बदायूँ

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बदायूँ
Budaun
बदायूँ जंक्शन
बदायूँ जंक्शन
बदायूँ की उत्तर प्रदेश के मानचित्र पर अवस्थिति
बदायूँ
बदायूँ
उत्तर प्रदेश में स्थिति
निर्देशांक: 28°03′N 79°07′E / 28.05°N 79.12°E / 28.05; 79.12निर्देशांक: 28°03′N 79°07′E / 28.05°N 79.12°E / 28.05; 79.12
ज़िलाबदायूँ ज़िला
राज्यउत्तर प्रदेश
देशFlag of India.svg भारत
ऊँचाई164 मी (538 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • कुल3,69,221
भाषाएँ
 • प्रचलितहिन्दी
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)
पिनकोड243601
दूरभाष कोड05832
वाहन पंजीकरणUP-24
लिंगानुपात907 स्त्री/1000 पुरुष
साक्षरता दर73.00%
वेबसाइटhttp://www.badaun.nic.in/

बदायूँ (Budaun) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बदायूँ ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है और एक लोकसभा निर्वाचनक्षेत्र है। बदायूँ गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है।[1][2]

इतिहास व स्थापना[संपादित करें]

11वीं शती के एक अभिलेख में, जो बदायूँ से प्राप्त हुआ है, इस नगर का तत्कालीन नाम वोदामयूता कहा गया है। इस लेख से ज्ञात होता है कि उस समय बदायूँ में पांचाल देश की राजधानी थी। बर्तमान में बदायूं जिला , रूहेलखण्ड में आता है, रूहेलखण्ड में बरेली , बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, मुरादाबाद,सम्भल,अमरोहा,रामपुर,बिजनौर जिले सामिल है।

यह जान पड़ता है कि अहिच्छत्रा नगरी, जो अति प्राचीन काल से उत्तर पांचाल की राजधानी चली आई थी, इस समय तक अपना पूर्व गौरव गँवा बैठी थी। एक किंवदन्ती में यह भी कहा गया है कि, इस नगर को अहीर सरदार राजा बुद्ध ने 10वीं शती में बसाया था।[3] 13 वीं शताब्दी में यह दिल्ली के मुस्लिम राज्य की एक महत्त्वपूर्ण सीमावर्ती चौकी था और 1657 में बरेली द्वारा इसका स्थान लिए जाने तक प्रांतीय सूबेदार यहीं रहता था। 1838 में यह ज़िला मुख्यालय बना। कुछ लोगों का यह मत है कि बदायूँ की नींव अजयपाल ने 1175 ई. में डाली थी। राजा लखनपाल को भी नगर के बसाने का श्रेय दिया जाता है।

गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए राजा भगीरथ ने कहां तपस्या की थी। यहां गंगा के कछला घाट से कुछ ही दूर पर बूढ़ी गंगा के किनारे एक प्राचीन टीले पर अनूठी गुफा है। कपिल मुनि आश्रम के बगल स्थित इस गुफा को भगीरथ गुफा के नाम से जानते हैं। पहले यहां राजा सगर के 60 हजार पुत्रों की भी मूर्तियां थी, जो कुछ साल पहले चोरी चली गईं। करीब ही राजा भगीरथ का एक अति जीर्ण-शीर्ण मंदिर है, जहां अब सिर्फ चरण पादुका बची हैं। अध्यात्मिक दृष्टि से सूकरखेत (बाराह क्षेत्र) का वैसे भी बहुत महत्व है। बदायूं के कछला गंगा घाट से करीब पांच कोस की दूरी पर कासगंज की ओर बढ़कर एक बोर्ड दिखाई पड़ता है, जिस पर लिखा है भगीरथ गुफा। एक गांव है होडलपुर। थोड़ी दूर जंगल के बीच एक प्राचीन टीला दिखाई पड़ता है। बरगद का विशालकाय वृक्ष और अन्य पेड़ों के झुरमुटों बीच मठिया है। इसी टीले पर स्थित है कपिल मुनि आश्रम और भगीरथ गुफा। लाखोरी ईंटें से बनी एक मठिया के द्वार पर हनुमानजी की विशालकाय मूर्ति लगी है। भीतर प्रवेश करने पर एक मूर्ति और दिखाई पड़ती है, इसे स्थानीय लोग कपिल मुनि की मूर्ति बताते हैं। मूर्ति के बगल से ही सुरंगनुमा रास्ता अंदर को जाता है, जिसमें से एक व्यक्ति ही एक बार में प्रवेश कर सकता है। पांच मीटर भीतर तक ही सुरंग की दीवारों पर लाखोरी ईटें दिखाई पड़ती हैं। इसके बाद शुरू हो जाती है कच्ची अंधेरी गुफा। सुरंगनुमा रास्ते से भीतर जाने के बाद एक बड़ी कोठरी मिलती है, जहां एक शिवलिंग भी कोने में है। कोठरी के बाद फिर सुरंग और फिर कोठरी। पहले गंगा इसी टीले के बगल से होकर बहती थीं। अभी भी गंगा की एक धारा समीप से होकर बहती है, जिसे बूढ़ी गंगा कहते हैं। टीले के नीचे स्थित मंदिर से दुर्लभ मुखार बिंदु शिवलिंग भी चोरी चला गया था। बाद में पुलिस ने पाली (अलीगढ़) के एक तालाब से शिवलिंग तो बरामद कर लिया, लेकिन सगर पुत्रों की मूर्तियों का अभी भी कोई पता नहीं है। इसी टीले पर तीन समाधि भी हैं, इनमें से एक को गोस्वामी तुलसीदास के गुरु नरहरिदास की समाधि कहते हैं।

