राधा रमण मंदिर
| श्री राधारमण मंदिर वृन्दावन | |
|---|---|
श्री राधारमण लाल जू मन्दिर | |
राधारमण मंदिर, वृन्दावन का प्रवेश द्वार | |
| धर्म | |
| संबंधन | हिन्दू धर्म |
| ज़िला | मथुरा |
| देवता | भगवान श्रीकृष्ण मंदिर |
| त्यौहार | जन्माष्टमी, राधाष्टमी, होली, शरद पूर्णिमा |
| अवस्थिति | |
| अवस्थिति | वृन्दावन |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| देश | भारत |
| निर्देशांक | 27°35′7.335″N 77°41′55.56″E / 27.58537083°N 77.6987667°E |
| वास्तुकला | |
| शैली | राजस्थानी स्थापत्य कला] |
| निर्माता | गोपाल भट्ट गोस्वामी |
| निर्माण पूर्ण | लगभग 1542 ई. |
| ऊँचाई | 169.77 मी॰ (557 फीट) |
| वेबसाइट | |
| radharaman | |
श्री राधारमण मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के वृन्दावन नगर में स्थित एक प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है, जो श्रीकृष्ण के राधा रमण स्वरूप को समर्पित है। यह मंदिर वृन्दावन के सात प्रमुख प्राचीन मंदिरों में से एक है, जिनमें राधा वल्लभ मंदिर, राधा दामोदर मंदिर, राधा मदन मोहन मंदिर, राधा गोविंद देव मंदिर, राधा श्यामसुंदर मंदिर और राधा गोकुलानंद मंदिर भी शामिल हैं। इस मंदिर में शालीग्राम शिला से प्रकट हुए स्वयंभू श्रीकृष्ण की मूर्ति विराजमान है।[1][2][3][4]
इतिहास
[संपादित करें]राधारमण शब्द का अर्थ है "राधा का प्रियतम"। यह मंदिर लगभग 500 वर्ष पूर्व गोपाल भट्ट गोस्वामी द्वारा स्थापित किया गया था।[5] ऐसा माना जाता है कि चैतन्य महाप्रभु के विग्रह लीलासमाप्ति के बाद जब गोपाल भट्ट गोस्वामी विरह में थे, तब उन्हें स्वप्न में भगवान ने दर्शन देकर नेपाल जाकर शालग्राम शिला प्राप्त करने का निर्देश दिया।
नेपाल की काली गण्डकी नदी में स्नान करते समय उनके जलपात्र में बार-बार 12 शालग्राम शिलाएं आ गईं। एक पूर्णिमा की रात गोस्वामी जी ने उन्हें पूजन के उपरांत टोकरी से ढक दिया। अगली सुबह जब उन्होंने टोकरी हटाई, तो पाया कि एक शिला से श्रीकृष्ण की सुंदर त्रिभंग मुद्रा में मूर्ति प्रकट हो चुकी थी। उस दिन से यह मूर्ति ही राधा रमण के रूप में पूजित है।[6][7][8]
- वृन्दावन के राधारमण मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति
विशेषताएँ
[संपादित करें]- यह मूर्ति स्वयं शालग्राम से प्रकट हुई है, अतः इसे स्वयंभू स्वरूप माना जाता है।
- इस मंदिर में ठाकुर जी की मूर्ति एक ही है, किंतु उस एक मूर्ति में तीन स्वरूपों की झलक दिखाई देती है। भक्तों का मानना है कि कभी यह मूर्ति गोविंद देव जी के समान प्रतीत होती है, कभी इसका वक्ष स्थल गोपीनाथ जी की भांति दिखाई देता है, और कभी चरणों में मदन मोहन जी के विग्रह के दर्शन होते हैं। इस प्रकार, यह प्रतिमा तीनों विख्यात स्वरूपों का संगम मानी जाती है।[9]
- मंदिर में गोपाल भट्ट गोस्वामी की समाधि भी स्थित है।
- यहाँ चैतन्य महाप्रभु का "उन्नग वस्त्र" भी सुरक्षित रखा गया है।
- भोग प्रसाद केवल गोस्वामी परिवारों के पुरुष सदस्य बनाते हैं और सेवा का दायित्व भी उन्हीं के पास होता है।
- ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में लगभग 500 वर्षों से अग्नि स्वयं जल रही है और उसी अग्नि से प्रतिदिन ठाकुर जी की आरती की जाती है।[10][11]
वर्तमान व्यवस्था
[संपादित करें]मंदिर का प्रशासन और पूजा व्यवस्था गोपाल भट्ट गोस्वामी की वंश परंपरा से संबंधित गोस्वामी परिवारों द्वारा की जाती है।[12][13][14]
संबंधित स्थल
[संपादित करें]- राधा वल्लभ मंदिर
- बाँके बिहारी मंदिर
- राधा दामोदर मंदिर
- राधा मदन मोहन मंदिर
- गोविंद देव जी मंदिर
- निधिवन
- प्रीतम मंदिर
- वृन्दावन चन्द्रोदय मंदिर
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "The history of Sri Radha Raman Temple". salagram.net. मूल से से 11 अक्तूबर 2008 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2025-05-05.
- ↑ Anand, D. (1992). Krishna: The Living God of Braj (अंग्रेज़ी भाषा में). Abhinav Publications. p. 103. ISBN 978-81-7017-280-2.
- ↑ "वृंदावन के राधा रमण मंदिर से जुड़ी रोचक बातें". HerZindagi. अभिगमन तिथि: 5 मई 2025.
- ↑ "दिल्ली के पास मथुरा-वृंदावन तो देखा होगा, अब देखिए यहां के वो 7 मंदिर जहां श्री कृष्ण खुद बरसाते हैं कृपा". Navbharat Times. अभिगमन तिथि: 6 मई 2025.
- ↑ "Home". Sri Radha Raman (अंग्रेज़ी भाषा में). मूल से से 15 जून 2017 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2025-05-05.
- ↑ Hawley, John C. (1992). At Play with Krishna: Pilgrimage Dramas From Brindavan. Motilal Banarsidass. pp. 4–5. ISBN 81-208-0945-9.
- ↑ Valpey, Kenneth Russell (2006). Attending Kṛṣṇa's image: Caitanya Vaiṣṇava mūrti-sevā as devotional truth. Routledge. p. 53. ISBN 0-415-38394-3.
- ↑ "गंडक नदी की शालग्राम शिला से प्रकट हुए राधारमण लाल जू". दैनिक जागरण. अभिगमन तिथि: 5 मई 2025.
- ↑ "वृंदावन के राधा रमण मंदिर से जुड़ी रोचक बातें". HerZindagi. अभिगमन तिथि: 5 मई 2025.
- ↑ "होली 2024: मथुरा के राधा रमण मंदिर में रंगों में भीगे श्रद्धालु, 500 सालों से जल रही अग्नि". Moneycontrol Hindi. अभिगमन तिथि: 5 मई 2025.
- ↑ "अविश्वसनीय! मथुरा के इस मंदिर में 500 सालों से नहीं जलाई गई माचिस, फिर भी हर दिन जलती है आग". News18 हिंदी. अभिगमन तिथि: 6 मई 2025.
- ↑ "Shrivatsa Goswami". rfp.org (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2025-05-05.[मृत कड़ियाँ]
- ↑ "Interfaith Dialogue and Cooperation". interfaithharmonyweek.info. मूल से से 20 सितंबर 2024 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2025-05-05.
- ↑ "श्री राधा रमण मंदिर: वृन्दावन का पवित्र तीर्थस्थल". 2024-08-06. अभिगमन तिथि: 2025-05-05.