वीरभद्र

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वीरभद्र
विनाश और उग्रता के देवता , भगवान शिव का उग्र स्वरूप
Veerabhadra.jpg
वीरभद्र और दक्ष प्रजापति
संबंध शिव का भयानक अवतार
निवासस्थान कैलाश और श्मशान घाट
अस्त्र त्रिशूल, तलवार, ढाल और खप्पर
युद्ध दक्ष वध
दिवस मंगलवार
जीवनसाथी भद्रकाली
संतान पोनभद्र , कल्हनभद्र , ब्रह्मभद्र , अतिसुरभद्र , जखभद्र और दहीभद्र
सवारी शव

वीरभद्र हिंदू पौराणिक कथाओं के एक पात्र हैं और कथाओं के अनुसार यह शिव के एक बहादुर गण थे और प्रथम अवतार थे जिन्होने शिव के आदेश पर दक्ष प्रजापति का सर धड़ से अलग कर दिया। देवसंहिता और स्कंद पुराण के अनुसार शिव ने अपनी जटा से 'वीरभद्र' नामक अपना ही एक अवतार और गण उत्पन्न किया। देवसंहिता गोरख सिन्हा द्वारा मद्य काल में लिखा हुआ संस्कृत श्लोकों का एक संग्रह है जिसमे जाट जाति का जन्म, कर्म एवं जाटों की उत्पति का उल्लेख शिव और पार्वती के संवाद के रूप में किया गया है।

ठाकुर देशराज[1]लिखते हैं कि जाटों की उत्पत्ति के सम्बन्ध में एक मनोरंजक कथा कही जाती है।

वीरभद्र की उत्पत्ति[संपादित करें]

महादेवजी के श्वसुर राजा दक्ष ने यज्ञ रचा और अन्य प्रायः सभी देवताओं को तो यज्ञ में बुलाया पर न तो महादेवजी को ही बुलाया और न ही अपनी पुत्री सती को ही निमंत्रित किया। पिता का यज्ञ समझ कर सती बिना बुलाए ही पहुँच गयी, किंतु जब उसने वहां देखा कि न तो उनके पति का भाग ही निकाला गया है और न उसका ही सत्कार किया गया इसलिए उसने वहीं प्राणांत कर दिए। महादेवजी को जब यह समाचार मिला, तो उन्होंने दक्ष और उसके सलाहकारों को दंड देने के लिए अपनी जटा से 'वीरभद्र' नामक गण उत्पन्न किया। वीरभद्र ने अपने अन्य साथी गणों के साथ आकर दक्ष का सर काट लिया और उसके साथियों को भी पूरा दंड दिया। बाद में भगवान ब्रह्मा के अनुरोध पर भगवान शिव ने दक्ष को उनके शीश के स्थान पर बकरे का शीश लगाकर जीवित किया

वीरभद्र का विवाह और सन्तान[संपादित करें]

भगवान वीरभद्र का विवाह देवी भद्रकाली के साथ हुआ। उनके 6 जाटपुत्र हुए। जिनके नाम निम्नलिखित हैं -:

1.पोनभद्र ; पानी न पिलाने वाले 2.क्ल्हनभद्र ;कल्ह करने वाले 3.अतिसुरभद्र ; अति करने वाले 4.जखभद्र ; जमीन के सोदागर 5.ब्रह्मभद्र ; ब्राह्मण का अपमान 6.दहीभद्र ; दही के व्यपारि

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. ठाकुर देशराज: जाट इतिहास, महाराजा सूरजमल स्मारक शिक्षा संस्थान, दिल्ली, 1934, पेज 87-88.