नामवर सिंह

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नामवर सिंह (जन्म: 28 जुलाई 1926 बनारस, उत्तर प्रदेश) हिन्दी के शीर्षस्थ शोधकार-समालोचक, निबन्धकार तथा मूर्द्धन्य सांस्कृतिक-ऐतिहासिक उपन्यास लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी के प्रिय शिष्‍य रहे हैं। अत्यधिक अध्ययनशील तथा विचारक प्रकृति के नामवर सिंह हिन्दी में अपभ्रंश साहित्य से आरम्भ कर निरन्तर समसामयिक साहित्य से जुड़े हुए आधुनिक अर्थ में विशुद्ध आलोचना के प्रतिष्ठापक तथा प्रगतिशील आलोचना के प्रमुख हस्‍ताक्षर हैं।

जीवन[संपादित करें]

नामवर सिंह का जन्म 28 जुलाई 1926 ई• को बनारस (वर्तमान में चंदौली ज़िला) के एक गाँव जीयनपुर में हुआ था। लम्बे समय तक 1 मई 1927 को उनकी जन्म-तिथि के रूप में माना जाता रहा है और नामवर जी स्वयं भी अपना जन्म-दिवस इसी तारीख को मनाते रहे हैं, लेकिन यह वस्तुतः स्कूल में नामांकन करवाते वक्त लिखवायी गयी तारीख थी।[1] उन्होंने हिन्दी साहित्य में एम०ए० व पी०एचडी० करने के पश्चात् काशी हिंदू विश्वविद्यालय में अध्यापन किया लेकिन 1959 में चकिया चन्दौली के लोकसभा चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार रूप में चुनाव लड़ने तथा असफल होने के बाद उन्हें बी.एच.यू छोड़ना पड़ा। बी.एच.यू के बाद डॉ• नामवर सिंह ने क्रमश: सागर विश्वविद्यालय और जोधपुर विश्वविद्यालय में भी अध्यापन किया। लेकिन बाद में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में उन्होंने काफी समय तक अध्यापन कार्य किया। अवकाश प्राप्त करने के बाद भी वे उसी विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा केन्द्र में इमेरिटस प्रोफेसर रहे। वे हिन्दी के अतिरिक्त उर्दू, बाङ्ला एवं संस्कृत भाषा भी जानते हैं।

प्रकाशित कृतियाँ[संपादित करें]

  1. बक़लम ख़ुद - 1951ई. (व्यक्तिव्यंजक निबन्धों का यह संग्रह लम्बे समय तक अनुपलब्ध रहने के बाद अब (2013 ई. में) भारत यायावर के सम्पादन में आयी पुस्तक प्रारम्भिक रचनाएँ में नामवर जी की उपलब्ध कविताओं तथा विविध विधाओं की गद्य रचनाओं के साथ संकलित होकर पुनः सुलभ हो गयी है।)
  • शोध
  1. हिन्दी के विकास में अपभ्रंश का योग - 1952 (पुनर्लिखित रूप में 1954 ई.)
  2. पृथ्वीराज रासो की भाषा - 1956 (अब संशोधित संस्करण 'पृथ्वीराज रासो: भाषा और साहित्य' नाम से उपलब्ध)
  • आलोचना
  1. आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियाँ - 1954
  2. छायावाद - 1955
  3. इतिहास और आलोचना - 1957
  4. कहानी : नयी कहानी - 1964
  5. कविता के नये प्रतिमान - 1968
  6. दूसरी परम्परा की खोज - 1982
  7. वाद विवाद और संवाद - 1989
  • साक्षात्कार
  1. कहना न होगा - 1994
  2. बात बात में बात - 2006
  • पत्र-संग्रह
  1. काशी के नाम - 2006
  • व्याख्यान
  1. आलोचक के मुख से - 2005
  • नयी सम्पादित शृंखला की आठ पुस्तकें

आशीष त्रिपाठी के सम्पादन में आयीं आठ पुस्तकों में क्रमशः दो लिखित की हैं, दो लिखित+वाचिक की, दो वाचिक की तथा दो साक्षात्कार एवं संवाद की :-

  1. कविता की ज़मीन और ज़मीन की कविता - 2010
  2. हिन्दी का गद्यपर्व - 2010
  3. प्रेमचन्द और भारतीय समाज - 2010
  4. ज़माने से दो दो हाथ - 2010
  5. साहित्य की पहचान - 2012
  6. आलोचना और विचारधारा - 2012
  7. सम्मुख - 2012
  8. साथ साथ - 2012

इनके अतिरिक्त नामवर जी के जे.एन.यू के क्लास नोट्स भी उनके तीन छात्रों -- शैलेश कुमार, मधुप कुमार एवं नीलम सिंह के सम्पादन में नामवर के नोट्स नाम से प्रकाशित हुए हैं।

