पर्यटक स्थल[संपादित करें]

गृद्धकूट पर्वत[संपादित करें]

इस पर्वत पर बुद्ध ने कई महत्वपूर्ण उपदेश दिये थे। जापान के बुद्ध संघ ने इसकी चोटी पर एक विशाल “शान्ति स्तूप” का निर्माण करवाया है जो आजकल पर्यटकों के आकर्षण का मूख्य केन्द्र है। स्तूप के चारों कोणों पर बुद्ध की चार प्रतिमाएं स्थपित हैं। स्तूप तक पहुंचने के लिए पहले पैदल चढ़ाई करनी पड़ एक “रज्जू मार्ग” भी बनाया गया है जो यात्रा को और भी रोमांचक बना देता है।

पिफली गुफा[संपादित करें]

This is a place mentioned in the Pali Canon. It is where Maha Kassapa is recorded to have stayed a few times, once he was ill there. Maha Kassappa stayed at the cave, but also there was a house with the same name nearby.

वेणुवन[संपादित करें]

बाँसों के इस रमणीक वन में बसे “वेणुवन विहार” को बिम्बिसार ने भगवान बुद्ध के रहने के लिए बनवाया था।

गर्म जल के झरने[संपादित करें]

वैभव पर्वत की सीढ़ियों पर मंदिरों के बीच गर्म जल के कई झरने (सप्तधाराएं) हैं जहां सप्तकर्णी गुफाओं से जल आता है। इन झरनों के पानी में कई चिकित्सकीय गुण होने के प्रमाण मिले हैं। पुरुषों और महिलाओं के नहाने के लिए 22 कुन्ड बनाए गये हैं। इनमें “ब्रह्मकुन्ड” का पानी सबसे गर्म (४५ डिग्री से.) होता है।

स्वर्ण भंडार[संपादित करें]

यह स्थान प्राचीन काल में जरासंध का सोने का खजाना था। कहा जाता है कि अब भी इस पर्वत की गुफ़ा के अन्दर अतुल मात्रा में सोना छुपा है और पत्थर के दरवाजे पर उसे खोलने का रहस्य भी किसी गुप्त भाषा में खुदा हुआ है।

जैन मंदिर[संपादित करें]

पहाड़ों की कंदराओं के बीच बने २६ जैन मंदिरों को अप दूर से देख सकते हैं पर वहां पहुंचने का मार्ग अत्यंत दुर्गम है। लेकिन अगर कोई प्रशिक्षित गाइड साथ में हो तो यह एक यादगार और बहुत रोमांचक यात्रा साबित हो सकती है।

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राजगीर का मलमास मेला[संपादित करें]

राजगीर की पहचान मेलों के नगर के रूप में भी है. इनमें सबसे प्रसिद्ध मकर और मलमास मेले के हैं. शास्त्रों में मलमास तेरहवें मास के रूप में वर्णित है. सनातन मत की ज्योतिषीय गणना के अनुसार तीन वर्ष में एक वर्ष 366 दिन का होता है. धार्मिक मान्यता है कि इस अतिरिक्त एक महीने को मलमास या अतिरिक्त मास कहा जाता है.

ऐतरेय बह्मण के अनुसार यह मास अपवित्र माना गया है और अग्नि पुराण के अनुसार इस अवधि में मूर्ति पूजा–प्रतिष्ठा, यज्ञदान, व्रत, वेदपाठ, उपनयन, नामकरण आदि वर्जित है. लेकिन इस अवधि में राजगीर सर्वाधिक पवित्र माना जाता है. अग्नि पुराण एवं वायु पुराण आदि के अनुसार इस मलमास अवधि में सभी देवी देवता यहां आकर वास करते हैं. राजगीर के मुख्य ब्रह्मकुंड के बारे में पौराणिक मान्यता है कि इसे ब्रह्माजी ने प्रकट किया था और मलमास में इस कुंड में स्नान का विशेष फल है.

