राजस्थान के लोकदेवता

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यह सूची राजस्थान के लोकदेवताओं की है।

बाबा रामदेव[संपादित करें]

उंडूकाश्मेर (बाड़मेर) राजस्थान,गुजरात,उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश,पाकिस्तान अनेक जगह पर पूजे जाने वाले बाबा रामदेव के कई नाम है। अन्य नाम = रुणिचा रा धणी, रामसापीर ,बाबा रामदेव। अश्वारूढ बाबा रामदेव के एक हाथ में माला और दूसरे में तंदूरा शक्ति और भक्ति के प्रतीक हैं। माता पिता के नाम = अजामिल जी, मैणादे। रामदेव जी का विवाह है अमरकोट के सोढा राजपूत दल्ले सिंह की पुत्री नेतल्दे (निहालदे) के साथ हुआ था। अवतार = कृष्ण का ,बड़े भाई वीरमदेव का बलराम का और हिंदुओं के अनुसार बाबा का अवतार विष्णु का है । इनके पिता तंवर राजपूत थे । रामदेवरा ( रुणिचा ) मैं समाधि स्थल पर भाद्रपद शुक्ल द्वितीय से एकादशी तक विशाल मेले का आयोजन होता है। इसमें भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को बाबे री बीज कहते हैं और इसे अवतार की तिथि भी मानते हैं । इस मेले की दो विशेषताएं हैं एक तो सांप्रदायिक सद्भाव और दूसरी कामडिया पंथ की स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला तेरहताली नृत्य। बाबा रामदेव के चमत्कारों को पर्चा देना कहते हैं। रामदेव जी कि एक धर्म बहन भी थी जिसका नाम डाली बाई था, ने रामदेव जी से 1 दिन पहले जीवित समाधि ली थी जहां पर वर्तमान में इनका मंदिर भी है ।डाली बाई मेघवाल जाति की थी और रामदेव जी के मेघवाल भक्तजनों को रिखिया कहते हैं। रुणेचा में रामदेव जी के पुजारी तवर राजपूत होते हैं। रात्रि जागरण को जम्मा कहते हैं। रामदेव जी का घोड़ा नीला था। रामदेव जी एकमात्र ऐसे लोक देवता है जो कवि भी है, इनकी रचित चौबीस बानिया प्रसिद्ध है। इनके भक्तों द्वारा गाए जाने वाले भजनों को ब्यावले कहते हैं रामदेव जी के मंदिर को देवरा कहते हैं और इनकी ध्वजा श्वेत अथवा पंचरंगी होती है जिन्हें नैजा कहते हैं। भाद्रपद सुदी एकादशी संवत 1515 को इन्होंने रुणिचा के राम सरोवर के किनारे जीवित समाधि ली थी। रामदेव जी के अन्य मंदिर = मसूरिया पहाड़ी (जोधपुर), बिराटिया (Pali )सुरता, खेड़ा (चित्तौड़गढ़)। छोटा रामदेवरा गुजरात में स्थित है। सातलमेर (पोकरण ) मे रामदेव जी ने भैरव नामक तांत्रिक का वध कर अपनी भतीजी के विवाह में दहेज के रूप में हमीर को दिया था।

गुरु जम्भेश्वर[संपादित करें]

गुरु जम्भेश्वर[1] का जन्म नागौर जिले के पीपासर ग्राम में विक्रम सम्वत १५०८ में हुआ था।[2]

गोगाजी[संपादित करें]