नामवर जी का अब तक का सम्पूर्ण लेखन तथा उपलब्ध व्याख्यान भी इन पुस्तकों में शामिल है। बाद में आयीं दो पुस्तकें 'आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की जययात्रा' तथा 'हिन्दी समीक्षा और आचार्य शुक्ल' वस्तुतः पूर्व प्रकाशित सामग्रियों का ही एकत्र प्रस्तुतिकरण हैं।

सम्पादन कार्य[संपादित करें]

अध्यापन एवं लेखन के अलावा उन्होंने १९६५ से १९६७ तक जनयुग (साप्ताहिक) और १९६७ से १९९० तक आलोचना (त्रैमासिक) नामक दो हिन्दी पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया।

  • सम्पादित पुस्तकें
  1. पुरानी राजस्थानी
  2. चिन्तामणि भाग-3 (1983)
  3. कार्ल मार्क्स : कला और साहित्य चिन्तन (अनुवादक- गोरख पांडेय)
  4. नागार्जुन : प्रतिनिधि कविताएँ
  5. मलयज की डायरी (तीन खण्डों में)
  6. आधुनिक हिन्दी उपन्यास भाग-2
  7. रामचन्द्र शुक्ल रचनावली (सह सम्पादक - आशीष त्रिपाठी)
इनके अलावा स्कूली कक्षाओं के लिए कई पुस्तकें तथा कुछ अन्य पुस्तकें भी सम्पादित।

नामवर जी पर केन्द्रित साहित्य[संपादित करें]

  1. आलोचक नामवर सिंह (1977) - सं• रणधीर सिन्हा
  2. 'पहल' का विशेषांक - मई 1988 ई. - सं.ज्ञानरंजन, कमला प्रसाद (यह विशेषांक पुस्तक रूप में भी प्रकाशित हुआ, परन्तु लम्बे समय से अनुपलब्ध है।) इसके अलावा पूर्वग्रह (अंक-44-45, 1981ई.) तथा दस्तावेज (अंक-52, 1991) के अंक भी नामवर जी पर ही केन्द्रित थे।
  3. नामवर के विमर्श (1995) - सं.सुधीश पचौरी (पहल, पूर्वग्रह, दस्तावेज आदि पत्रिकाओं में नामवर जी पर प्रकाशित आलोचनात्मक आलेखों में कुछ और नयी सामग्री जोड़कर तैयार पुस्तक)
  4. नामवर सिंह : आलोचना की दूसरी परम्परा (2002) - 'वसुधा' का विशेषांक (पुस्तक रूप में वाणी प्रकाशन से)
  5. आलोचना के रचना पुरुष : नामवर सिंह (2003) - सं• भारत यायावर (पुस्तक रूप में वाणी प्रकाशन से)
  6. नामवर की धरती (2007) - लेखक - श्रीप्रकाश शुक्ल (आधार प्रकाशन, पंचकूला हरियाणा)
  7. जे.एन.यू में नामवर सिंह (2009) - सं• सुमन केसरी
  8. 'पाखी' का विशेषांक (अक्टूबर 2010) - सं• प्रेम भारद्वाज (पुस्तक रूप में 'नामवर सिंह : एक मूल्यांकन' नाम से सामयिक प्रकाशन से)।
  9. 'बहुवचन' का विशेषांक (अंक-50) - 'हिन्दी के नामवर' शीर्षक से (पुस्तक रूप में अनन्य प्रकाशन, शाहदरा, दिल्ली से)।

महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां[संपादित करें]

नामवर सिंह महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति (चांसलर) होने से पहले राजा राममोहन राय पुस्तकालय प्रतिष्ठान के अध्यक्ष (1993-96) भी रह चुके हैं।

सम्मान[संपादित करें]

  1. साहित्य अकादमी पुरस्कार - 1971[2]"कविता के नये प्रतिमान" के लिए
  2. शलाका सम्मान हिंदी अकादमी, दिल्ली की ओर से
  3. 'साहित्य भूषण सम्मान' उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से
  4. शिखर सम्मान - 2010 ('पाखी' तथा इंडिपेंडेंट मीडिया इनिशिएटिव सोसायटी की ओर से)
  5. महावीरप्रसाद द्विवेदी सम्मान - 21 दिसम्बर 2010

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. नामवर होने का अर्थ (व्यक्तित्व एवं कृतित्व), भारत यायावर, किताबघर प्रकाशन, नयी दिल्ली; संस्करण-2012; पृ.32.
  2. डॉ॰ गिरिराज शरण अग्रवाल एवं डॉ॰ मीना अग्रवाल हिन्दी साहित्यकार सन्दर्भ कोश (दूसरा भाग) २००६ हिन्दी साहित्य निकेतन, बिजनौर (उ०प्र०) ISBN 81-85139-29-6 पृष्ठ १८७

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]