राजेन्द्र प्रसाद सिंह

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राजेन्द्र प्रसाद सिंह (12 जुलाई, 1930 – 8 नवम्बर, 2007) नवगीत के प्रवर्तक तथा कवि हैं। उन्होने 'नयी कविता' के समानांतर रचे जा रहे गीतों की भिन्न प्रकृति एवं रचना विधान को रेखांकित करने वाले नए गीतों के प्रथम संकलन 'गीतांगिनी' (1958) का संपादन किया और उसकी भूमिका में 'नवगीत' के रूप में नए गीतों का नामकरण एवं लक्षण निरूपित किया। कालान्तर में अनेक कविता संग्रहों (भूमिका, मादिनी, दिग्वधू,संजीवन कहाँ, डायरी के जन्मदिन, शब्दयात्रा, प्रस्थानबिंदु इत्यादि) के साथ-साथ उनके कई स्वतन्त्र नवगीत संग्रह ('आओ खुली बयार', 'रात आँख मूँद कर जगी', 'भरी सड़क पर' आदि ) भी प्रकाशित हुए और जीवन के उत्तरार्ध में उन्होंने अनेक जनगीतों की भी रचना की जो 'गज़र आधी रात का' एवं 'लाल नील धारा' के नाम से प्रकाशित हैं। वे अनुवादक भी थे और उनकी हिन्दी कविताओं का ही अँग्रेजी में स्वानूदित एक संग्रह ‘सो हीयर आइ स्टैंड’ (बीचग्रोव 1973) कनाडा से प्रकाशित हुआ जिसकी एक रचना ‘मैन: ए डिफिनिशन’ लन्दन से प्रकाशित अँग्रेजी-भाषी समाज की कविताओं की एक एन्थोलोजी ‘मेनी पीपुल्स मेनी वॉयसेज’ (1974, हचिन्सन) में संकलित की गई। उनकी ‘जनवादी लेखन और रचनास्थिति’, ‘साहित्य की पारिस्थिकी’ एवं ‘भारतीय संगीत का समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य’ आदि प्रकाशित कृतियाँ हैं।[1][2][3]


सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]