अरुण खेतरपाल

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सेकेंड लेफ्टिनेन्ट
अरुण खेतरपाल
परमवीर चक्र
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सेकेंड लेफ्टिनेन्ट अरुण खेतरपाल
जन्म 14 अक्टूबर 1950
पुणे, बॉम्बे राज्य, भारत
देहांत 16 दिसम्बर 1971 (आयु 21 वर्ष)
बरपिंड शकरगढ़ सेक्टर
निष्ठा भारत भारत
सेवा/शाखा Flag of Indian Army.svg भारतीय थलसेना
सेवा वर्ष 1971[1]
उपाधि 2nd Lieutenant Indian Army.gif सेकेंड लेफ्टिनेन्ट
सेवा संख्यांक IC-25067
दस्ता Current Regimental Cap Badge 2014-06-11 06-48.jpg 17 पूना हार्स
युद्ध/झड़पें १९७१ का भारत-पाक युद्ध
बसंतसर का युद्ध
सम्मान Param-Vir-Chakra-ribbon.svg परमवीर चक्र

सेकेण्ड लेफ्टिनेन्ट अरुण खेतरपाल, परमवीर चक्र (14 अक्टूबर 1950 – 16 दिसम्बर 1971), भारतीय सेना के एक अधिकारी थे जिन्हें दुश्मन के सामने बहादुरी के लिए भारत का सर्वोच्च सैन्य अलंकरण परमवीर चक्र मरणोपरान्त प्रदान किया गया था। खेतरपाल १९७१ के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अद्भुत पराक्रम दिखाते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए थे।[1][2]

प्रारम्भिक जीवन[संपादित करें]

अरुण खेतपाल का जन्म 14 अक्टूबर 1950 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ था। उनके पिता लेफ्टिनेंट कर्नल (बाद में ब्रिगेडियर) एम एल खेतरपाल भारतीय सेना में कोर ऑफ इंजीनियर्स अधिकारी थे। लॉरेंस स्कूल सनवार में जाने के बाद उन्होंने खुद को एक सक्षम छात्र और खिलाड़ी के रूप में प्रस्तुत किया था। खेतरपाल जून 1967 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में शामिल हुए। वह फॉक्सट्रॉट स्क्वाड्रन से संबंधित थे जहां वह 38वें पाठ्यक्रम के स्क्वाड्रन कैडेट कैप्टन थे। उनकी एनडीए संख्या 7498/एफ/38 थी वह बाद में भारतीय सैन्य अकादमी में शामिल हो गए। 13 जून 1971 में खेतपाल को 17 पूना हार्स में नियुक्त किया गया था।

सैन्य जीवन[संपादित करें]

खेतरपाल ने अपना सैन्य जीवन 13 जून 1971 को शुरू किया था और 16 दिसम्बर 1971 को भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान 17 पूना हार्स को भारतीय सेना के 47वीं इन्फैन्ट्री ब्रिगेड की कमान के अंतर्गत नियुक्त किया गया था। संघर्ष की अवधि के दौरान 47वीं ब्रिगेड शकगढ़ सेक्टर में ही तैनात थी। 6 माह के अल्प सैन्य जीवन में ही इन्होने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

सम्मान[संपादित करें]

सेकेण्ड लेफ्टिनेन्ट अरुण खेतरपाल के अद्वितीय बलिदान व समर्पण के लिए इन्हें भारत सरकार द्वारा गणतंत्र दिवस 1972 को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया जो 16 दिसम्बर 1971 से प्रभावी माना गया।[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]