चूरू

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चूरू
चूरू is located in राजस्थान
चूरू
राजस्थान, भारत में स्थान
निर्देशांक : 28°18′N 74°57′E / 28.3, 74.95Erioll world.svgनिर्देशांक: 28°18′N 74°57′E / 28.3, 74.95
राष्ट्र Flag of India.svg भारत
राज्य राजस्थान
जिला चूरू
ऊँचाई 292
आबादी (2001)
 • कुल 97,627
भाषाएं
 • आधिकारिक हिन्दी
समय मण्डल IST (यूटीसी +५:३०)
पिन 331001
दूरभाष कोड 01562
वाहन पंजीकरण RJ-10
जालस्थल www.churu.nic.in

चूरू भारतीय राज्य राजस्थान के मरुस्थलीय भाग का एक नगर एवं लोकसभा क्षेत्र है। इसे थार मरुस्थल का द्वार भी कहा जाता है। यह चूरू जिले का प्रशसनिक केन्द्र भी है। यह नगर थार मरुस्थल में[तथ्य वांछित] पाली से अम्बाला को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग ६५ पर बीकानेर को जाने वाले रेल मार्ग की क्रॉसिंग के निकट स्थित है। यहां रेतीले टीले हवा की दिशा के साथ स्था बदलते रहते हैं। इस शहर में कन्हैया लाल बगला की हवेली और सुराना हवेली आदि कई बेहद खूबसूरत हवेलिया हैं, जिनमें हजारों छोटे-छोटे झरोखे एवं खिड़कियाँ हैं। ये राजस्थानी स्थापत्य शैली का अद्भुत नमूना हैं जिनमें फ़्रेस्को पेण्टिंग्स एवं सुंदर छतरियों के अलंकरण भी हैं। नगर के निकट ही नाथ साधुओं का अखाड़ा भी है, जहां बड़े बड़े देवताओं एवं भगवानों की मूर्तियां बनी हैं। इसी नगर में एक धर्म-स्तूप भी बना है जो धार्मिक समानता का प्रतीक है। नगर के केन्द्रमें एक दुर्ग है जो लगभग ४०० वर्ष पुराना है। इस जगह की स्थापना एक जाट ने की थी जिसका नाम चुरू था। उन्हीं के नाम पर इस शहर का नाम चुरू रखा गया। इसकी स्थापना 1620 ईसवीं में की गई थी।

आकर्षण[संपादित करें]

रत्नागढ़[संपादित करें]

यह एक ऐतिहासिक किला है। काफी संख्या में पर्यटक यहां घूमने के लिए आते हैं। इस किले का निर्माण बीकानेर के राजा रत्‍न सिंह ने 1820 ई. में करवाया था। यह किला आगरा-बीकानेर मार्ग पर स्थित है। इस जगह के आस-पास कई हवेलियां भी है।

सालासार बालाजी[संपादित करें]

यह भगवान हनुमान का मंदिर है। यह मंदिर जयपुर-बीकानेर मार्ग पर स्थित है। चुरू भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। माना जाता है कि यहां जो भी मनोकामना मांगी जाए वह पूरी होती है। प्रत्येक वर्ष यहां दो बड़े मेलों का आयोजन किया जाता है। यह मेले चैत्र (अप्रैल) और अश्विन पूर्णिमा (अक्टूबर) माह में लगते हैं। लाखों की संख्या में भक्तगण देश-विदेश से सालासार बालाजी के दर्शन के लिए यहां आते हैं। यह मंदिर पूरे साल खुला रहता है बाला जी भग्वान श्रि राम के पर्म भकत है

सुराना हवेली[संपादित करें]

यह छ: मंजिला इमारत है। यह काफी बड़ी हवेली है। इस हवेली की खिड़कियों पर काफी खूबसूरत चित्रकारी की गई है। इस हवेली में 1111 खिड़कियां और दरवाजे हैं। इस हवेली का निर्माण 1870 में किया गया था।

दूधवा खेरा[संपादित करें]

ऐतिहासिक दृष्‍िट से यह स्थान काफी महत्वपूर्ण है। यह स्थान चुरू से 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता और खूबसूरत हवेलियों के प्रसिद्ध है। यहां आकर ग्रामीण परिवेश का अनुभव होता हे। इसके अलावा यहां ऊंटों की सवारी भी काफी प्रसिद्ध है।

ताल छापर अभयारण्य[संपादित करें]

ताल छापर अभयारण्य चुरू जिले में स्थित है। यह जगह मुख्य रूप से काले किरण के लिए प्रसिद्ध है। इस अभयारण्य में कई अन्य जानवर जैसे-चिंकारा, लोमड़ी, जंगली बिल्ली के साथ-साथ पक्षियों की कई प्रजातियां देखी जा सकती है। इस अभयारण्य का क्षेत्रफल 719 वर्ग हेक्टेयर है।

कोठारी हवेली[संपादित करें]

इस हवेली का निर्माण औसजान जैन ने करवाया था। वह काफी प्रसिद्ध व्यापारी था। इस हवेली का नाम उन्होंने अपने गोत्र के नाम पर रखा था। इस हवेली पर की गई चित्रकारी काफी सुंदर है। कोठारी हवेली में एक बहुत भी अद्भुत कमरा है जिसे मालजी का कमरा कहा जाता है। इसका निर्माण उन्होंने 1925 में करवाया था।

छत्री[संपादित करें]

चुरू में कई यादगार गुम्बद है। अधिकतर गुम्बदों का निर्माण धनी व्यापारियों ने करवाया था। आथ खम्भ छत्री का निर्माण 1776 मे किया गया था।

आवागमन[संपादित करें]

हवाई अड्डा

सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर में है। यह चुरू से 189 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

रेल मार्ग

सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन चुरू है। यह चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

बस मार्ग

देश के कई प्रमुख शहरों से चुरू के लिए बसें चलती हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]


बाहरी कड़ियां[संपादित करें]