विक्रम संवत २०७५

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विक्रम संवत २०७५ , विक्रम संवत के अनुसार 2066वाँ वर्ष है, ग्रेगोरी कैलेंडर के अनुसार यह १८ मार्च २०१८ ई को प्रारम्भ हुआ।

शुभारम्भ[संपादित करें]

'विक्रम संवत 2075' का शुभारम्भ 18 मार्च, सन 2018 को चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से है। पुराणों के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को ब्रह्मा ने सृष्टि निर्माण किया था, इसलिए इस पावन तिथि को नव संवत्सर पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। संवत्सर-चक्र के अनुसार सूर्य इस ऋतु में अपने राशि-चक्र की प्रथम राशि मेष में प्रवेश करता है। भारतवर्ष में वसंत ऋतु के अवसर पर नूतन वर्ष का आरम्भ मानना इसलिए भी हर्षोल्लासपूर्ण है, क्योंकि इस ऋतु में चारों ओर हरियाली रहती है तथा नवीन पत्र-पुष्पों द्वारा प्रकृति का नव श्रृंगार किया जाता है। लोग नववर्ष का स्वागत करने के लिए अपने घर-द्वार सजाते हैं तथा नवीन वस्त्राभूषण धारण करके ज्योतिषाचार्य द्वारा नूतन वर्ष का संवत्सर फल सुनते हैं।

शास्त्रीय मान्यता के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की तिथि के दिन प्रात: काल स्नान आदि के द्वारा शुद्ध होकर हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प और जल लेकर ओम भूर्भुव: स्व: संवत्सर- अधिपति आवाहयामि पूजयामि च इस मंत्र से नव संवत्सर की पूजा करनी चाहिए तथा नववर्ष के अशुभ फलों के निवारण हेतु ब्रह्मा जी से प्रार्थना करनी चाहिए कि 'हे भगवन! आपकी कृपा से मेरा यह वर्ष कल्याणकारी हो और इस संवत्सर के मध्य में आने वाले सभी अनिष्ट और विघ्न शांत हो जाएं।' नव संवत्सर के दिन नीम के कोमल पत्तों और ऋतुकाल के पुष्पों का चूर्ण बनाकर उसमें काली मिर्च, नमक, हींग, जीरा, मिश्री, इमली और अजवायन मिलाकर खाने से रक्त विकार आदि शारीरिक रोग शांत रहते हैं और पूरे वर्ष स्वास्थ्य ठीक रहता है।[1]

प्रमुख घटनाएँ[संपादित करें]

चैत्र (ग्रेगरियन मास - मार्च )[संपादित करें]

शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को( 18 मार्च, सन 2018)

  • 'विक्रम संवत 2075' का शुभारम्भ

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. नव संवत्सर, 'विक्रम संवत 2075'. "विक्रम संवत". भारतकोश. मूल से 18 नवंबर 2018 को पुरालेखित.