नीलकंठ महादेव का प्रसिद्ध मन्दिर, शायद लखनपाल का बनवाया हुआ था। ताजुलमासिर के लेखक ने बदायूँ पर कुतुबुद्दीन ऐबक के आक्रमण का वर्णन करते हुए इस नगर को हिन्द के प्रमुख नगरों में माना है। बदायूँ के स्मारकों में जामा मस्जिद भारत की मध्य युगीन इमारतों में शायद सबसे विशाल है इसका निर्माता इल्तुतमिश था, जिसने इसे गद्दी पर बैठने के बारह वर्ष पश्चात अर्थात 1222 ई. में बनवाया था।

आबादी[संपादित करें]

2011 की जनगणना के अनुसार, बदायूं शहर की आबादी 369,221 (188,475 पुरुष 180,746 महिला = 1000/907), 39,613 (12.3%) थी, जिनकी उम्र 0 से 6 वर्ष थी। वयस्क साक्षरता दर 73.% थी। शहर में व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषा हिंदी और उर्दू है जिसमें अंग्रेजी का उपयोग बहुत कम किया जाता है, और शहर में पंजाबी भी एक महत्वपूर्ण भाषा है।[4]

रचना-सौंदर्य[संपादित करें]

यहाँ की जामा मस्जिद प्रायः समान्तर चतुर्भुज के आकार की है, किन्तु पूर्व की ओर अधिक चौड़ी है। भीतरी प्रागंण के पूर्वी कोण पर मुख्य मस्जिद है, जो तीन भागों में विभाजित है। बीच के प्रकोष्ठ पर गुम्बद है। बाहर से देखने पर यह मस्जिद साधारण सी दिखती है, किन्तु इसके चारों कोनों की बुर्जियों पर सुन्दर नक़्क़ाशी और शिल्प प्रदर्शित है। बदायूँ में सुल्तान अलाउद्दीन ख़िलज़ी के परिवार के बनवाए हुए कई मक़बरे हैं।

प्राचीन इमारतों[संपादित करें]

अलाउद्दीन ने अपने जीवन के अन्तिम वर्ष बदायूँ में ही बिताए थे। अकबर के दरबार का इतिहास लेखक अब्दुलक़ादिर बदायूँनी यहाँ अनेक वर्षों तक रहा था और बदायूँनी ने इसे अपनी आँखों से देखा। बदायूँनी का मक़बरा बदायूँ का प्रसिद्ध स्मारक है। इसके अतिरिक्त इमादुल्मुल्क की दरगाह (पिसनहारी का गुम्बद) भी यहाँ की प्राचीन इमारतों में उल्लेखनीय है।

कृषि व उद्योग[संपादित करें]

बदायूँ में आसपास के क्षेत्रों में चावल, गेंहूं, जौ, बाजरा और सफ़ेद चने की उपज होती है। यहाँ लघु उद्योग भी हैं।बदायूँ मैन्था के लिए मशहूर है देश का लगभग ४०% फ़ीसद मैन्था यहीं होता है इसलिए इसे भारत का मैन्था शहर भी कहते हैं

राजनीति[संपादित करें]

संघमित्रा मौर्य, बदायूं निर्वाचन क्षेत्र के सांसद हैं और स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी हैं।[5]

शिक्षा[संपादित करें]

यहां पे चार डिग्री कॉलेज हैं जैसे अगर हम डिग्री कॉलेज पर नजर डालें तो नेहरु मेमोरियल शिवनारायण दास डिग्री कॉलेज , राजकीय डिग्री कॉलेज , राजकीय महिला डिग्री कॉलेज और आसिम मेमोरीयल डिग्री कॉलेज हैं ओर भी यहां कई कॉलेज हैं लेकिन सरकार ने बदायूं को एक मेडिकल कॉलेज भी दिया यहां एक मेडिकल कॉलेज भी है। यहाँ हाफ़िज मुहम्मद सिद्दीकी इसलामिया इंटर कॉलेज है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Uttar Pradesh in Statistics," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716
  2. "Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance Archived 23 अप्रैल 2017 at the वेबैक मशीन.," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975
  3. District Budaun Government of Uttar Pradesh
  4. "District Census Handbook" (PDF). CensusIndia.gov. मूल (PDF) से 14 नवंबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 मई 2020.
  5. "DR. SANGHMITRA MAURYA : Bio, Political life, Family & Top stories". The Times of India.