हरमुख

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हरमुख
Mount Harmukh.JPG
हरमुख
उच्चतम बिंदु
ऊँचाई5,142 मी॰ (16,870 फीट) [1]
उदग्रता1,606 मी॰ (5,269 फीट) [1]
निर्देशांक34°24′00″N 74°54′30″E / 34.40000°N 74.90833°E / 34.40000; 74.90833निर्देशांक: 34°24′00″N 74°54′30″E / 34.40000°N 74.90833°E / 34.40000; 74.90833
भूगोल
राज्य/प्रांतIN
मातृ श्रेणीहिमालय
आरोहण
प्रथम आरोहण1856
यूनाइटेड किंगडम थोमस मोन्टगोमरी
सरलतम मार्गअरीन बांडीपूर

हरमुख भारत के जम्मू व कश्मीर राज्य के गान्दरबल ज़िले में सिन्द नदी (सिन्धु नदी से भिन्न) और किशनगंगा नदी के बीच स्थित एक ५,१४२ मीटर (१६,८७० फ़ुट) ऊँचा पहाड़ है। यह गंगाबल झील से उभरता हुआ प्रकट होता है और हिन्दुओं द्वारा पवित्र माना जाता है।[2] इसे चढ़ने का सबसे आसान मार्ग बांडीपूर ज़िले के आरीन क्षेत्र से जाता है।

पवित्रता[संपादित करें]

हरमुख का मतलब 'शिव का मुख' है और यह पर्वत स्थानीय हिन्दुओं द्वारा शिवजी का ठिकाना माना जाता है।[3] इसे कभी-कभी 'कश्मीरी कैलाश' भी कहा जाता था।[4] कश्मीरी भाषा की 'हरमुखुक गोसोनी' नामक धार्मिक कथा के अनुसार:

एक बार किसी संन्यासी ने हरमुख के शिखर पर पहुँचकर शिवजी के चहरे के दर्शन करने की कोशिश करी। बारह लम्बे बरसों तक वह ऊपर पहुँचने का प्रयत्न करता रहा लेकिन नाकामयाब रहा। एक दिन उसने एक गुज्जर चरवाहे को शिखर से उतरते देखा। जब गुज्जर उसके पास पहुँचा तो संन्यासी ने गुज्जर से पूछा कि उसे ऊपर क्या दिखा। गुज्जर ने बताया कि वह अपनी खोई हुई बकरी ढूंढ रहा था और शिखर पर उसने एक दम्पति मिया-बीवी को एक गाय को मनुष्य के कोपले (शिर) में दूध दोहते हुए देखा। दम्पति ने उसे कुछ दूध पीने को दिया लेकिन गुज्जर ने पीने से इन्कार कर दिया। जब उसने दम्पति से विदा ली तो उन्होने उसके माथे पर थोड़ा दूध मल दिया। संन्यासी ने यह सुना तो उसने ख़ुशी से आगे बढ़कर गुज्जर के माथे से कुछ दूध चाट लिया। चाटते ही संन्यासी को मुक्ति मिल गई और वह चकित गुज्जर की नज़रों से सामने से ग़ायब हो गया।[5]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. http://peaklist.org/WWlists/ultras/karakoram.html
  2. Geography of Kashmir, kousa.org, Accessed 2012-04-24
  3. Territory of Desire: Representing the Valley of Kashmir, Ananya Jahanara Kabir, pp. 91, U of Minnesota Press, 2009, ISBN 9780816653560, ... The photograph of the peak in the Pir Panjal called the Harmukh (Face of Shiva) that forms the frontispiece of the inaugural volume in the Kashmir Series demonstrates the wider utility of these transformations ...
  4. The birth-place of Kalidasa, with notes, references and appendices, Lakshmi Dhar, University of Delhi, Imperial Book Depot Press, 1926, ... It must be situated in the valley below the Kashmirian 'Kailasa' or the Harmukh mountain, on the bank of the Ganga, not far away from the residence of Siva ...
  5. Some Marvels of Kashmir