- एकता व सांप्रदायिक सद़भावना का प्रतीक धार्मिक पर्व गोगामेडी (राजस्थान) में गोगाजी की समाधि स्थल पर मेला लाखों भक्तों के आकर्षण का केंद्र है। गोगामेडी ,हनुमानगढ पत्नी:- केलंम दे , माता जी बाछल दे .गुरु गौराक्नाथ , मंदीर .. गोगामेडी नोव्हर , मेला भाद्र्पध क्रिश्नाव्न्मी ,,, घोडा ..लीला बप्पा ,,उपनाम ,, जहारवीर ,, नागराज का अवतार , गायो के रक्षक , जन्म स्थान:- ददरेवा(चूरू) माता:-बाछल दे पत्नी:-केलं दे बचपन का नाम गुग्गा उपाधि जाहरपीर(साक्षात-देवता) यह उपाधि महमुँद गजनवी दे दी।पुजारी हिन्दू तथा मुस्लिम एक माह हिन्दू तथा ग्यारह माह मुस्लिम समुदाय से होते है।इनका मंदिर मकबरे नुमा है जो नीचे से हिन्दू शैली तथा ऊपर से मुगल शैली से निर्मित है।मंदिर निर्माण फिरोजशाह तुगलक तथा गंगासिंह ने करवाया था।

जीणमाता[संपादित करें]

- जयपुर बीकानेर मार्ग पर सीकर से 11 कि॰मी॰ दूर गोरिया से जीण माता मंदिर केलिए मार्ग है। सीकर जीण माता की अष्टभुजी प्रतिमा है इस कि जयंती प्रतिवर्ष चैत्र ओर आश्विन के नवरात्रों में मेला भरता है यह चौहानों की कुलदेवी है जिन घांघू गांव बसाने वाले गंघराय की पुत्री ओर हर्ष की बहिन थी

शाकम्भरी माता[संपादित करें]

सांभर चौहानो की इष्ट देवी शाकम्भरी माता का मंदिर साम्भर कस्बे के पास झील मे ही एक पहाड़ी पर है लोकदेवी शाकम्भरी माता को यहाँ कई संप्रदायों के लोग पूजते हैं इनका मुख्य मंदिर सहारनपुर के पास शिवालिक हिमालय मे है

सीमल माता[संपादित करें]

बसंतगढ़, सिरोही

हर्षनाथ जी[संपादित करें]

सीकर

केसरिया जी[संपादित करें]

धुवेल (उदयपुर)

मल्लीनाथ जी[संपादित करें]

तिलवाडा , बाडमेर

शिला देवी[संपादित करें]

आमेर

== कैला देवी ==माता कैलादेवी का मंदिर करौली जिले के कैलादेवी नामक स्थान पर है। यह यादव, गुर्जर समाज और मीणाओ की अराध्य देवी के रूप में विख्यात है।

ज्वाला देवी[संपादित करें]

जोबनेर

कल्ला देवी[संपादित करें]

सिवाना

तेजा जी[संपादित करें]

जन्म-खड़नाल नागौर इनकी मृत्यू सर्प दंश से सुरसुरा (अजमेर) नामक स्थान पर हुई। परबतसर (नागौर) में भाद्रपद शुक्ल दशमी को इनका मेला लगता है।[3]

पाबूजी[संपादित करें]

कोलुमंड,जन्म 1299ईस्वी पिताजी धांदल जी , माता जी कमला देवी , पत्नी फ्हुलम दे, सुप्यार दे, घोड़ी केसर कलमी , या लड़ाई की जड़ , मेला चेत्र अमावश्या , उपनाम :- लक्ष्मण के अवतार , हाड फाड़ के देवता ,

खैरतल जी[संपादित करें]

अलवर

करणी माता[संपादित करें]

देशनोक (बीकानेर) चूहो की देवी

राजेश्वरी माता[संपादित करें]

  1. Bishnoi, Bishnoi (22/08/2018). [www.hanubishnoi.com "Hanu"] जाँचें |url= मान (मदद). www.hanubishnoi.com. |date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  2. Singh, K. S. (1998). Rajasthan (अंग्रेज़ी में). Popular Prakashan. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788171547661. मूल से 29 जून 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 29 जून 2018.
  3. Kamvara Tejaji : tarja rekat. Fulchand Bookseller, 19. मूल से 29 जून 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 29 जून 2018.