1984 सिख विरोधी दंगे

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1984 के सिख-विरोधी दंगे भारतीय सिखों के विरुद्ध दंगे थे जो इंदिरा गाँधी के हत्या के बाद हुए थे। इन्दिरा गांधी की हत्या उन्हीं के अंगरक्षकों ने कर दी थी जो कि सिख थे। इन दंगों में 3000 से ज़्यादा मौतें हुई थी।[1]। राजीव गाँधी जिन्होंने अपनी माँ की मौत के बाद प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी और जो कांग्रेस के एक सदस्य भी थे, उनसे दंगों के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा था, "जब एक बड़ा पेड़ गिरता है, तब पृथ्वी भी हिलती है"।[2] 1984 के दंगों की सुनवाई करते हुए 17दिसम्बर 2018 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने फ़ैसला सुनाया है। जिसमें सज्जन कुमार (प्रमुख आरोपी) को उम्रक़ैद और अन्य आरोपियों को 10-10 साल की सज़ा सुनाई गयी है।

1970 के दशक में इंदिरा द्वारा लगाए गए भारतीय आपातकाल के दौरान, स्वायत्त सरकार के लिए चुनाव प्रचार के लिए हज़ारों सिखों को क़ैद कर लिया गया था। इस छुट-पुट हिंसा के चलते एक सशस्त्र सिख अलगाववादी समूह को भारत सरकार द्वारा एक आतंकवादी संस्था के रूप में नामित कर दिया गया था। जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के द्वारा इंदिरा गाँधी ने भारतीय सेना को स्वर्ण मंदिर पे क़ब्ज़ा करने का आदेश दिया और सभी विद्रोहियों को खत्म करने के लिए कहा, क्यूंकि स्वर्ण मंदिर पर हथियार बांध सिख अलगाववादियों से क़ब्ज़ा कर लिया था। भारतीय अर्धसैनिक बलों द्वारा बाद में पंजाब के ग्रामीण इलाक़ों से अलगाववादियों को ख़तम करने के लिए एक ऑपरेशन चलाया था। इन दंगो का मुख्य कारण स्वर्ण मंदिर पर सिक्खो का घेराव करना था। पाकिस्तान के गुप्त समर्थन से कुछ सिख आतंकवादियों की मांग एक ख़ालिस्तान नाम का एक अलग देश बनाने की थी जहाँ केवल सिख ही रहेंगे परन्तु कांग्रेस सरकार इस के लिए तैयार नहीं थी। आतंकवादी सिख कई चेतावनियों के बाद भी मंदिर को नहीं छोड़ रहे थे। इसी के चलते इंदिरा गांधी ने स्वर्ण मंदिर पर से सिक्खों को हटाने के लिए मिलिट्री की सहायता ली वहाँ हुई मुठभेड़ में बहुत से सिख मारे गए। यह देख कर इंदिरा गांधी के दो अंगरक्षक जो के सिख थे उन्होंने 31 अक्तुबर को इंदिरा गांधी पर गोलियाँ चला कर उनकी हत्या कर दी थी।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Bedi, Rahul (1 November 2009). "Indira Gandhi's death remembered". BBC. मूल से 2 November 2009 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2 November 2009. The 25th anniversary of Indira Gandhi's assassination revives stark memories of some 3,000 Sikhs killed brutally in the orderly pogrom that followed her killing
  2. "1984 anti-Sikh riots 'wrong', says Rahul Gandhi". Hindustan Times. 18 November 2008. मूल से 12 October 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 5 May 2012.