मलमास मेले का ग्रामीण स्वरूप

राजगीर के मलमास मेले को नालंदा ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों में आयोजित मेलों मे सबसे बड़ा कहा जा सकता है। इस मेले का लोग पूरे साल इंतजार करते हैं। कुछ साल पहले तक यह मेला ठेठ देहाती हुआ करता था पर अब मेले में तीर्थयात्रियों के मनोरंजन के लिए तरह-तरह के झूले, सर्कस, आदि भी लगे होते हैं. युवाओं की सबसे ज्यादा भीड़ थियेटर में होती है जहां नर्तकियाँ अपनी मनमोहक अदाओं से दर्शकों का मनोरंजन करती हैं।

जीवकर्म[संपादित करें]

Jivaka, the greatest physician of Buddha's time, was from Rajgir. He donated a monastery to Buddha, called the Jivakarama.

तपोधर्म[संपादित करें]

The Tapodarama Monastery was located on the site of the hot springs. Now a Hindu temple is constructed there, called the Lakshmi Narayan Mandir. In ancient times, hot springs used to be the site of the Tapodarama, a Buddhist monastery at the time of Gautama Buddha. Also King Bimbisara used to take his bath there sometimes.

सप्तपर्णी गुफा[संपादित करें]

The cave of Saptparni is where the First Buddhist Council was held under the leadership of Maha Kassapa. Also Buddha sometimes stayed there, and it was used as an accommodation for visiting monks.

हिन्दू स्थल[संपादित करें]

जरासंध का अखाडा़[संपादित करें]

The great albeit evil warrior whose relentless attacks on Mathura prompted Lord Krishna to migrate the populace of Mathura to Dwarika, used to practice martial arts here every day.

लक्ष्मी नारायण मंदिर[संपादित करें]

लक्ष्मीनारायण मंदिर

The pink-hued Hindu temple called the Lakshmi Narayan Mandir has within its grounds the ancient hot springs. The temple is (as the name indicates), dedicated to Lord Vishnu and his consort, Goddess Lakshmi. In more ancient times, hot springs used to be the site of the Tapodarama, a Buddhist monastery at the time of Gautama Buddha. Also King Bimbisara used to take his bath there sometimes.

Originally a dip in the pond was the only means of experiencing the hot springs, but now at a higher level the spring has been tapped and flows out through several ceramic pipes set into the wall in a hall, where people can sit under it and have the water run over them.

Strangely enough, Muslims are not allowed to enter the hot spring bath. ref

अन्य स्थान[संपादित करें]

Other archaeological sites including:

  1. the Karnada Tank where Lord Buddha used to bathe
  2. the मनियार मठ that dates from the 1st century CE
  3. the Maraka Kukshi where the still unborn Ajatashatru was cursed as a patricide
  4. the Rannbhumi where Bhima and Jarasandh fought one of the Mahabharat battles.
  5. Swarnabhandar Cave
  6. विश्वशांति स्तूप
  7. Ruins of an Old Fort
  8. 40 km long and 12 ft wide 2500 year old cyclopean walls.

बिम्बिसार कारागार[संपादित करें]

Bimbisara's jail

In the middle of the valley is the ruin of a circular structure with turrets at each corner. Bimbisara was imprisoned by his son Ajatashatru, but could continue to see Gridhakuta and the Buddha through a window. The fact that the hill can be seen from the structure, and its military appearance, led to its present label after being discovered in 1914. It could also be (because of its shape and the turrets) a Buddhist monastery of the first millennium AD[तथ्य वांछित].

राजगीर कैसे पहुँचें[संपादित करें]

  • वायुमार्ग: निकटतम हवाई-अड्डा पटना (107 किमी).

बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम पटना स्थित अपने कार्यालय से नालंदा एवं राजगीर के लिए वातानुकूलित टूरीस्ट बस एवं टैक्सी सेवा भी उपलब्ध करवाता है। संपर्क:टूरीस्ट भवन, बीरचंद पटेल पथ,पटना 800001. दूरभाष: 0612-225411, फैक्स: 0612-236218.

वाह्य सूत्र[संपादित करें]