कूका
कूका एक सिख संप्रदाय है जिसे नामधारी भी कहते हैं। इस सम्प्रदाय की स्थापना रामसिंह ने की थी। उन दिनों सिख धर्म का जो प्रचलित रूप था वह रामसिंह को मान्य न था। गुरु नानक के समय जो धर्म का स्वरूप था उसे पुनः प्रतिष्ठित करने के निमित्त वे लोकप्रचलित सामाजिक एवं धार्मिक आचार विचार की कटु आलोचना करने लगे। धीरे-धीरे उनके विचारों से सहमत होनेवाले लोगों का एक सप्रंदाय बन गया।
इस धार्मिक संप्रदाय ने आगे चलकर एक क्रांतिकारी राष्ट्रीय दल का रूप धारण कर लिया। महाराष्ट्र के संत रामदास ने महाराष्ट्र में स्वतंत्रता के मंत्र फूँके थे, कुछ उसी तरह का कार्य रामसिंह ने भी किया और 1864 ई. में उन्होंने अपने अनुयायियों को ब्रिटिश सरकार से असहयोग करने का आदेश दिया। इस आदेश के फलस्वरूप इस संप्रदाय ने पंजाब में स्वतंत्र शासन स्थापित करने का प्रयास किया। तब सरकार ने इस पर कठोर प्रतिबंध लगा दिया। रामसिंह और उनके अनुयायियों ने गुप्त रूप से कार्य करना आरंभ किया। गुप्त रूप से शास्त्रास्त्र एकत्र करना और सैनिकों को ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध उभारने का काम किया जाने लगा। इस प्रकार वे लोग पाँच वर्ष तक गुप्त रूप से कार्य करते रहे। 1872 ई. में एक जगह मुसलमानों ने गोवध करना चाहा। कूकापंथियों ने उसका विरोध किया। दोनों दलों के बीच गहरा संघर्ष हुआ। ब्रिटिश सरकार ने रामसिंह को गिरफ्तार कर ब्रह्मदेश (म्यानमार) भेज दिया जहाँ 1885 ई. में उनका निधन हुआ। इसके बाद कूकापंथ का विद्रोहात्मक रूप समाप्त हो गया किंतु धार्मिक संप्रदाय के रूप में पंजाब में आज भी लोहार, जाट आदि अनेक लोगों के बीच इसका महत्व बना हुआ है।
नामधारी सिखों के गुरु
[संपादित करें]| क्र. सं. | नाम
(जन्म–मृत्यु) |
चित्र | गुरुपद काल | संदर्भ |
|---|---|---|---|---|
| गुरु गोबिंद सिंह के उत्तराधिकारी:[note 1] | ||||
| 1. | गुरु बालक सिंह
(1784/1785/1797–1862) |
![]() |
1812–1841 | [1][2] |
| 2. | गुरु राम सिंह
[1816–1885(विवादित), नामधारी विश्वास के अनुसार वे अभी भी जीवित हैं] |
1841–जारी | [3][4][5][6] | |
| 3. | गुरु हरि सिंह
(1819–1906) |
1875–1906 | [7][8] | |
| 4. | गुरु प्रताप सिंह
(1889/1890–1959) |
![]() |
1906–1959 | [9][10] |
| 5. | गुरु जगजीत सिंह
(1920–2012) |
1959–2012 | [11][12][13] | |
| 6. | गुरु उदय सिंह | 2012–वर्तमान | [14] | |
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Guru Balak Singh Ji". www.namdhari-world.com. अभिगमन तिथि: 2022-09-04.
- ↑ "Balak Singh, Baba". The Sikh Encyclopedia. 19 December 2000. अभिगमन तिथि: 2022-09-04.
- ↑ Kaur, Gurjeet (2022). "Kuka Movement: A Historical Perspective" (PDF). International Journal of Law Management & Humanities. 5 (2): 1837–1846. आईएसएसएन 2581-5369.
- ↑ "Sri Satguru Ram Singh Ji - the twelfth Master". www.sikh-heritage.co.uk. अभिगमन तिथि: 2022-09-05.
- ↑ "Satguru Ram Singh Ji". www.namdhari-world.com. अभिगमन तिथि: 2022-09-05.
- ↑ "Ram Singh | Indian philosopher". www.britannica.com. अभिगमन तिथि: 2022-09-05.
Ram Singh, (born 1816, Bhaini, Punjab, India—died 1885, Mergui, Burma [Myanmar])
- ↑ "Satguru Hari Singh Ji". www.namdhari-world.com. अभिगमन तिथि: 2022-09-05.
- ↑ "Sri Satguru Hari सिंह Ji". www.sikh-heritage.co.uk. अभिगमन तिथि: 2022-09-05.
- ↑ "Sri Satguru Partap Singh Ji". www.sikh-heritage.co.uk. अभिगमन तिथि: 2022-09-05.
- ↑ "Satguru Pratap Singh Ji". www.namdhari-world.com. अभिगमन तिथि: 2022-09-05.
- ↑ "Tributes – Newspapers". His Holiness Sri Satguru Jagjit Singh Ji Maharaj. 2013-06-03. अभिगमन तिथि: 2022-09-05.
- ↑ "His Holiness Satguru Guru Jagjit Singh Ji". www.namdhari-world.com. अभिगमन तिथि: 2022-09-05.
- ↑ "Sri Satguru Jagjit Singh Ji". www.sikh-heritage.co.uk. अभिगमन तिथि: 2022-09-05.
- ↑ "Thakur Uday Singh installed as new Namdhari sect chief". www.indiatvnews.com. 2012-12-16. अभिगमन तिथि: 2022-09-05.
- ↑ नामधारी उसी गुरु परंपरा में विश्वास करते हैं जिसमें मुख्यधारा के सिख करते हैं, अंतर केवल इतना है कि वे मानते हैं कि बालक सिंह 11वें गुरु के रूप में गुरु गोबिंद सिंह के उत्तराधिकारी बने, यह विश्वास मुख्यधारा के सिखों द्वारा साझा नहीं किया जाता है। नामधारी गुरु परंपरा वर्तमान समय तक जारी है।
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