जनजातीय सम्मान

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जनजातीय सम्मान
रानी दुर्गावती राष्ट्रीय सम्मान, वीर शंकर शाह-रघुनाथ शाह राष्ट्रीय सम्मान, ठक्कर बापा राष्ट्रीय सम्मान एवं जननायक टंट्या भील राज्य स्तरीय सम्मान
वर्णन जनजातीय समाज की विशिष्ट विभूतियों के रचनात्मक अवदान से समाज को परिचित कराना
देश भारत

जनजातीय सम्मान ,मध्यप्रदेश शासन, आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा रानी दुर्गावती राष्ट्रीय सम्मान, वीर शंकर शाह-रघुनाथ शाह राष्ट्रीय सम्मान, ठक्कर बापा राष्ट्रीय सम्मान एवं जननायक टंट्या भील राज्य स्तरीय सम्मान वर्ष 2008 से स्थापित हैं[1]। सम्मान की स्थापना का उद्देश्य जनजातीय समाज की विशिष्ट विभूतियों के रचनात्मक अवदान से समाज को परिचित कराना है।

चयन के मापदंड[संपादित करें]

पुरस्कार[संपादित करें]

मध्यप्रदेश के अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों की नि:स्वार्थ सेवा के लिए व्यक्ति/स्वयंसेवी संस्था को अनुसूचित जाति कल्याण विभाग द्वारा यह राज्य स्तरीय सम्मान दिया जाएगा। इस राज्य स्तरीय सम्मान के अंतर्गत रुपये 1.00 लाख की सम्मान निधि एवं प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाएगी।

रानी दुर्गावती राष्ट्रीय सम्मान[संपादित करें]

यह सम्मान आदिवासी एवं पारम्परिक सृजनात्मक कला, शिल्प, समाज सेवा, प्रशासन में अद्वितीय उपलब्धि एवं योगदान के लिए आदिवासी महिला को दिया जाता है। इस राष्ट्रीय सम्मान के अन्तर्गत रुपये 2 लाख की सम्मान निधि एवं प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाती है। यह सम्मान किसी एक कृति, रचना या उपलब्धि के लिए न होकर सुदीर्घ साधना एवं उपलब्धि के लिए दिया जाता है।

प्राप्तकर्ता[संपादित करें]

वर्ष 2008- श्रीमती रोज़ केरकेट्टा, झारखण्ड सम्मानित।

वर्ष 2009- श्रीमती भूरी बाई, झाबुआ एवं श्रीमती दुर्गा बाई व्याम, सुनपुरी, डिण्डौरी संयुक्त रूप से सम्मानित।

वर्ष 2010- प्रक्रियाधीन।

वीर शंकर शाह-रघुनाथ शाह राष्ट्रीय सम्मान[संपादित करें]

यह सम्मान भारतीय साहित्य में जनजातीय जीवन की सांस्कृतिक परंपरा और विशिष्टताओं पर लेखन के लिए तथा आदिवासी पारम्परिक कलाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय साधना के लिए दिया जाता है। इस राष्ट्रीय सम्मान के अंतर्गत रुपये 2 लाख की सम्मान निधि एवं प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाती है। यह सम्मान किसी कृति, रचना या उपलब्धि के लिए न होकर सुदीर्घ साधाना एवं उपलब्धि के लिए दिया जाता है।

प्राप्तकर्ता[संपादित करें]

वर्ष 2008- श्री किनफाम सिं नोंगकिनरिह, मेघालय सम्मानित।

वर्ष 2009- श्री जिव्या सोमा माषे, महाराष्ट्र एवं डॉ. महेन्द्र कुमार मिश्रा, भुवनेश्वर को संयुक्त रूप से। (घोषणा)

वर्ष 2010- प्रक्रियाधीन।

ठक्कर बापा राष्ट्रीय सम्मान[संपादित करें]

यह सम्मान गरीब, पीड़ित, पिछड़े आदिवासी समुदाय की ममतापूर्ण सेवा एवं सुदीर्घ साधाना के लिए व्यक्ति/संस्था को दिया जाता है। इस राष्ट्रीय सम्मान के अन्तर्गत रुपये 2 लाख की सम्मान निधि एवं प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाती है। यह सम्मान किसी एक कृति या उपलब्धि के लिए न होकर सुदीर्घ साधना एवं उपलब्धि के लिए दिया जाता है।

प्राप्तकर्ता[संपादित करें]

वर्ष 2008- स्वामी विवेकानन्द मेडिकल मिशन , केरल सम्मानित।

वर्ष 2009- वनबंधु परिषद, कोलकाता (घोषणा)

वर्ष 2010- प्रक्रियाधीन।

जननायक टंट्या भील राज्य स्तरीय सम्मान[संपादित करें]

यह सम्मान शिक्षा और/या खेल गतिविधियों में उल्लेखनीय साधना तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए आदिवासी युवा को दिया जाता है। इस सम्मान के अंतर्गत रुपये 1 लाख की सम्मान निधि एवं प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाती है। यह सम्मान किसी एक उपलब्धि के लिए न होकर शिक्षा और/या खेल गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए, सुदीर्घ साधना एवं उपलब्धि के लिए दिया जाता है।

प्राप्तकर्ता[संपादित करें]

वर्ष 2008- श्री राजाराम मौर्य, देवास सम्मानित।

वर्ष 2009 एवं 2010 - प्रक्रियाधीन

विष्णु कुमार समाज सेवा सम्मान[संपादित करें]

मध्यप्रदेश शासन ने समाज सेवा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान, संवेदनशीलता, अनुकरणीय पहल के लिए विख्यात समाजसेवी एवं सेवा भारती के संस्थापक स्व. श्री विष्णु कुमार की स्मृति को संजोये रखने के लिए, विष्णु कुमार समाज सेवा सम्मान स्थापित किए गए हैं। वर्ष 2010 के अधोलिखित सम्मान प्रक्रियाधीन है।

विष्णु कुमार अनुसूचित जाति समाज सेवा सम्मान[संपादित करें]

विष्णु कुमार अनुसूचित जाति समाज सेवा सम्मान किसी एक उपलब्धि के लिए न होकर अनुसूचित जाति के समग्र उत्थान के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन और असाधारण उपलब्धि के लिये देय होगा।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. [1]