कृष्ण बलदेव वैद

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कृष्ण बलदेव वैद जी(२७ जुलाई १९२७)ने पंजाब विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. किया और हार्वड विश्वविद्यालय से पी-एच.डी. की पदवी हासिल की। १९५० से १९६६ दिल्ली और चन्डीगढ में अंग्रेज़ी साहित्य का अध्यापन और १९६६ से १९८५ अमरीका में अंग्रेज़ी और अमरीकी साहित्य का अध्यापन किया। १९८५ से १९८८ भारत भवन, भोपाल में निराला सृजनपीठ के अध्यक्ष भी रहें। कृष्ण बलदेव वैद (१९२७- ) अपने बेबाक उपन्‍यास विमल उर्फ़ जाएँ तो जाएँ कहाँ के लिए जाने जाते हैं।


[संपादित करें] प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ

उपन्यास :

  • उसका बचपन,
  • बिमल उर्फ जाएँ तो जाएँ कहाँ,
  • नसरीन,
  • दूसरा न कोई,
  • दर्द ला दवा,
  • गुज़रा हुआ ज़माना,
  • काल कोलाज,
  • नर नारी,
  • मायालोक।

कहानी संग्रह :

  • बीच का दरवाज़ा,
  • मेरा दुश्मन,
  • दूसरे किनारे से,
  • लापता,वह और मैं,
  • उसके बयान,
  • चर्चित कहानियाँ,
  • पिता की परछाइयाँ।

नाटक  :

  • भूख आग है।

अनुवाद : हिन्दी में-

  • गॉडो के इन्तज़ार में,
  • आखिरी खेल,फ्रेडा,
  • एलिस अजूबों की दुनिया में तथा
  • अंग्रेज़ी में भी मौलिक लेखन।

अनेको कृतियों के अनुवाद अन्य भारतीय भाषाओं- पंजाबी, उर्दू, तमिल, मलयाली, गुजराती, मराठी, तेलुगू, बंगला, और अंग्रेज़ी के अतिरिक्त कुछ विदेशी भाषाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।


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