चूरू

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
(चूरु से अनुप्रेषित)
Jump to navigation Jump to search
चूरू
राष्ट्रFlag of India.svg भारत
राज्यराजस्थान
जिलाचूरू
ऊँचाई292 मी (958 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • कुल97,627
भाषाएं
 • आधिकारिकहिन्दी
समय मण्डलIST (यूटीसी+५:३०)
पिन331001
दूरभाष कोड01562
वाहन पंजीकरणRJ-10
वेबसाइटwww.churu.nic.in

चूरू भारत के सबसे बड़े राज्य राजस्थान के मरुस्थलीय भाग का एक नगर एवं लोकसभा क्षेत्र है। इसे थार मरुस्थल का द्वार भी कहा जाता है। यह चूरू जिले का जिला मुख्यालय है। चूरू की स्थापना 1620 ई. में राठौड़ वंश ने की थी।[1]

अवस्थिति[संपादित करें]

यह नगर थार मरुस्थल में पाली से अम्बाला को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग ६५ पर बीकानेर को जाने वाले रेल मार्ग 28.2900° N, 74.9600° E पर स्थित है। इस शहर की स्थापना बणीरोत राठौड़ राजपूूूतो ने की थी।

आकर्षण[संपादित करें]

रत्नागढ़[संपादित करें]

यह एक ऐतिहासिक किला है। काफी संख्या में पर्यटक यहां घूमने के लिए आते हैं। इस किले का निर्माण बीकानेर के राजा रत्‍नसिंह ने 1820 ई. में करवाया था। यह किला आगरा-बीकानेर मार्ग पर स्थित है। इस जगह के आसपास कई हवेलियां भी है। यहां रेतीले टीले हवा की दिशा के साथ आकृति और स्थान बदलते रहते हैं। इस शहर में कन्हैया लाल बंगला की हवेली और सुराना हवेली आदि जैसी कई बेहद खूबसूरत हवेलियां हैं, जिनमें हजारों छोटे-छोटे झरोखे एवं खिड़कियाँ हैं। ये राजस्थानी स्थापत्य शैली का अद्भुत नमूना हैं जिनमें भित्तिचित्र एवं सुंदर छतरियों के अलंकरण हैं। नगर के निकट ही नाथ साधुओं का अखाड़ा है, जहां देवताओं की मूर्तियां बनी हैं। इसी नगर में एक धर्म-स्तूप भी बना है जो धार्मिक समानता का प्रतीक है। नगर के केन्द्र में एक दुर्ग है जो लगभग ४०० वर्ष पुराना है।

सालासार बालाजी[संपादित करें]

यह भगवान हनुमान का मंदिर है। यह मंदिर जयपुर-बीकानेर मार्ग पर स्थित है। चूरू भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। माना जाता है कि यहां जो भी मनोकामना मांगी जाए वह पूरी होती है। प्रत्येक वर्ष यहां दो बड़े मेलों का आयोजन किया जाता है। यह मेले चैत्र (अप्रैल) और अश्विन पूर्णिमा (अक्टूबर) माह में लगते हैं। लाखों की संख्या में भक्तगण देश-विदेश से सालासार बालाजी के दर्शन के लिए यहां आते हैं। यह मंदिर पूरे साल खुला रहता है।

सुराना हवेली[संपादित करें]

यह छ: मंजिला इमारत है। यह काफी बड़ी हवेली है। इस हवेली की खिड़कियों पर काफी खूबसूरत चित्रकारी की गई है। इस हवेली में 1111 खिड़कियां और दरवाजे हैं। इस हवेली का निर्माण 1870 में किया गया था।

दूधवा खारा[संपादित करें]

ऐतिहासिक दृष्‍िट से यह स्थान काफी महत्वपूर्ण है। यह स्थान चूरू से 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता और खूबसूरत हवेलियों के प्रसिद्ध है। यहां आकर राजस्थान के असली ग्रामीण परिवेश का अनुभव किया जा सकता है। इसके अलावा यहां ऊंटों की सवारी भी काफी प्रसिद्ध है।

ताल छापर अभयारण्य[संपादित करें]

ताल छापर अभयारण्य चुरू जिले में स्थित है। यह जगह मुख्य रूप से काले हिरण के लिए प्रसिद्ध है। इस अभयारण्य में कई अन्य जानवर जैसे-चिंकारा, लोमड़ी, जंगली बिल्ली के साथ-साथ पक्षियों की कई प्रजातियां भी देखी जा सकती है। इस अभयारण्य का क्षेत्रफल 719 वर्ग हेक्टेयर है।तथा यह कुंरजा पक्षीयो ( demoiselle cranes) के लिये भी नामित है।

कोठारी हवेली[संपादित करें]

इस हवेली का निर्माण एक प्रसिद्ध व्यापारी ओसवाल जैन कोठारी ने करवाया था जिसका नाम उन्होंने अपने गोत्र के नाम पर रखा। इस हवेली पर की गई चित्रकारी काफी सुंदर है। कोठारी हवेली में एक बहुत कलात्मक कमरा है, जिसे मालजी का कमरा कहा जाता है। इसका निर्माण उन्होंने सन 1925 में करवाया था।

छतरी[संपादित करें]

चूरू में कई आकर्षक गुम्बद है। अधिकतर गुम्बदों का निर्माण धनी व्यापारियों ने करवाया था। ऐसे ही एक गुम्बद-आठ खम्भा छतरी का निर्माण सन 1776 में किया गया था।

आवागमन[संपादित करें]

हवाई अड्डा

सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर में है। यह चुरू से 189 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

रेल मार्ग

सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन चूरू है। यह चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

बस मार्ग

देश के कई प्रमुख शहरों से चूरू के लिए बसें चलती हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. के॰के॰ सहगल (1990). Rajasthan District Gazetteers: Churu (vol 8) [राजस्थान के जिलों की विवरणिका: चूरू] (अंग्रेज़ी में). राजस्थान सरकार. पृ॰ 1.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]