मखाना

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

मखाना
Euryale ferox.jpg
वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत: पादप
विभाग: मैग्नोलियोफाइटा
वर्ग: मैग्नोलियोप्सीडा
गण: Nymphaeales
कुल: Nymphaeaceae
वंश: Euryale
सैलिस्बरी., १८०५
जाति: E. ferox
द्विपद नाम
यूरेल फ़ेरॉक्स
सैलिस्बरी., १८०५
Surface-floating leaf of Euryale ferox

इसे भारत के कई छेत्रों में लावा भी कहते हैं।तालाब, झील, दलदली क्षेत्र के शांत पानी में उगने वाला मखाना पोषक तत्वों से भरपूर एक जलीय उत्पाद है। मखाने के बीज को भूनकर इसका उपयोग मिठाई, नमकीन, खीर आदि बनाने में होता है। मखाने में 9.7% आसानी से पचनेवाला प्रोटीन, 76% कार्बोहाईड्रेट, 12.8% नमी, 0.1% वसा, 0.5% खनिज लवण, 0.9% फॉस्फोरस एवं प्रति १०० ग्राम 1.4 मिलीग्राम लौह पदार्थ मौजूद होता है। इसमें औषधीय गुण भी होता है।[1]

उत्पादन[संपादित करें]

बिहार में मिथिला के दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, सुपौल, सीतामढ़ी, पूर्णिया, कटिहार आदि जिलों में मखाना का सार्वाधिक उत्पादन होता है। मखाना के कुल उत्पादन का ८८% बिहार में होता है।[2]

अनुसंधान[संपादित करें]

28 फ़रवरी 2002 को दरभंगा के निकट बासुदेवपुर में राष्ट्रीय मखाना शोध केंद्र की स्थापना की गयी। दरभंगा में स्थित यह अनुसंधान केंद्र भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्य करता है। दलदली क्षेत्र में उगनेवाला यह पोषक भोज्य उत्पाद के विकाश एवं अनुसंधान की प्रबल संभावनाएँ है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. [1] Archived 2006-04-08 at the Wayback Machine दरभंगा जिले में मखाना उद्योग पर जानकारी
  2. [2] Archived 2009-10-06 at the Wayback Machine उद्योग विभाग, बिहार सरकार द्वारा उत्पादन पर जारी तथ्य

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]